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कॉन्सेप्ट बूस्टर · ऑफ़िसर्स लेंस · विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य · कक्षा 1

एक उपग्रह सब कुछ क्यों नहीं कर सकता? कक्षाएँ (निम्न भू, भूस्थिर, सूर्य-तुल्यकाली और ध्रुवीय): एक उपग्रह-इंटरनेट विवाद और आसमान से छिपती पराली की आग के सहारे

Why can't one satellite do everything? Orbits (LEO, GEO, sun-synchronous and polar) through a satellite-internet row and a farm fire that hides from the sky

GS3 · विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (अंतरिक्ष)साथ में GS2 (विनियमन, अंतर्राष्ट्रीय विधि) · GS3 (आपदा प्रबंधन, पर्यावरण) · निबंध · साक्षात्कारअध्ययन समय ≈ 60–75 मिनटआज का सूत्र: क्विक फ़ैक्ट (स्टारलिंक और GMPCS लाइसेंस विवाद, 8–9 अक्टूबर 2026)साथ में: कृषि कार्ड (पराली की आग और ध्रुवीय उपग्रहों की गिनती)
जानोउपग्रह को ऊपर क्या टिकाए रखता है, ऊँचाई से उसकी गति और परिक्रमण-काल कैसे तय होते हैं, और निम्न भू, मध्यम भू, भूस्थिर, सूर्य-तुल्यकाली, ध्रुवीय तथा अंतरण कक्षाएँ क्या हैं और किस काम आती हैं।
जोड़ोकैसे एक ही विचार उपग्रह-इंटरनेट, चक्रवात-चेतावनी, पराली की आग की गिनती, NavIC, प्रक्षेपण स्थलों, स्पेक्ट्रम क़ानून और अंतरिक्ष मलबे को एक प्रश्न में बाँध देता है: कौन-सा काम, कौन-सी कक्षा?
महसूस करोपहाड़ी उपकेंद्र की नर्स जिसकी वीडियो कॉल अटकती है, वह किसान जो जान गया है कि उपग्रह कब गुज़रता है, चक्रवात की चेतावनी का इंतज़ार करता मछुआरा: कक्षाएँ ज़मीन पर जी जाती हैं।
निर्णय लोवह नोट जो एक अधिकारी तब लिखता है जब एक विक्रेता, एक विभाग और एक नागरिक मंच, तीनों “उपग्रह” माँगते हैं और हर एक के मन में अलग कक्षा होती है।

1आपकी मेज़ पर फ़ाइल

अत्यावश्यक · निर्णयार्थ
प्रति: सचिव, सूचना प्रौद्योगिकी एवं आपदा प्रबंधन, एक राज्य सरकार
विषय: “उपग्रहों का उपयोग करें”: चार प्रस्ताव, एक मंत्रिमंडल बैठक

अक्टूबर का दूसरा सप्ताह है। मुख्यमंत्री सोमवार की मंत्रिमंडल बैठक से पहले एक ही नोट चाहते हैं। आपकी मेज़ पर चार काग़ज़ हैं।

(1) एक निजी विक्रेता 300 दूरदराज़ के स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए, जहाँ न फ़ाइबर है और न ठीक मोबाइल सिग्नल, निम्न कक्षा वाले उपग्रह ब्रॉडबैंड का “प्री-बुकिंग समझौता” पेश कर रहा है। जिस सेवा-प्रदाता का वह नाम लेता है, उसके पास लाइसेंस तो है, पर केंद्र सरकार ने अभी उसे सेवा शुरू करने की अनुमति नहीं दी है। विक्रेता इसी महीने राज्य का आदेश चाहता है।
(2) स्वास्थ्य विभाग: कुछ उपकेंद्रों से टेलीमेडिसिन कॉल पुराने उपग्रह (VSAT) लिंक पर एक भूस्थिर उपग्रह के माध्यम से चलती हैं। डॉक्टरों की शिकायत है कि आवाज़ें आपस में टकराती हैं, “मानो उधर वाला हमेशा आधा सेकंड पीछे हो”।
(3) कृषि विभाग: दो ज़िलों में फ़सल-अवशेष जलाने की आधिकारिक उपग्रह-गिनती पिछले वर्ष से बहुत कम है, और विभाग इसे सफलता के रूप में घोषित करना चाहता है। प्रखंड अधिकारी लिखते हैं कि आग “अब भी लग रही है, बस दिन में देर से”।
(4) एक नागरिक मंच सुरक्षा के नाम पर राज्य से माँग करता है कि “हमारे राज्य के ऊपर से विदेशी उपग्रहों का गुज़रना प्रतिबंधित किया जाए”।

इस वर्ष मानसून कमज़ोर रहा, प्रबल एल नीनो का पूर्वानुमान है, और तट पर चक्रवात का मौसम अभी बाक़ी है। सचिव को एक पृष्ठ चाहिए: राज्य अभी क्या करे, किसकी प्रतीक्षा करे, केंद्र से क्या माँगे, और क्या नहीं कर सकता। आपके पास 24 घंटे हैं।

