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कॉन्सेप्ट बूस्टर · ऑफ़िसर्स लेंस · राजव्यवस्था · कक्षा 2

भारतीय कौन है, और यह तय कौन करे? वीज़ा, मतदाता का नाम और हिरासत केंद्र

Who is an Indian, and who decides? A visa, a voter's name and a holding centre

GS2 · राजव्यवस्थासाथ में GS1 · GS4 · निबंध · साक्षात्कारअध्ययन समय ≈ 60–75 मिनटआज का सूत्र: राजव्यवस्था कार्ड 3 (5 अक्टूबर 2026)साथ में: राजव्यवस्था कार्ड 2 (SIR)
जानोअनुच्छेद 5 से 11, नागरिकता अधिनियम, 1955 और उसके संशोधन, तथा नागरिक, निर्वाचक, OCI कार्डधारक और विदेशी के बीच का अंतर।
जोड़ोनागरिकता का संबंध मूल अधिकारों, चुनाव, संघवाद, सीमाओं, असम, धर्मनिरपेक्षता और राज्यविहीनता से कैसे जुड़ता है।
महसूस करोजिस राज्य पर आपने कभी शक नहीं किया, वही जब आपसे कहे कि साबित करो कि तुम यहीं के हो, तो कैसा लगता है।
निर्णय लोवह जिला-नोट लिखो जो एक अधिकारी तब लिखेगा जब “भारतीय कौन है” से जुड़े तीन अलग-अलग प्रश्न एक ही मेज़ पर आ जाएँ।

1आपकी मेज़ पर फ़ाइल

अत्यावश्यक · निर्णयार्थ
प्रति: जिला मजिस्ट्रेट (साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारी)
विषय: चार काग़ज़, एक प्रश्न: इस जिले में भारतीय कौन है, और यह तय करने का अधिकार किसका है?

अक्टूबर का पहला सप्ताह है। आपका जिला पड़ोसी देश की सीमा से लगा है, यहाँ प्रवासी मज़दूरों की बड़ी आबादी है, और मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision, SIR) नोटिस वाले चरण में है। आपकी मेज़ पर चार काग़ज़ पड़े हैं।

(1) राज्य के विदेशी हिरासत केंद्र के अधीक्षक का पत्र। पुलिस जिसे विदेशी नागरिक बताती है, ऐसी एक महिला कुछ सप्ताह पहले जेल की सज़ा पूरी कर चुकी है, फिर भी भीतर बंद है। उसका परिवार कहता है कि वह आपके ही जिले में जन्मी थी। उच्च न्यायालय की पीठ ने राज्य से पूछा है कि उसे “विधि के किस प्राधिकार से” रखा गया है, और जिले से जवाब माँगा है।
(2) निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) की सूची: 212 मतदाता “तार्किक विसंगतियों” के कारण चिह्नित हैं, जिनमें 40 ने कोई दस्तावेज़ जमा नहीं किया। ERO पूछता है कि क्या नवंबर की समय-सीमा पूरी करने के लिए वह केवल बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) की रिपोर्ट पर इन्हें अपात्र चिह्नित कर सकता है।
(3) एक युवक, दिहाड़ी मज़दूर, जिसका जन्म 1993 में इसी जिले में हुआ। उसके जन्म का पंजीकरण कभी नहीं हुआ; पिता के काग़ज़ बाढ़ में बह गए। एक स्थानीय संगठन ने उसका नाम “संदिग्ध विदेशी” बताकर दे दिया है।
(4) एक प्रतिनिधिमंडल माँग करता है कि जिला प्रशासन “अवैध प्रवासियों” की सूची छापे और उन्हें “इसी सप्ताह” वापस भेजे।

चौबीस घंटे के भीतर अपना नोट प्रस्तुत कीजिए।

यह फ़ाइल शिक्षण के लिए गढ़ा गया मिश्रित उदाहरण है; इसमें किसी वास्तविक व्यक्ति का वर्णन नहीं है। पूरी कक्षा इसी को ध्यान में रखकर पढ़िए। खंड 11 में आप निर्णय लेंगे।

2घटनाक्रम

पिछले सप्ताह की तीन घटनाएँ, और तीनों “भारतीय होने” की ओर खुलने वाले अलग-अलग दरवाज़े हैं। 30 सितंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अमित महाजन ने तुर्कमेनिस्तान की एक नागरिक की याचिका ख़ारिज कर दी। वह 25 मार्च को वैध व्यावसायिक वीज़ा पर दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरी थी और उसी दिन वापस भेज दी गई, जबकि उसी उड़ान से आए उसके पति को प्रवेश दे दिया गया था। न्यायालय ने कहा कि किसी विदेशी नागरिक को भारत में प्रवेश माँगने का “कोई अंतर्निहित या विधिक रूप से प्रवर्तनीय अधिकार” नहीं है, और वीज़ा, प्रवेश की अनुमति तथा आव्रजन मंज़ूरी तीनों अलग-अलग चीज़ें हैं; केंद्र ने सुरक्षा संबंधी “प्रतिकूल इनपुट” का हवाला दिया, जो मुहरबंद लिफ़ाफ़े में दिखाए गए (द हिंदू, कार्ड 3)। 1 अक्टूबर को झारखंड उच्च न्यायालय ने पूछा कि जामताड़ा की एक महिला, जिसे बांग्लादेशी माना गया है, सज़ा पूरी होने के बाद भी हज़ारीबाग़ के विदेशी हिरासत केंद्र में “विधि के किस प्राधिकार से” रखी गई है, जबकि जुलाई में एक न्यायालय उसे विदेशी विषयक अधिनियम के तहत बरी कर चुका है (द इंडियन एक्सप्रेस)। और मतदाता सूची में, निर्वाचन आयोग ने ERONET में ऐसे विकल्प जोड़े हैं जिनसे निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी SIR नोटिस वाले मामलों में बिना सुनवाई के मतदाताओं को निपटा सकते हैं; दिल्ली में 33.1 लाख नोटिस जारी हुए, 350 से अधिक मतदाता अपात्र चिह्नित किए गए, नोटिस चरण 30 नवंबर को समाप्त होगा और अंतिम सूची 4 दिसंबर को आनी है (द हिंदू, कार्ड 2)।