यह फ़ाइल शिक्षण के लिए गढ़ा गया मिश्रित उदाहरण है; इसमें किसी वास्तविक कार्यालय, विक्रेता या व्यक्ति का वर्णन नहीं है।

2घटनाक्रम

8 और 9 अक्टूबर 2026 को उपग्रह-इंटरनेट को लेकर विवाद छिड़ गया। SpaceX के मुख्य कार्यकारी ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि भारत में उसकी स्टारलिंक सेवा को “कुछ कुलीन पूँजीपति” (oligarchs) रोक रहे हैं। संचार मंत्रालय ने उत्तर दिया कि उपग्रह संचार के लिए भारत का प्राधिकरण ढाँचा “निष्पक्ष और भेदभाव-रहित” है, कि अभी किसी भी आवेदक को सेवा शुरू करने की मंज़ूरी नहीं मिली है, और कि तीनों लाइसेंसधारकों, यानी स्टारलिंक, भारती-समर्थित यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस, का सुरक्षा आकलन चल रहा है। इस आकलन के बाद ही कोई लाइसेंसधारक स्पेक्ट्रम आवंटन माँग सकता है। मंत्रालय ने कहा कि तीनों “मोटे तौर पर एक ही नियामकीय चरण” पर हैं और अनुचितता के आरोप को “निराधार और भ्रामक” बताया। तीनों के पास दूरसंचार विभाग का GMPCS लाइसेंस (Global Mobile Personal Communication by Satellite) है; स्टारलिंक को (जुलाई 2025 में) IN-SPACe का प्राधिकरण भी मिल चुका है, जो निजी अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए अंतरिक्ष विभाग का निकाय है। अख़बारों में यह चिंता भी छपी कि विदेशी ऑपरेटर भारतीय गेटवे को दरकिनार कर सकते हैं, और यह भी कि जियो लगभग 1,600–1,650 उपग्रहों का अपना निम्न-कक्षा समूह बनाने की योजना पर है।

उसी सुबह द हिंदू के एक लेख ने पराली जलाने पर बताया कि खेतों की आग की आधिकारिक गिनती NASA के MODIS और VIIRS सेंसरों से होती है, जो ध्रुवीय कक्षा वाले उपग्रहों पर लगे हैं और जिनके दिन के फेरे भारत के ऊपर केवल लगभग सुबह 10:30 से दोपहर 1:30 के बीच पड़ते हैं। ISRO वैज्ञानिकों के नेतृत्व में एक भूस्थिर उपग्रह की मदद से हुए अध्ययन में पाया गया कि किसानों ने ध्रुवीय उपग्रहों से बचने के लिए आग लगाना शाम पर खिसका दिया है। दो ख़बरें, एक सबक़: उपग्रह की कक्षा तय करती है कि वह क्या देख सकता है, कब देख सकता है, आपसे कितनी तेज़ी से बात कर सकता है, और कितने उपग्रह चाहिए होंगे। उपग्रह-इंटरनेट कंपनी गति के लिए निचली कक्षा चुनती है; मौसम सेवा लगातार नज़र के लिए ऊँची कक्षा; सूर्य-तुल्यकाली कक्षा का आग-गणक हर दिन एक ही घड़ी पर देखता है, और चतुर किसान वह घड़ी पहचान लेता है। यही आज की अवधारणा है: कक्षाएँ।

3ढाँचा: भौतिकी, कक्षाएँ, विधि और संस्थाएँ

3क. उपग्रह गिरता क्यों नहीं (या कहें, लगातार गिरता है और चूकता रहता है)

न्यूटन का विचार-प्रयोग: किसी ऊँचे पहाड़ से तोप का गोला इतनी तेज़ी से दाग़िए कि वह जितना नीचे गिरे, धरती उतनी ही तेज़ी से उसके नीचे मुड़ती जाए। वह कभी ज़मीन पर नहीं उतरेगा। यही कक्षा है: पर्याप्त क्षैतिज वेग के साथ मुक्त पतन, जो पृथ्वी के पास लगभग 7.8 किमी प्रति सेकंड होता है (पृथ्वी को पूरी तरह छोड़ने के लिए पलायन वेग (Escape Velocity) लगभग 11.2 किमी/से है)।
• ऊँचाई के साथ गुरुत्व घटता है, इसलिए ऊँचे उपग्रह को कम वेग चाहिए और उसका रास्ता लंबा होता है: कक्षा जितनी ऊँची, उपग्रह उतना धीमा और उसका परिक्रमण-काल उतना लंबा (केप्लर का तीसरा नियम: परिक्रमण-काल का वर्ग कक्षा के आकार के घन के समानुपाती होता है)। उपग्रह के अपने द्रव्यमान से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
• नति (Inclination) कक्षा के तल और विषुवत रेखा के बीच का कोण है: 0° विषुवतीय, 90° ध्रुवीय, और 90° से अधिक का अर्थ है पृथ्वी के घूर्णन के विपरीत चलना (प्रतिगामी, Retrograde)।
याद रखने का सूत्र: ऊँचाई परिक्रमण-काल और गति तय करती है; नति तय करती है कि उपग्रह पृथ्वी के किन हिस्सों के ऊपर से गुज़रेगा।