एक ही पुराना प्रश्न तीन नए रूपों में: कौन भीतर आए, किसे हिरासत में रखा जाए, कौन वोट दे? हर उत्तर एक पहले वाले उत्तर पर टिका है: नागरिक कौन है, और यह कहने की शक्ति किसके पास है? पहले प्रश्न का उत्तर संविधान ने 1949 में सात छोटे अनुच्छेदों में दे दिया था; दूसरे का उत्तर संसद का वह अधिनियम देता है जिसे कई बार बदला गया है। यह कक्षा दोनों को सामने रखती है, फिर आपकी फ़ाइल पर लौटती है।

3ढाँचा: संविधान का भाग II और अधिनियम

3क. भाग II, अनुच्छेद 5 से 11 तक: पहले दिन कौन नागरिक था

अनुच्छेदयह क्या करता है
अनु. 5संविधान के प्रारंभ पर भारत में अधिवासी (domiciled) व्यक्ति नागरिक है, यदि (क) वह भारत में जन्मा हो, या (ख) उसके माता-पिता में से कोई भारत में जन्मा हो, या (ग) वह प्रारंभ से ठीक पहले कम से कम पाँच वर्ष से भारत में सामान्यतः निवासी रहा हो।
अनु. 6वर्तमान पाकिस्तान के क्षेत्र से आए प्रवासी नागरिक माने जाते हैं, यदि वे या उनके माता-पिता या पितामह-पितामही में से कोई भारत (भारत शासन अधिनियम, 1935 में यथापरिभाषित) में जन्मा था, और या तो वे 19 जुलाई 1948 से पहले आए और तब से यहीं रह रहे हैं, या उस तिथि को या उसके बाद आए और छह माह के निवास के बाद प्रारंभ से पहले आवेदन पर पंजीकृत हुए।
अनु. 7जो व्यक्ति 1 मार्च 1947 के बाद वर्तमान पाकिस्तान के क्षेत्र में चला गया, वह नागरिक नहीं माना जाएगा; हाँ, यदि वह पुनर्वास या स्थायी वापसी की अनुज्ञप्ति (permit) लेकर लौटा हो, तो उसे 19 जुलाई 1948 को या उसके बाद आया माना जाएगा, यानी अनु. 6 का पंजीकरण मार्ग।
अनु. 8भारतीय मूल का व्यक्ति (जिसके पूर्वज 1935 के अधिनियम के अनुसार अविभाजित भारत के थे) जो भारत से बाहर रहता है, नागरिक माना जाएगा यदि भारतीय राजनयिक या कौंसलीय अधिकारी ने उसे पंजीकृत किया हो।
अनु. 9जिसने स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता ले ली हो, वह न अनु. 5 के अंतर्गत नागरिक है, न अनु. 6 या 8 के अंतर्गत नागरिक माना जाएगा।
अनु. 10जो व्यक्ति पूर्वगामी अनुच्छेदों के अधीन नागरिक है, वह संसद द्वारा बनाई गई किसी भी विधि के अधीन रहते हुए नागरिक बना रहेगा।
अनु. 11भाग II की कोई बात नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों पर विधि बनाने की संसद की शक्ति को कम नहीं करती।

भाग II को पहले दिन की तस्वीर (snapshot) की तरह पढ़िए, नियम-पुस्तिका की तरह नहीं। अनुच्छेद 5 से 9 संविधान अंगीकार होने के दिन, 26 नवंबर 1949 को प्रभावी हुए; अनुच्छेद 10 और 11 सहित शेष संविधान 26 जनवरी 1950 से (अनु. 394)। इसके बाद अनु. 11 जीवित विधि संसद के हाथ में सौंप देता है।

3ख. नागरिकता अधिनियम, 1955 (Citizenship Act, 1955): भीतर आने के पाँच रास्ते, बाहर जाने के तीन

तरीक़ानियम (तिथियों के जाल सहित)
जन्म (धारा 3)भारत में 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद, पर 1 जुलाई 1987 से पहले जन्मा व्यक्ति नागरिक है, माता-पिता चाहे जो हों। 1 जुलाई 1987 से 3 दिसंबर 2004 तक: जन्म के समय माता-पिता में से कम से कम एक नागरिक हो। 3 दिसंबर 2004 के बाद: दोनों माता-पिता नागरिक हों, या एक नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो। उन्मुक्ति प्राप्त राजनयिकों की और शत्रु-अधिकृत क्षेत्र में शत्रु विदेशियों की संतानें इससे बाहर हैं।
वंशक्रम (धारा 4)भारत के बाहर किसी भारतीय माता या पिता से जन्म। 10 दिसंबर 1992 से पहले केवल पिता की नागरिकता गिनी जाती थी; 10 दिसंबर 1992 से माता-पिता में से किसी एक की। भारतीय वाणिज्य दूतावास में पंजीकरण आवश्यक है, कुछ शर्तों के साथ।
पंजीकरण (धारा 5)कुछ श्रेणियों के लिए, जैसे भारत में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्ति (सात वर्ष), नागरिकों के जीवनसाथी, नागरिकों की अवयस्क संतानें और भूतपूर्व नागरिक।
देशीयकरण (धारा 6)तीसरी अनुसूची की शर्तें पूरी करने वालों को प्रमाण-पत्र: आवेदन से ठीक पहले बारह माह का निवास, और उससे पहले के चौदह वर्षों में कुल ग्यारह वर्ष का निवास, अच्छा चरित्र, आठवीं अनुसूची की किसी भाषा का ज्ञान और यहाँ बसने का इरादा। विज्ञान, कला, साहित्य, विश्व-शांति या मानव-प्रगति में विशिष्ट सेवा छूट का आधार हो सकती है।
राज्यक्षेत्र का समावेशनजब कोई राज्यक्षेत्र भारत में जोड़ा जाए, तो सरकार आदेश द्वारा बता सकती है कि कौन नागरिक बनेंगे। अधिनियम इसे पाँचवाँ तरीक़ा बताता है।
बाहर: त्याग (धारा 8), समाप्ति (धारा 9), वंचन (धारा 10)धारा 8: पूर्ण आयु का नागरिक त्याग की घोषणा करता है। धारा 9: जो नागरिक स्वेच्छा से दूसरे देश की नागरिकता ले ले, वह भारतीय नहीं रहता; धारा 9(2) के अनुसार कब और कैसे, यह विहित प्राधिकारी तय करता है। धारा 10: केंद्र पंजीकृत या देशीयकृत नागरिक को छल, संविधान के प्रति निष्ठाहीनता, शत्रु से व्यापार, पंजीकरण के पाँच वर्ष के भीतर दो वर्ष के कारावास, या सात वर्ष लगातार विदेश-निवास के आधार पर वंचित कर सकता है, नोटिस के बाद और अधिकांश आधारों में जाँच के बाद।

अधिनियम “अवैध प्रवासी” (धारा 2(1)(ख)) उस विदेशी को कहता है जो वैध पासपोर्ट या यात्रा-दस्तावेज़ के बिना आया हो, या अनुमत अवधि से अधिक ठहरा हो। यह स्थिति पंजीकरण और देशीयकरण का रास्ता रोकती है, और तय करती है कि 2004 के बाद बच्चे का जन्म गिना जाएगा या नहीं।

3ग. किसके पास क्या: नागरिक, OCI कार्डधारक, विदेशी

अधिकार या पदनागरिकOCIविदेशी
अनु. 14, 21 (समता; प्राण और दैहिक स्वतंत्रता)हाँहाँहाँ
अनु. 15, 16, 19, 29, 30हाँनहींनहीं
मतदान; संसद या विधानसभा का चुनाव लड़ना (अनु. 326 और निर्वाचन विधि)हाँनहीं (धारा 7ख)नहीं
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल, उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय का न्यायाधीश, महान्यायवादी (अनु. 58, 66, 157, 124, 217, 76)पात्रनहींनहीं
भारत में प्रवेशवीज़ा की आवश्यकता नहींOCI योजना के अंतर्गतवीज़ा आवश्यक, और वीज़ा यात्रा की अनुमति है, प्रवेश पाने का अधिकार नहीं

OCI (Overseas Citizen of India, भारत की प्रवासी नागरिकता) योजना नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2003 से शुरू हुई; 2015 में भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO) कार्डधारक OCI में बदल दिए गए। OCI दीर्घकालिक दर्जा है, नागरिकता नहीं। भारत में दोहरी नागरिकता नहीं है: धारा 9 के अनुसार स्वेच्छा से दूसरी नागरिकता लेते ही भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाती है।

3घ. आज के कार्डों के दो विशेष क़ानून

आव्रजन और विदेशी विषयक अधिनियम, 2025 (Immigration and Foreigners Act, 2025) (27 मार्च और 2 अप्रैल 2025 को पारित) पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920, विदेशी पंजीकरण अधिनियम, 1939, विदेशी विषयक अधिनियम, 1946 और आव्रजन (वाहक दायित्व) अधिनियम, 2000 को निरस्त करता है। यह प्रवेश के लिए वैध पासपोर्ट के साथ वैध वीज़ा अनिवार्य करता है, आव्रजन ब्यूरो बनाता है, और उचित दस्तावेज़ों के बिना प्रवेश पर पाँच वर्ष तक के कारावास और ₹5 लाख तक के जुर्माने का दंड देता है (PRS)। कार्ड के अनुसार धारा 7 केंद्र को प्रवेश के विनियमन या निर्बंधन की शक्ति देती है।

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA) अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों को “अवैध प्रवासी” नहीं मानता, और उनके देशीयकरण का निवास-काल ग्यारह वर्ष से घटाकर पाँच वर्ष कर देता है (PRS)। असम, मेघालय, मिज़ोरम और त्रिपुरा के छठी अनुसूची वाले क्षेत्र तथा “इनर लाइन” क्षेत्र इससे बाहर हैं। यह 10 जनवरी 2020 से प्रभावी हुआ; नियम 11 मार्च 2024 को अधिसूचित हुए और पहले प्रमाण-पत्र 15 मई 2024 को जारी हुए।