3ख. कक्षाओं का परिवार

कक्षायह क्या है, और किस काम आती है
निम्न भू-कक्षा (Low Earth Orbit, LEO)मोटे तौर पर 2,000 किमी तक; एक चक्कर लगभग 90 से 120 मिनट में (अंतरिक्ष स्टेशन, लगभग 400 किमी पर, दिन में लगभग 16 चक्कर लगाता है)। साफ़ तस्वीरें, कम सिग्नल-विलंब, सस्ता प्रक्षेपण। पर हर उपग्रह कुछ ही मिनट एक छोटा टुकड़ा देख पाता है, इसलिए लगातार सेवा के लिए सैकड़ों-हज़ारों उपग्रहों का समूह (Constellation) चाहिए, जो एक-दूसरे को सेवा सौंपते चलें। उपयोग: उपग्रह ब्रॉडबैंड (स्टारलिंक, वनवेब), अंतरिक्ष स्टेशन, कई इमेजिंग उपग्रह।
मध्यम भू-कक्षा (Medium Earth Orbit, MEO)LEO और GEO के बीच। अमेरिका के GPS उपग्रह लगभग 20,200 किमी पर उड़ते हैं और दिन में दो चक्कर लगाते हैं। उपयोग: वैश्विक नेविगेशन (GPS, GLONASS, गैलीलियो, BeiDou का एक भाग)।
भूस्थिर कक्षा (Geostationary Orbit, GEO)विषुवत रेखा के ठीक ऊपर, उसी के तल में, लगभग 35,786 किमी पर, एक नाक्षत्र दिवस (Sidereal Day, 23 घंटे 56 मिनट) में पूर्व की ओर एक चक्कर; इसलिए वह आकाश में स्थिर दिखता है और डिश को घुमाना नहीं पड़ता। एक उपग्रह पृथ्वी का लगभग दो-पाँचवाँ भाग देखता है। क़ीमत है विलंब: सिग्नल कम से कम लगभग 72,000 किमी ऊपर-नीचे जाता है, यानी एक ओर लगभग चौथाई सेकंड, प्रश्न और उत्तर मिलाकर आधा सेकंड (लगभग 550 किमी की ऊँचाई से केवल कुछ मिलीसेकंड)। उपयोग: टीवी, VSAT लिंक, मौसम-निगरानी (INSAT-3D शृंखला), NavIC का एक भाग।
भू-तुल्यकाली कक्षा (Geosynchronous Orbit, GSO)कोई भी कक्षा जिसका परिक्रमण-काल एक नाक्षत्र दिवस हो। यदि वह झुकी हुई है, तो उपग्रह स्थिर रहने के बजाय उसी देशांतर पर आठ (8) की आकृति बनाता है। NavIC भूस्थिर और झुकी हुई भू-तुल्यकाली, दोनों तरह के उपग्रहों का उपयोग करता है।
ध्रुवीय कक्षा (Polar Orbit)नति लगभग 90°: उपग्रह दोनों ध्रुवों के पास से गुज़रता है और नीचे पृथ्वी घूमती रहती है, इसलिए कुछ दिनों में वह पूरा ग्लोब देख लेता है। उपयोग: मानचित्रण, मौसम-मापन, टोही।
सूर्य-तुल्यकाली कक्षा (Sun-Synchronous Orbit, SSO)एक लगभग-ध्रुवीय LEO, आमतौर पर 600–800 किमी ऊँचाई पर और लगभग 98° झुकी हुई (थोड़ी प्रतिगामी)। पृथ्वी का विषुवतीय उभार कक्षा के तल को रोज़ लगभग 1° घुमा देता है, जो सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की वार्षिक यात्रा से मेल खाता है; इसलिए उपग्रह हर फेरे में किसी अक्षांश को एक ही स्थानीय सौर समय पर पार करता है: मौसम-दर-मौसम एक जैसी रोशनी और छाया। उपयोग: पृथ्वी प्रेक्षण (कार्टोसैट, रिसोर्ससैट, ओशनसैट; NASA के MODIS और VIIRS वाले उपग्रह)।
अति-दीर्घवृत्ताकार कक्षा (Highly Elliptical Orbit, HEO)अंडे जैसी: उपभू (Perigee) पर पास, अपभू (Apogee) पर दूर, जहाँ उपग्रह देर तक ठहरता है। रूस की मोल्निया-प्रकार की कक्षा (लगभग 63.4°, 12 घंटे का परिक्रमण-काल) उच्च अक्षांशों की सेवा करती है, जिन्हें GEO केवल क्षितिज के पास देख पाता है।
भू-तुल्यकाली अंतरण कक्षा (Geosynchronous Transfer Orbit, GTO)घर नहीं, रास्ता: एक दीर्घवृत्त जिसका ऊँचा बिंदु GEO की ऊँचाई के पास है। GSLV या LVM3 संचार उपग्रह को यहाँ छोड़ता है; फिर उपग्रह अपने इंजन से ख़ुद को GEO तक उठाता है।
पृथ्वी-कक्षा से आगेलैग्रांज बिंदु (Lagrange Points), जहाँ सूर्य और पृथ्वी के खिंचाव अंतरिक्ष यान की गति को संतुलित कर देते हैं: आदित्य-L1 लगभग 15 लाख किमी दूर L1 के चारों ओर चक्कर लगाता है।