4बारीकियाँ: टॉपर को बाक़ियों से क्या अलग करता है

1. भाग II एक तस्वीर है; अनुच्छेद 11 उसका स्विच। संविधान सभा ने अनुच्छेद 5 और 6 पर 10–12 अगस्त 1949 को बहस की; आंबेडकर ने इन्हें केवल प्रारंभ की तिथि पर नागरिकता तक सीमित बताकर रखा और शेष संसद पर छोड़ा। एक सदस्य को लगा कि इससे भारतीय नागरिकता “दुनिया में सबसे सस्ती” हो जाएगी; नेहरू ने अनुज्ञप्ति वाले प्रावधानों का बचाव परस्पर-विरोधी हितों के संतुलन के रूप में किया। इसलिए जन्म से लेकर देशीयकरण और OCI तक लगभग हर जीवंत प्रश्न संविधान का नहीं, क़ानून का है।
2. अनुच्छेद 9 पीछे देखता है; धारा 9 आगे। State of Madhya Pradesh v. Peer Mohd. (1962) में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अनुच्छेद 9 संविधान के प्रारंभ से पहले ली गई विदेशी नागरिकता को समेटता है; बाद का अर्जन 1955 के अधिनियम की धारा 9 के अंतर्गत आता है। Government of Andhra Pradesh v. Syed Mohd. Khan (1962) में न्यायालय ने कहा कि विदेशी पासपोर्ट मात्र से भारतीय नागरिकता समाप्त नहीं होती: निष्कासन से पहले केंद्र को, धारा 9(2) के अधीन विशेष अधिकरण की तरह कार्य करते हुए, पहले निर्णय देना होगा।
3. जन्म तिथियों की पहेली है। 1985 में भारत में जन्मी बच्ची नागरिक है, माता-पिता की स्थिति चाहे जो हो; 1995 में जन्मी के लिए एक नागरिक अभिभावक चाहिए; 2010 में जन्मी के लिए दोनों अभिभावक नागरिक हों, या एक नागरिक और दूसरा अवैध प्रवासी न हो। इसलिए “यहीं जन्मा, पर माता-पिता के काग़ज़ खो गए” वाला मामला असल में यह प्रश्न है कि जन्म की तिथि पर कौन-सा क़ानून लागू था; और जन्म प्रमाण-पत्र अधिकारी का सबसे अच्छा साथी है।
4. नागरिक, निर्वाचक और दस्तावेज़-धारक, ये तीन अलग चीज़ें हैं। 8 सितंबर 2025 को बिहार SIR मामले में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है, हालाँकि वह सूची के लिए एक पहचान-दस्तावेज़ के रूप में काम आ सकता है। Association for Democratic Reforms v. Election Commission of India (27 मई 2026) में उसने SIR को वैध ठहराया, पर कहा कि निर्वाचन प्रयोजन से आयोग की नागरिकता-संबंधी जाँच सीमित है: निर्णायक प्रश्न नागरिकता अधिनियम, 1955 के अधीन प्राधिकारियों के पास जाएँगे, और नागरिकता के आधार पर काटे गए नाम उन्हें भेजे जाएँगे। उसने पूर्व में नाम दर्ज होने को खंडन-योग्य उपधारणा (rebuttable presumption) कहा और Lal Babu Hussein (1995) से इसे अलग रखा, जिसमें अधिकारी को जिस सामग्री पर वह निर्भर है उसे बताना और खंडन का उचित अवसर देना आवश्यक था; टीकाकार इस पर भिन्न मत रखते हैं कि नया निर्णय पुराने को कितना सीमित करता है।
5. विदेशी को अनुच्छेद 21 मिलता है, प्रवेश का अधिकार नहीं। NHRC v. State of Arunachal Pradesh (1996): विदेशियों को अनुच्छेद 21 प्राप्त है, और अधिकारियों को चकमा शरणार्थियों के नागरिकता आवेदन केंद्र को भेजने होंगे। Louis De Raedt (1991), जैसा द हिंदू लिखता है, विदेशी के मूल अधिकारों को अनुच्छेद 21 तक सीमित करता है, और Hans Muller (1955) व्यापक विवेकाधिकार को मान्य करता है। यही दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय के पीछे की विधि-रेखा है: प्रवेश का अधिकार नहीं, पर प्रक्रिया की जाँच फिर भी होती है।
6. किसे क्या सिद्ध करना है। विदेशी विषयक अधिनियम, 1946 की धारा 9 ने यह भार व्यक्ति पर डाला कि वह दिखाए कि वह विदेशी नहीं है; Sarbananda Sonowal v. Union of India (2005) ने अवैध प्रवासी (अधिकरणों द्वारा अवधारण) अधिनियम, 1983 को रद्द करके असम में इसे बहाल किया। 13 जुलाई 2026 को विदेशी अधिकरणों के आदेशों के विरुद्ध असम की अपीलों में न्यायालय ने कहा कि यह भार यांत्रिक निर्णयों का बहाना नहीं बन सकता: एकपक्षीय मामलों में भी अधिकरण को नोटिस की तामील जाँचनी होगी, आधार बताने होंगे और समर्थक सामग्री रखनी होगी; उसने नए सिरे से निर्णय का आदेश दिया और “राज्यविहीनता” के जोखिम का उल्लेख किया। 1946 का अधिनियम अब निरस्त है, इसलिए देखिए कि 2025 का अधिनियम भार को कैसे संभालता है।
7. असम का अपना खंड है। 1985 के असम समझौते के बाद जोड़ी गई धारा 6क 1 जनवरी 1966 से पहले असम आए भारतीय मूल के व्यक्तियों को नागरिक मानती है, और 1 जनवरी 1966 से 25 मार्च 1971 के बीच आए लोगों को पहचान के बाद पंजीकरण की अनुमति देती है, दस वर्ष बाद पूर्ण अधिकारों के साथ। 17 अक्टूबर 2024 को संविधान पीठ ने इसे 4:1 से वैध ठहराया (न्यायमूर्ति पारदीवाला असहमत), और 1971 की तिथि को “विभाजन के प्रवासियों” और “युद्ध के प्रवासियों” के बीच की रेखा माना। 31 अगस्त 2019 की असम NRC अंतिम सूची में लगभग 3.3 करोड़ आवेदकों में से 3,11,21,004 नाम अंदर और 19,06,657 बाहर थे।
8. CAA की बहस, निष्पक्ष रूप में। 9 दिसंबर 2019 को गृह मंत्री ने लोकसभा में इसका बचाव “युक्तियुक्त वर्गीकरण” के रूप में किया: उन तीन देशों के प्रताड़ित अल्पसंख्यक, जहाँ इस्लाम राज्य का धर्म है। विरोधियों ने तर्क दिया कि धर्म को कसौटी बनाना अनुच्छेद 14 और धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन है, और पूछा कि मुसलमान क्यों छोड़े गए; PRS ने नोट किया कि विधेयक के उद्देश्यों के कथन में धर्म के आधार पर भेद का कारण नहीं बताया गया था। 19 फ़रवरी 2026 को उच्चतम न्यायालय ने चुनौतियों को 5 मई 2026 से अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया; यह कक्षा किसी परिणाम को नहीं मानती। यह अधिनियम बदलता है कि अवैध प्रवासी किसे माना जाए और प्रतीक्षा को छोटा करता है; यह भारत में जन्मे किसी की नागरिकता का निर्णय नहीं करता।