3ग. विधिक और संस्थागत ढाँचा

प्रावधान या निकायइस अवधारणा के लिए क्या करता है
संघ सूची की प्रविष्टि 31; अनुच्छेद 73“डाक और तार; टेलीफ़ोन, बेतार, प्रसारण और संचार के अन्य इसी प्रकार के साधन” संघ का विषय है। “अंतरिक्ष” किसी भी सूची में नाम से नहीं है; संघ इसे अपनी कार्यपालिका शक्ति से चलाता है।
बाह्य अंतरिक्ष संधि (Outer Space Treaty), 1967 (भारत पक्षकार)अनुच्छेद II: कोई राष्ट्र संप्रभुता, उपयोग या कब्ज़े से बाह्य अंतरिक्ष पर दावा नहीं कर सकता। अनुच्छेद VI: राष्ट्रीय अंतरिक्ष गतिविधियों का अंतर्राष्ट्रीय उत्तरदायित्व राज्यों पर है, निजी कंपनियों की गतिविधियों सहित, जिनके लिए “प्राधिकरण और सतत पर्यवेक्षण” ज़रूरी है। अनुच्छेद VII: क्षति का दायित्व (साथ में दायित्व अभिसमय, 1972, और पंजीकरण अभिसमय, 1975)। हमारे संविधान का अनुच्छेद 51(ग) राज्य से ऐसे संधि-दायित्वों के प्रति सम्मान बढ़ाने की अपेक्षा करता है।
अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU)संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी, जिसके रेडियो विनियम तय करते हैं कि देश आवृत्तियाँ और कक्षीय स्थितियाँ, GEO के “स्लॉट” सहित, कैसे दर्ज और समन्वित करें, ताकि उपग्रह एक-दूसरे में व्यवधान न डालें।
ISRO, अंतरिक्ष विभाग, NSIL, IN-SPACeISRO (1969) बनाता और प्रक्षेपित करता है; अंतरिक्ष विभाग और अंतरिक्ष आयोग (1972) नीति तय करते हैं; न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (2019) प्रक्षेपण और क्षमता बेचता है; IN-SPACe (2020) निजी अंतरिक्ष गतिविधि को बढ़ावा देता और प्राधिकृत करता है, जो अनुच्छेद VI के दायित्व का भारतीय रूप है। भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023 इनकी भूमिकाएँ तय करती है।
दूरसंचार विभाग; गृह मंत्रालयदूरसंचार विभाग सेवा लाइसेंस (उपग्रह संचार के लिए GMPCS) सुरक्षा शर्तों के साथ देता है और स्पेक्ट्रम आवंटित करता है; दूरसंचार अधिनियम (Telecommunications Act), 2023 (धारा 4(4) सहपठित पहली अनुसूची) कुछ उपग्रह सेवाओं के स्पेक्ट्रम को नीलामी के बजाय प्रशासनिक आवंटन से देने का प्रावधान करता है। गृह मंत्रालय भारतीय गेटवे और वैध अवरोधन (Lawful Interception) जैसी सुरक्षा शर्तें जाँचता है।

3घ. उपग्रह-इंटरनेट असल में कैसे बहता है

आपका उपयोगकर्ता टर्मिनल (एक छोटी डिश) उपग्रह से बात करता है, उपग्रह एक गेटवे भू-केंद्र से, और गेटवे इंटरनेट से जुड़ता है। GEO में एक उपग्रह और कुछ गेटवे पूरे देश की सेवा कर सकते हैं। LEO में सिर के ऊपर का उपग्रह बदलता रहता है, इसलिए नेटवर्क को या तो बहुत सारे गेटवे चाहिए या उपग्रहों के बीच लेज़र लिंक, जो ट्रैफ़िक को आसमान में आगे बढ़ाकर कहीं और नीचे उतारते हैं। आज की सुरक्षा-चिंता की जड़ यही है: जो ट्रैफ़िक भारत के बाहर किसी गेटवे पर उतरता है, वह भारतीय वैध अवरोधन और डेटा नियमों की पहुँच से बाहर होता है।
याद रखने का सूत्र: कक्षा भौतिकी तय करती है; गेटवे क्षेत्राधिकार तय करता है।

4बारीकियाँ: जो टॉपर को बाक़ियों से अलग करती हैं

1. हर भूस्थिर कक्षा भू-तुल्यकाली है; हर भू-तुल्यकाली कक्षा भूस्थिर नहीं। GEO के लिए तीन चीज़ें एक साथ चाहिए: एक नाक्षत्र दिवस का परिक्रमण-काल, वृत्ताकार कक्षा और शून्य नति। कक्षा को झुका दीजिए तो झुकी हुई GSO बनती है, जो हर दिन विषुवत रेखा के उत्तर-दक्षिण डोलती है। NavIC के चार झुके हुए GSO उपग्रह ठीक यही करते हैं, जिससे भारत के ऊपर स्थिति-निर्धारण की ज्यामिति बेहतर होती है।
2. “सूर्य-तुल्यकाली” पृथ्वी की कक्षा है, सूर्य की नहीं। यह सूर्य की आभासी स्थिति के साथ तालमेल में है, सूर्य की परिक्रमा नहीं करती। यह केवल इसलिए संभव है कि पृथ्वी का विषुवतीय उभार कक्षा के तल को घुमाता है; इसी कारण SSO थोड़ी प्रतिगामी (लगभग 97°–99°) होती है, यानी ध्रुवीय नहीं, “लगभग-ध्रुवीय”। हर ध्रुवीय कक्षा सूर्य-तुल्यकाली नहीं होती। “भोर-संध्या” (Dawn–Dusk) SSO दिन और रात की सीमा-रेखा पर चलती है, जिससे सौर पैनल लगातार धूप में रहते हैं; रडार उपग्रहों के लिए यह उपयुक्त है।
3. तेज़ यानी नीचे, धीमा यानी ऊपर। GEO उपग्रह लगभग 3 किमी/से की गति से चलता है, अंतरिक्ष स्टेशन के 7.7 किमी/से से कहीं धीमा, फिर भी एक जगह के ऊपर “टिका” रहता है क्योंकि उसका वृत्त बहुत बड़ा है। उसी कक्षा में आगे चल रहे उपग्रह को पकड़ना हो तो पहले गति घटाकर नीचे उतरिए, जहाँ चक्कर जल्दी पूरा होता है। परीक्षक को उलटी लगने वाली यही बात पसंद है।
4. कक्षा एक समय-सारणी बना देती है, और लोग समय-सारणी पढ़ लेते हैं। सूर्य-तुल्यकाली उपग्रह पंजाब के ऊपर से रोज़ लगभग एक ही घड़ी पर गुज़रता है; उसके निकल जाने के बाद आग लगाइए, तो वह गिनती से ग़ायब। भूस्थिर सेंसर दिन भर देखता है, पर मोटे विवरण के साथ। अच्छी नीति दोनों को ज़मीनी जाँच के साथ जोड़ती है। सबक़ दूर तक जाता है: तय समय पर होने वाला हर निरीक्षण लोगों को उसके समय से बचकर चलना सिखा देता है।
5. निचली कक्षा का अर्थ सीधे “बेहतर” नहीं है। LEO गति और साफ़ चित्र देती है, पर उसे हज़ारों उपग्रह, अनेक गेटवे और बार-बार प्रतिस्थापन चाहिए (वायुमंडलीय घर्षण निचले उपग्रहों को कुछ ही वर्षों में नीचे खींच लाता है), और भीड़ व टक्कर का जोखिम बढ़ता है। GEO कम उपग्रहों से चौड़ा, स्थिर कवरेज देती है, पर विलंब, ध्रुवों के पास कमज़ोर कवरेज और महँगे प्रक्षेपण के साथ। MEO वह बीच का रास्ता है जो नेविगेशन ने चुना।
6. अंतरिक्ष भूभाग नहीं है। किसी देश की संप्रभुता उसके वायुक्षेत्र तक है (शिकागो अभिसमय, 1944), पर बाह्य अंतरिक्ष पर कब्ज़ा नहीं किया जा सकता (बाह्य अंतरिक्ष संधि, अनुच्छेद II)। 1976 में आठ विषुवतीय देशों ने बोगोटा घोषणा में अपने भूभाग के ऊपर के GEO खंड पर दावा किया; इस दावे को स्वीकृति नहीं मिली। वायु और अंतरिक्ष के बीच कोई संधि-सीमा नहीं है; लगभग 100 किमी (“कार्मन रेखा”) एक प्रचलित परिपाटी है। इसलिए कोई राज्य, या स्वयं भारत भी, ऊपर से गुज़रते विदेशी उपग्रहों पर “प्रतिबंध” नहीं लगा सकता। देश जिस पर नियंत्रण रखता है, वह है उसकी धरती पर दी जाने वाली सेवा: लाइसेंस, टर्मिनल, स्पेक्ट्रम, गेटवे।
7. GEO स्लॉट दुर्लभ हैं और उन पर खींचतान है। विषुवत रेखा के ऊपर एक ही वलय है, और एक ही आवृत्तियों वाले उपग्रहों के बीच दूरी रखनी पड़ती है; विकासशील देश लंबे समय से कहते आए हैं कि ITU में पहले आवेदन करने वालों को अनुचित बढ़त मिल गई। निष्क्रिय GEO उपग्रह को स्लॉट ख़ाली करने के लिए कुछ सौ किलोमीटर ऊपर “कब्रगाह कक्षा” (Graveyard Orbit) में धकेल दिया जाता है।
8. स्पेक्ट्रम सार्वजनिक संसाधन है, और उसे कैसे दिया जाए, यह संवैधानिक प्रश्न है। Secretary, Ministry of I&B v. Cricket Association of Bengal (1995) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि वायु-तरंगें सार्वजनिक संपत्ति हैं, जिनका उपयोग जनहित में हो। Centre for PIL v. Union of India (2012, 2G मामला) में उसने “पहले आओ” आधार पर दिए लाइसेंस रद्द किए और नीलामी को उचित माना; पर प्राकृतिक संसाधन आवंटन राष्ट्रपति संदर्भ (2012) में कहा कि नीलामी हर संसाधन के लिए संवैधानिक बाध्यता नहीं है: जो भी तरीक़ा निष्पक्ष, पारदर्शी और जनहितकारी हो, वह वैध हो सकता है। उपग्रह S-बैंड स्पेक्ट्रम का 2005 का एंट्रिक्स–देवास सौदा 2011 में रद्द हुआ, और 2022 में सर्वोच्च न्यायालय ने धोखाधड़ी के आधार पर देवास के परिसमापन (Winding up) को सही ठहराया।