5विचार कैसे विकसित हुआ

1 मार्च 1947 → 19 जुलाई 1948विभाजन की दो तिथियाँ। अनु. 7 पहली पर टिका है (1 मार्च 1947 के बाद पाकिस्तान चले जाना) और अनु. 6 दूसरी पर (19 जुलाई 1948 को या उसके बाद आने पर पंजीकरण आवश्यक)।
10–12 अगस्त 1949संविधान सभा में अनुच्छेद 5 और 6 पर बहस। आंबेडकर इन्हें केवल प्रारंभ के दिन तक सीमित बताते हैं।
26 नवंबर 1949 / 26 जनवरी 1950अनुच्छेद 5 से 9 अंगीकार होते ही प्रभावी (अनु. 394); अनुच्छेद 10 और 11 सहित शेष संविधान गणतंत्र दिवस से।
30 दिसंबर 1955नागरिकता अधिनियम, 1955 लागू होता है और अर्जन के पाँच तरीक़े देता है।
1962Peer Mohd. और Syed Mohd. Khan: अनुच्छेद 9 अतीत के बारे में है; बाद के मामलों में धारा 9 और केंद्र की जाँच लागू होती है।
1985असम समझौते से धारा 6क बनती है, 1 जनवरी 1966 और 25 मार्च 1971 की सीमा-तिथियों के साथ।
1995 → 1996Lal Babu Hussein (जिन मतदाताओं की नागरिकता पर संदेह हो, उनके लिए उचित प्रक्रिया); NHRC v. Arunachal Pradesh (विदेशियों के लिए अनुच्छेद 21)।
2003 → 20052003 का संशोधन OCI बनाता है और 3 दिसंबर 2004 से जन्म का नियम कड़ा करता है। 2005 में Sonowal IMDT अधिनियम को रद्द करता है।
2019असम NRC की अंतिम सूची (31 अगस्त); दिसंबर में CAA पारित (लोकसभा 9 दिसंबर, राज्यसभा 11 दिसंबर, राष्ट्रपति की स्वीकृति 12 दिसंबर) और 10 जनवरी 2020 से प्रभावी।
2024CAA नियम अधिसूचित (11 मार्च); पहले प्रमाण-पत्र (15 मई); धारा 6क वैध (17 अक्टूबर)।
2025 → 2026आव्रजन और विदेशी विषयक अधिनियम, 2025 (27 मार्च और 2 अप्रैल को पारित); आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं (8 सितंबर); SIR वैध (27 मई 2026); विदेशी अधिकरण पर निर्णय (13 जुलाई); वीज़ा पर दिल्ली उच्च न्यायालय (30 सितंबर); हिरासत पर झारखंड उच्च न्यायालय का प्रश्न (1 अक्टूबर)।

6एक मुद्दा, छह दृष्टिकोण

राजव्यवस्था एवं विधि

अनुच्छेद 11 संसद को खुला हाथ देता है। न्यायालय प्रक्रिया पर पहरा देते हैं: अनुच्छेद 14 और 21 हर व्यक्ति तक पहुँचते हैं, और प्रवेश पर व्यापक शक्ति के बावजूद लिखित निर्णय चाहिए। तीन प्रश्न, तीन निकाय: प्रवेश आव्रजन अधिकारी तय करता है, सूची ERO, और नागरिकता नागरिकता अधिनियम के अधीन सक्षम प्राधिकारी।
याद रखिए: प्रवेश, मतदाता-पंजीकरण और नागरिकता तीन अलग निर्णय हैं, एक नहीं।

सामाजिक न्याय

जिन पर सबसे आसानी से शक किया जाता है, वे सबसे ग़रीब हैं: जन्म प्रमाण-पत्र नहीं, विवाह के बाद गाँव बदलने वाली महिलाएँ, प्रवासी मज़दूर, बाढ़-पीड़ित, दो तरह से लिखे गए नाम। “विदेशी” घोषित होने का अर्थ हिरासत, परिवार से बिछोह और, जैसा जुलाई 2026 का निर्णय कहता है, राज्यविहीनता भी हो सकता है।
याद रखिए: प्रमाण का बोझ उन पर सबसे भारी पड़ता है जिनके पास सबसे कम काग़ज़ हैं।

शासन

राज्य को कल्याण, चुनाव और सीमाओं के लिए रजिस्टर चाहिए, पर रजिस्टर उतना ही निष्पक्ष होता है जितना अधिकारी का आदेश: लिखित निर्देश, सुनवाई, कारण, अपील। कार्ड 2 में एक ERO वीडियो के आधार पर काम करता दिखता है, जबकि कोई लिखित नियम नहीं है।
याद रखिए: विधिसम्मत प्रक्रिया कठिन निर्णय को भी स्वीकार्य बना देती है।

अर्थव्यवस्था

लाखों कामगार काम के लिए राज्यों और सीमाओं के पार जाते हैं। गाँव से बँधे दस्तावेज़ साथ नहीं चलते। देशीयकरण और OCI प्रेषण, निवेश और कौशल को आकार देते हैं; 2022 से 2024 में हर वर्ष दो लाख से अधिक भारतीयों ने नागरिकता छोड़ी (2,25,620; 2,16,219; 2,06,378, 8 अगस्त 2025 के लोकसभा उत्तर के अनुसार)।
याद रखिए: गतिशीलता के लिए ऐसा प्रमाण चाहिए जो साथ चल सके।

नैतिकता

दो कर्तव्य टकराते हैं: राज्य का अपने लोगों और सीमाओं की रक्षा करने का कर्तव्य, और हर व्यक्ति को साधन नहीं, साध्य मानने का कर्तव्य। अधिकारी की कसौटियाँ हैं: आनुपातिकता, लिखित कारण, और वास्तविक जोखिम के लिए आवश्यक न्यूनतम हानि।
याद रखिए: संदेह जाँच का कारण है, जाँच छोड़ देने का कभी नहीं।

नागरिक एवं राष्ट्र

राष्ट्र को “कौन अपना है” का साफ़ उत्तर चाहिए, और भीतर के लोगों को भरोसा चाहिए कि वह उत्तर निष्पक्ष है। नागरिकों में बहिष्कार का भय एकता को उतना ही चोट पहुँचाता है जितना अवैध प्रवेश।
याद रखिए: सुरक्षित सीमाएँ और सुरक्षित अपनापन साथ-साथ बनाने होंगे।