5विचार कैसे विकसित हुआ

1609 → 1687केप्लर के ग्रह-गति के नियम (तीसरा नियम 1619 में); न्यूटन की प्रिंसिपिया (1687) सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण से कक्षाओं की व्याख्या करती है।
1945आर्थर सी. क्लार्क का लेख “Extra-Terrestrial Relays” 24 घंटे वाली कक्षा में तीन उपग्रह रखकर पूरी दुनिया में सिग्नल पहुँचाने का सुझाव देता है। GEO वलय को आज भी “क्लार्क बेल्ट” कहा जाता है।
1957सोवियत संघ स्पुतनिक-1 (4 अक्टूबर) को निम्न कक्षा में भेजता है: अंतरिक्ष युग की शुरुआत।
1962 → 1969विक्रम साराभाई के नेतृत्व में INCOSPAR का गठन (1962); थुंबा से पहला साउंडिंग रॉकेट (21 नवंबर 1963); बाह्य अंतरिक्ष संधि (1967); ISRO का गठन (15 अगस्त 1969)।
1975 → 1976भारत का पहला उपग्रह आर्यभट सोवियत संघ से प्रक्षेपित (19 अप्रैल 1975)। उपग्रह शैक्षिक टेलीविज़न प्रयोग (SITE) NASA के एक उपग्रह से लगभग 2,400 गाँवों तक शैक्षिक टीवी पहुँचाता है।
1980 → 1983SLV-3 श्रीहरिकोटा से रोहिणी को कक्षा में स्थापित करता है (जुलाई 1980)। भारत का पहला प्रायोगिक संचार उपग्रह APPLE भूस्थिर कक्षा में पहुँचता है (1981)। INSAT-1B (1983) से दूरसंचार, टीवी और मौसम के लिए INSAT प्रणाली शुरू होती है।
1988 → 1994भारत का पहला सुदूर संवेदन उपग्रह IRS-1A सूर्य-तुल्यकाली कक्षा में जाता है (1988, सोवियत प्रक्षेपण)। ध्रुवीय और सूर्य-तुल्यकाली कक्षाओं तक पहुँचने की क्षमता के नाम पर बना PSLV पहली बार सफल होता है (अक्टूबर 1994)।
2001 → 2013GTO तक पहुँचने के लिए बना GSLV पहली उड़ान भरता है (2001)। पहला NavIC उपग्रह IRNSS-1A प्रक्षेपित (2013)।
2019 → 2020मिशन शक्ति (27 मार्च 2019): भारत उपग्रह-रोधी मिसाइल से LEO में अपना ही एक उपग्रह नष्ट करता है। NSIL की स्थापना (2019); अंतरिक्ष क्षेत्र निजी उद्यम के लिए खुलता है और IN-SPACe बनता है (जून 2020)।
2022 → 2023ISRO का LVM3 दो अभियानों में वनवेब के 72 ब्रॉडबैंड उपग्रह LEO में पहुँचाता है (अक्टूबर 2022, मार्च 2023)। भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023 को मंज़ूरी; आदित्य-L1, L1 बिंदु की ओर प्रक्षेपित (सितंबर 2023)। दूरसंचार अधिनियम, 2023 पारित।
2024 → 2025भूस्थिर मौसम उपग्रह INSAT-3DS प्रक्षेपित (फ़रवरी 2024)। लगभग तीन वर्ष की प्रतीक्षा के बाद दूरसंचार विभाग स्टारलिंक को GMPCS लाइसेंस देता है (जून 2025); इसके बाद IN-SPACe का प्राधिकरण मिलता है (जुलाई 2025)।
अक्टूबर 2026लाइसेंस विवाद: मंत्रालय कहता है कि तीनों उपग्रह-संचार लाइसेंसधारकों का सुरक्षा आकलन चल रहा है और किसी को भी सेवा शुरू करने की मंज़ूरी नहीं मिली। उसी सप्ताह यह निष्कर्ष कि ध्रुवीय उपग्रहों से बचने के लिए आग शाम पर खिसक गई है, पराली-बहस में आ जाता है।