7काग़ज़ से गाँव तक: क्रियान्वयन की शृंखला

1
संसद और केंद्र क़ानून और नियम बनाते हैं (नागरिकता अधिनियम, आव्रजन और विदेशी विषयक अधिनियम, नियम)। यहाँ टूटता है: जब जिला अधिकारी को निर्देश लिखित में नहीं, फ़ोन या वीडियो पर मिलता है।
2
आव्रजन अधिकारी / पुलिस सीमा या हवाई अड्डे पर प्रवेश जाँचते हैं और विदेशी कौन है, इस पर पहली राय बनाते हैं। यहाँ टूटता है: जब “प्रतिकूल इनपुट” कभी ऐसे तर्कपूर्ण आदेश के रूप में दर्ज नहीं होते जिसे न्यायालय पढ़ सके, मुहरबंद लिफ़ाफ़े में भी नहीं।
3
BLO और ERO (जिला निर्वाचन अधिकारी के अधीन) निर्वाचक का सत्यापन करते हैं। यहाँ टूटता है: जब बिना सुनवाई और बिना कारण के नाम अपात्र चिह्नित कर दिया जाए और वह निशान पलटा न जा सके।
4
सक्षम प्राधिकारी: विदेशी नागरिकता के अर्जन पर धारा 9(2) के अधीन केंद्र, और जहाँ विदेशी-विषयक क़ानून अधिकरण देता है, वहाँ अधिकरण। यहाँ टूटता है: जब नोटिस की तामील के प्रमाण के बिना एकपक्षीय आदेश जारी हो जाए।
5
हिरासत और हिरासत केंद्र: राज्य के अधिकारी व्यक्ति को केवल विधिसम्मत आदेश पर रखते हैं। यहाँ टूटता है: जब सज़ा समाप्त हो जाए या बरी होने का आदेश आ जाए और कोई यह न पूछे कि अब किस आदेश से व्यक्ति भीतर है।
6
व्यक्ति स्वयं को जन्म-अभिलेख, स्कूल प्रमाण-पत्र, भूमि का काग़ज़, विधिक सहायता और हर आदेश की प्रति चाहिए। यहाँ टूटता है: जब सबसे ग़रीब व्यक्ति से ही अपेक्षा हो कि वह काग़ज़ ढूँढ़कर लाए।

8कौन क्या चाहता है

हितधारकचाहते हैंडरउनका वाजिब तर्क
केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँप्रवेश पर नियंत्रण; साफ़ सूची; गतिघुसपैठ; सुरक्षा-इनपुट पर न्यायालयों का दोबारा विचारप्रवेश पर संप्रभुता स्थापित विधि है, और मुहरबंद लिफ़ाफ़े के इनपुट वास्तविक भी हो सकते हैं।
निर्वाचन आयोग और EROबिना फ़र्ज़ी प्रविष्टियों वाली सूची; व्यावहारिक समय-सीमाएँअसंभव कार्यभार; किसी भी त्रुटि का दोषसूची का पुनरीक्षण होना ही चाहिए; अनु. 324 आयोग को उसका नियंत्रण देता है।
ग़रीब और प्रवासी परिवारअपना नाम, घर और वोट बचाए रखनाबिना सुनवाई नाम कटना; हिरासतकाग़ज़ खो जाने से नागरिकता नहीं खोती।
CAA के समर्थकतीन पड़ोसी देशों के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को शरणएक मानवीय क़ानून से वंचित रह जानाविभाजन ने लोगों को उस पार छोड़ दिया; वर्गीकरण युक्तियुक्त हो सकता है।
CAA के आलोचकऐसा नागरिकता क़ानून जो धर्म पर निर्भर न होधार्मिक कसौटी; मुसलमानों और अन्य का बहिष्कारअनुच्छेद 14 और संविधान का धर्मनिरपेक्ष स्वरूप ऐसी कसौटियाँ हैं जिन पर हर मानदंड को खरा उतरना होगा।

9मानवीय पहलू: संवेदनात्मक बुद्धि, नागरिक पहले, राष्ट्र पहले

आपके काउंटर पर तीन लोग। एक महिला सज़ा पूरी कर चुकी है और अपने बच्चों से दूर हिरासत केंद्र में बैठी है। उसे नहीं पता कि उसे वहाँ रखने वाले काग़ज़ में क्या लिखा है, और किसी ने उसे पढ़कर सुनाया नहीं। एक युवा मज़दूर, जो आपके जिले में जन्मा है, बताया जाता है कि एक काग़ज़ के न होने से उसका नाम “संदिग्ध विदेशी” सूची में है। उसके लिए फ़ॉर्म एक धमकी है। और एक सेवानिवृत्त पंचायत लिपिक, जो सत्तर वर्ष से नागरिक है, को SIR का नोटिस मिलता है और वह सोचता है कि राज्य उससे कह रहा है कि तुम यहाँ के नहीं हो।

संवेदनात्मक बुद्धि वाली अधिकारी लेबल से नहीं, व्यक्ति से शुरू करती है। वह महिला को उसकी समझ की भाषा में बताती है कि उसके ठहरने या रिहाई का विधिक आधार क्या है, और सुनिश्चित करती है कि परिवार को पता हो कि वह कहाँ है और वकील तक कैसे पहुँचा जाए। वह मज़दूर को बताती है कि जन्म को कौन-से काग़ज़ सिद्ध करते हैं, उन्हें जुटाने में उसकी मदद करती है, और सूची को ठुकरा देती है। वह लिपिक को बताती है कि नोटिस क्या है, उसे क्या लाना है, और यह कि जाँच कोई आरोप नहीं है।

नागरिक पहले: जब तक विधिसम्मत प्रक्रिया अन्यथा न कहे, व्यक्ति को अपना माना जाए, और प्रक्रिया ऐसी हो जिसे वह समझ सके और जिसका उत्तर दे सके। राष्ट्र पहले: किसी भी सीमावर्ती जिले के लिए अवैध प्रवेशी एक वास्तविक चिंता है, और उसका उत्तर साफ़, तर्कपूर्ण प्रक्रिया है जो न्यायालय में टिक सके, कोई शॉर्टकट नहीं जो नागरिकों को राज्य से डरा दे।

10अवधारणा-जाल: यह आपके मन में कहाँ बैठता है

मूल अधिकार चुनाव और मतदाता सूची धर्मनिरपेक्षता और CAA संघ और संघवाद सीमाएँ और सुरक्षा असम और NRC प्रवासन और प्रवासी भारतीय नैसर्गिक न्याय और नैतिकता नागरिकताअनु. 5–11