6एक मुद्दा, छह दृष्टिकोण

राजव्यवस्था एवं विधि

उपग्रह संचार संघ का विषय है (प्रविष्टि 31); निजी अंतरिक्ष गतिविधि के लिए प्राधिकरण इसलिए चाहिए कि बाह्य अंतरिक्ष संधि का अनुच्छेद VI भारत को उसके लिए उत्तरदायी बनाता है; स्पेक्ट्रम सार्वजनिक संपत्ति है (क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ़ बंगाल), जिसे निष्पक्ष ढंग से दिया जाना चाहिए (2G, 2012 का संदर्भ)।
याद रखें: ऊपर का आकाश किसी का नहीं, पर नीचे की सेवा का लाइसेंस देना भारत का अधिकार है।

सामाजिक न्याय

फ़ाइबर और टावर पहले घनी, भुगतान-सक्षम आबादी तक पहुँचते हैं। द्वीपों, पहाड़ों, रेगिस्तानों और जंगलों को उपग्रह की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, और वही महँगा टर्मिनल सबसे कम ख़रीद पाते हैं।
याद रखें: सही कक्षा डिजिटल खाई पाट सकती है; ग़लत क़ीमत उसे और चौड़ा कर सकती है।

शासन

SSO से पृथ्वी प्रेक्षण फ़सल बीमा, बाढ़-मानचित्रण, वन-आवरण और पराली की गिनती को आधार देता है; GEO चक्रवात-चेतावनी देता है। जिस मापक-यंत्र का एक “अंधा घंटा” हो, वह किसी नीति को सफल दिखा सकता है, भले वह सफल न हो।
याद रखें: नतीजे घोषित करने से पहले अपने उपकरण की अंधी जगहें जानिए।

अर्थव्यवस्था

LEO उपग्रह-समूहों पर अरबों डॉलर लगते हैं और उन्हें बड़ा बाज़ार चाहिए; GEO क्षमता परिपक्व है। प्रक्षेपण सेवाएँ (वनवेब के लिए LVM3) विदेशी मुद्रा कमाती हैं; लाइसेंसधारकों के बीच प्रतिस्पर्धा से दाम घटने चाहिए।
याद रखें: कक्षा व्यापार-मॉडल तय करती है: बहुत से सस्ते उपग्रह, या थोड़े से महँगे।

नीतिशास्त्र

सब पर समान रूप से लागू निष्पक्ष नियम, देरी के कारण बताए जाएँ, सबसे ऊँची आवाज़ के लिए कोई शॉर्टकट नहीं। अंतरिक्ष साझा संपदा है: भीड़ भरी कक्षा में छोड़ा गया मृत उपग्रह बाद में आने वाले सबको नुक़सान पहुँचाता है।
याद रखें: हर आवेदक के प्रति निष्पक्षता, और आकाश के हर भावी उपयोगकर्ता के प्रति ज़िम्मेदारी।

नागरिक एवं राष्ट्र

दूरदराज़ की बस्ती का बच्चा ऑनलाइन कक्षा का हक़दार है; राष्ट्र यह जानने का हक़दार है कि उसका डेटा कहाँ उतरता है। सुरक्षा और पहुँच, दोनों राष्ट्रीय हित हैं; अच्छा नियामक किसी एक को दूसरे का बहाना बनने दिए बिना दोनों को साधता है।
याद रखें: हर नागरिक को जोड़िए, पर उन शर्तों पर जिनकी निगरानी भारत कर सके।