11आपका निर्णय: फ़ाइल पर वापसी

आप जिला मजिस्ट्रेट और जिला निर्वाचन अधिकारी हैं। अपनी योजना चुनिए:

अधिकारी का लिखा नोट

1. जिले के सामने तीन प्रश्न हैं: सूची में कौन हो सकता है, नागरिक कौन है, और किस आदेश से व्यक्ति को रखा गया है। इनके तीन अलग उत्तर हैं और तीन अलग प्राधिकारी। 2. सूची: जिन 172 मतदाताओं के काग़ज़ एकत्र किए गए हैं, उन्हें शीघ्र निपटाया जाए। बिना दस्तावेज़ वाले 40 मतदाताओं को दर्ज सुनवाई के लिए बुलाया जाए और अपात्रता का कोई निशान लगाने से पहले कारण सहित लिखित आदेश दिया जाए; अपात्र का निशान पलटा नहीं जा सकता, इसलिए केवल BLO की रिपोर्ट पर कोई विलोपन नहीं। निर्वाचन आयोग से लिखित निर्देश माँगे जाएँ। जहाँ सुनवाई के बाद भी नागरिकता पर संदेह बना रहे, वहाँ मामला नागरिकता अधिनियम के अधीन प्राधिकारी को भेजा जाए, जैसा उच्चतम न्यायालय ने 27 मई 2026 को निर्देश दिया। 3. युवा मज़दूर: निजी सूची पर कोई कार्रवाई नहीं। उपखंड मजिस्ट्रेट उसे विलंबित जन्म पंजीकरण और स्कूल या अस्पताल के अभिलेख दिलाने में सहायता करें। 1993 में जन्मा होने से वह जन्म से नागरिक है यदि उसके जन्म के समय माता-पिता में से कोई नागरिक था; माता-पिता की स्थिति का प्रमाण विधिक सहायता से जुटाया जाए। कोई बलपूर्वक क़दम नहीं। 4. हिरासत केंद्र: अधीक्षक वह लिखित आदेश प्रस्तुत करें जिसके अधीन महिला रखी गई है और सज़ा समाप्त होने के बाद के हर दिन का विधिक आधार बताएँ; यदि कोई नहीं है, तो उसे रिहा किया जाए या न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। उसके परिवार को बताया जाए कि वह कहाँ है और विधिक सहायता तक कैसे पहुँचें। 5. प्रतिनिधिमंडल: “अवैध प्रवासियों” की कोई सूची प्रकाशित नहीं की जाएगी। अवैध प्रवेश के किसी भी संदिग्ध से पुलिस और सक्षम प्राधिकारी विधि के अनुसार, नोटिस, सुनवाई और कारणों के साथ निपटेंगे। 6. अनुमोदनार्थ प्रस्तुत।

12परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

प्रश्नपत्रयह अवधारणा आपके कैसे काम आती है
प्रारंभिक परीक्षाअनुच्छेद 5 से 11 और उनकी तिथियाँ (1 मार्च 1947, 19 जुलाई 1948, 26 जनवरी 1950); अर्जन और हानि के तरीक़े; जन्म की तीन तिथियाँ; OCI और CAA 2019 के ब्योरे; भाग III के वे अधिकार जो व्यक्तियों को मिलते हैं और जो केवल नागरिकों को।
GS2 — राजव्यवस्था एवं शासननागरिकता के प्रावधान; ग़ैर-नागरिकों के मूल अधिकार; मतदाता सूची का पुनरीक्षण और निर्वाचन आयोग; आव्रजन और विदेशी विषयक अधिनियम, 2025; असम और CAA।
GS1 / GS3विभाजन और प्रवासन (GS1); सीमा-प्रबंधन और अवैध प्रवासन (GS3)।
GS4 — नीतिशास्त्रखंड 11 में अधिकारी की दुविधा: सुरक्षा बनाम गरिमा, और व्यक्ति के प्रति कर्तव्य बनाम आदेश।
निबंध“अपनेपन और राज्य का प्रश्न: कौन तय करे कि हममें से कौन है?”; “काग़ज़ किसी व्यक्ति को सिद्ध तो कर सकते हैं, पर क्या उसे परिभाषित भी कर सकते हैं?”
साक्षात्कार“आपके जिले में एक आदमी के पास जन्म प्रमाण-पत्र नहीं है और एक स्थानीय समूह कहता है कि वह विदेशी है। सोमवार सुबह आप क्या करेंगे?”
जाल: “अनुच्छेद 9 उस हर भारतीय की नागरिकता समाप्त कर देता है जो 1950 के बाद विदेशी नागरिकता ले ले।” — ग़लत; अनुच्छेद 9 संविधान के प्रारंभ से पहले के अर्जन को समेटता है (Peer Mohd., 1962)। बाद के मामले नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9 के अंतर्गत आते हैं, जिसका निर्णय केंद्र करता है।
जाल: “3 दिसंबर 2004 के बाद भारत में जन्मा बच्चा जन्म से नागरिक है।” — ग़लत; दोनों माता-पिता नागरिक हों, या एक नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो।
जाल: “आधार नागरिकता का प्रमाण है।” — ग़लत; उच्चतम न्यायालय ने 8 सितंबर 2025 को कहा कि वह नहीं है, हालाँकि वह सूची के लिए पहचान-दस्तावेज़ के रूप में काम आ सकता है।
जाल: “अनुच्छेद 14 और 21 केवल नागरिकों पर लागू होते हैं।” — ग़लत; ये किसी भी व्यक्ति की रक्षा करते हैं। अनुच्छेद 15, 16, 19, 29 और 30 नागरिकों के लिए हैं।
जाल: “CAA 2019 भारत के पड़ोसियों के सभी प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को शामिल करता है।” — ग़लत; यह अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के छह नामित समुदायों को शामिल करता है जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले आए, और छठी अनुसूची तथा इनर लाइन क्षेत्रों को छोड़ता है।

मुख्य परीक्षा अभ्यास 1 (GS2)

“वैध वीज़ा प्रवेश का अधिकार नहीं है और सूची में नाम नागरिकता का प्रमाण नहीं है।” परीक्षण कीजिए कि भारतीय विधि प्रवेश, मतदाता-पंजीकरण और नागरिकता को कैसे अलग रखती है, और हर निर्णय को कौन-से रक्षोपाय चाहिए। (15 अंक, 250 शब्द)
उत्तर का दृष्टिकोणनिर्देश — परीक्षण कीजिए: कथन की परख कीजिए और बताइए कि रक्षोपाय कहाँ हैं। भूमिका: दिल्ली उच्च न्यायालय (30 सितंबर 2026): वीज़ा, अनुमति और मंज़ूरी अलग हैं; उच्चतम न्यायालय (27 मई 2026): निर्वाचक की जाँच निर्णायक नागरिकता नहीं है। मुख्य भाग: (1) प्रवेश: संप्रभु विवेकाधिकार (Hans Muller 1955; 2025 का अधिनियम), पर अनुच्छेद 21 बचा रहता है (NHRC v. Arunachal 1996; Louis De Raedt 1991) और कारण दर्ज होने चाहिए; (2) मतदाता-पंजीकरण: अनुच्छेद 324, 326; विलोपन से पहले सुनवाई (Lal Babu Hussein 1995); आधार पहचान कराता है, नागरिकता सिद्ध नहीं करता; (3) नागरिकता: अनुच्छेद 11, अधिनियम, केंद्र या अधिकरण, और एकपक्षीय आदेशों की जुलाई 2026 की छानबीन। निष्कर्ष: तीनों निर्णय अलग रखें, कारण लिखें, अपील की अनुमति दें। आरेख: तीन खाने, हर एक में प्राधिकारी और उपचार।

मुख्य परीक्षा अभ्यास 2 (GS2)

“संविधान के भाग II ने पहले नागरिक बनाए; शेष संसद ने बनाए हैं।” अनुच्छेद 11 तथा जन्म, देशीयकरण और OCI की बदलती विधि के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
उत्तर का दृष्टिकोणनिर्देश — चर्चा कीजिए: बात और उसकी सीमाएँ रखिए। भूमिका: अनुच्छेद 5 से 9 पहले दिन की तस्वीर के रूप में; अनुच्छेद 11 खुले द्वार के रूप में। मुख्य भाग: नागरिकता अधिनियम, 1955 के पाँच तरीक़े; 1987 और 2004 में जन्म-आधारित नागरिकता का संकुचन; 1992 से माता के माध्यम से वंशक्रम; OCI (2003; 2015 का परिवर्तन); विशेष मामलों के रूप में CAA, 2019 और धारा 6क; प्रक्रिया में न्यायालयों की भूमिका (Sonowal 2005; धारा 6क 2024; जुलाई 2026)। मूल्य-संवर्धन: 10–12 अगस्त 1949 की संविधान सभा की बहस। निष्कर्ष: लचीलापन बदलते राष्ट्र के काम आता है, पर उसे संवैधानिक अंकुश और स्पष्ट प्रक्रिया चाहिए।

13स्वयं को परखें

1. अनुच्छेद 6 की दो प्रवासन-तिथियों में क्या अंतर है?
उत्तरवर्तमान पाकिस्तान के क्षेत्र से 19 जुलाई 1948 से पहले आए प्रवासी नागरिक माने जाते हैं, यदि वे आने के बाद से सामान्यतः यहीं रह रहे हों; उस तिथि को या उसके बाद आने वालों को छह माह के निवास के बाद प्रारंभ से पहले आवेदन पर पंजीकृत होना आवश्यक था।
2. कौन-सा अनुच्छेद संसद को नागरिकता-विधि बनाने की शक्ति देता है?
उत्तरअनुच्छेद 11: भाग II नागरिकता के अर्जन, समाप्ति और नागरिकता से जुड़े अन्य सभी विषयों पर विधि बनाने की संसद की शक्ति को कम नहीं करता।
3. 1995 में भारत में एक बच्चा जन्मा। जन्म से नागरिकता के लिए माता-पिता के बारे में क्या सही होना चाहिए?
उत्तरजन्म के समय माता-पिता में से कम से कम एक भारत का नागरिक हो (1 जुलाई 1987 से 3 दिसंबर 2004 के बीच के जन्म)।
4. अनुच्छेद 9 पर Peer Mohd. (1962) ने क्या कहा?
उत्तरअनुच्छेद 9 संविधान के प्रारंभ से पहले ली गई विदेशी नागरिकता को समेटता है; बाद के अर्जन नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9 के अंतर्गत आते हैं, जिनका निर्णय केंद्र सरकार करती है।
5. विदेशी को कौन-से मूल अधिकार मिलते हैं और कौन-से नहीं?
उत्तरअनुच्छेद 14 और 21 किसी भी व्यक्ति पर लागू होते हैं; विदेशियों के लिए अनुच्छेद 21 सुरक्षित है (NHRC v. Arunachal 1996)। अनुच्छेद 15, 16, 19, 29 और 30 नागरिकों के लिए हैं।
6. 8 सितंबर 2025 को उच्चतम न्यायालय ने आधार और नागरिकता पर क्या कहा?
उत्तरआधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है, हालाँकि मतदाता सूची के लिए उसे एक पहचान-दस्तावेज़ के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
7. CAA, 2019 क्या बदलता है, और किसके लिए?
उत्तरअफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए यह “अवैध प्रवासी” का दर्जा हटाता है और देशीयकरण की निवास-अर्हता ग्यारह वर्ष से घटाकर पाँच वर्ष करता है; छठी अनुसूची और इनर लाइन क्षेत्र बाहर हैं।
8. जिला मजिस्ट्रेट के रूप में, आपको SIR सुनवाई में संदिग्ध नागरिकता का मामला स्वयं क्यों तय नहीं करना चाहिए?
उत्तरउच्चतम न्यायालय (27 मई 2026) ने कहा कि आयोग की जाँच सूची तक सीमित है और निर्णायक नागरिकता के प्रश्न नागरिकता अधिनियम के अधीन प्राधिकारियों के पास जाते हैं; नागरिकता के आधार पर विलोपन उन्हें भेजा जाता है। अधिकारी का काम है: निष्पक्ष सुनवाई, कारण और संदर्भ।

“जानो, जोड़ो, महसूस करो, निर्णय लो।”
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