7काग़ज़ से गाँव तक: क्रियान्वयन की शृंखला

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अंतर्राष्ट्रीय फ़ाइलिंग: उपग्रह की आवृत्तियाँ और कक्षा ITU के माध्यम से दर्ज और समन्वित होती हैं; ऑपरेटर का गृह-देश अंतरिक्ष पिंड का पंजीकरण करता है। कहाँ टूटती है: फ़ाइलिंग में देर हो, या स्लॉट पहले ही दूसरे ले लें।
2
अंतरिक्ष प्राधिकरण: IN-SPACe अंतरिक्ष नीति, 2023 के अंतर्गत भारत की सेवा करने वाले अंतरिक्ष खंड को प्राधिकृत करता है। कहाँ टूटती है: नियम अस्पष्ट या धीमे हों, और निजी निवेश रुका रहे।
3
सेवा लाइसेंस और सुरक्षा: दूरसंचार विभाग का GMPCS लाइसेंस; सुरक्षा शर्तें (भारतीय गेटवे, वैध अवरोधन, डेटा-प्रबंधन) गृह मंत्रालय के साथ जाँची जाती हैं। कहाँ टूटती है: आकलन की न कोई समय-सीमा हो, न कारण बताए जाएँ, और निष्पक्ष प्रक्रिया भी अनुचित दिखने लगे।
4
स्पेक्ट्रम: मंज़ूरी पाए लाइसेंसधारक को क़ीमत और शर्तों के साथ आवंटित। कहाँ टूटती है: तरीक़ा या क़ीमत अपारदर्शी हो, और वही संदेह जागे जो इतिहास (2G, एंट्रिक्स–देवास) सिखा चुका है।
5
गेटवे और टर्मिनल: भू-केंद्र भारत में बनें; उपयोगकर्ता टर्मिनल आयात हों या यहीं बनें, प्रमाणित होकर बिकें। कहाँ टूटती है: टर्मिनल की क़ीमत किसी परिवार की महीने भर की कमाई से ज़्यादा हो।
6
राज्य और ज़िला: राज्य स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और पंचायत कार्यालयों को जोड़ते हैं; ज़िला आपदा प्रकोष्ठ सैटेलाइट फ़ोन रखता है और GEO मौसम-चेतावनी व SSO बाढ़-मानचित्रों का उपयोग करता है। कहाँ टूटती है: उपकरण भंडार में बिना जाँचे पड़े रहें, और चक्रवात आ जाए।
7
गाँव: शिक्षक, नर्स, मछुआरा, किसान, जो लिंक या चेतावनी का उपयोग करते हैं। कहाँ टूटती है: डिश ठीक करना कोई स्थानीय व्यक्ति न जानता हो, या उद्घाटन की तस्वीर के बाद सदस्यता ख़त्म हो जाए।

8कौन क्या चाहता है

हितधारकचाहते हैंडरउनका वाजिब तर्क
विदेशी LEO ऑपरेटरसेवा बेचने की जल्द मंज़ूरीअंतहीन देरी, जब तक प्रतिद्वंद्वी आगे निकल जाएँउसने भारी निवेश किया है और लाइसेंस रखता है; उसका कहना है कि वह उन इलाक़ों की सेवा करता है जहाँ दूसरे नहीं पहुँचते।
भारतीय लाइसेंसधारक और दूरसंचार कंपनियाँबराबरी का मैदान और अपने उपग्रह-समूह बनाने का समयहज़ारों उपग्रहों वाली विदेशी दिग्गज कंपनी का पहले बाज़ार पर कब्ज़ानियम सब पर एक जैसे लागू हों; राष्ट्रीय क्षमता मायने रखती है।
सुरक्षा एजेंसियाँऐसा ट्रैफ़िक जो भारत में उतरे और जिसका वैध अवरोधन हो सकेभारतीय गेटवे को दरकिनार करने वाली सेवाएँसंकटों और संघर्षों में उपग्रह लिंक का उपयोग हुआ है; नेटवर्क पर नियंत्रण औपचारिकता नहीं है।
दूरदराज़ के उपयोगकर्ता (स्कूल, क्लिनिक, द्वीप, सशस्त्र बलों की चौकियाँ)अभी तेज़, सस्ता, भरोसेमंद इंटरनेटबड़े खिलाड़ियों की बहस में भुला दिए जानाफ़ाइबर और टावर का सबसे लंबा इंतज़ार उन्हीं ने किया है।
वैज्ञानिक और पृथ्वी-प्रेक्षण उपयोगकर्ताज़्यादा उपग्रह, ज़्यादा कक्षाएँ, खुला डेटाचमकीले उपग्रह-समूह और मलबा, जो प्रेक्षण और कक्षाएँ बिगाड़ेंअंतरिक्ष साझा संपदा है, जिसे सबके लिए नियम चाहिए।
किसान और कृषि विभागपराली प्रबंधन में मदद, और निष्पक्ष गिनतीएक अधूरे पैमाने पर दोषी ठहराया जाना या जुर्मानाएक ही उपग्रह की समय-सारणी से गिनी गई आग पूरी तस्वीर नहीं दिखाती।

9मानवीय पहलू: भावनात्मक बुद्धिमत्ता, नागरिक पहले, राष्ट्र पहले

फ़ाइल के पीछे के लोग। पहाड़ी उपकेंद्र की एक नर्स बुख़ार से तपते बच्चे को वेबकैम के सामने उठाती है; डॉक्टर का जवाब आधा सेकंड देर से आता है, दोनों एक-दूसरे की बात काटते हैं, और आख़िर में वह परिवार को पाँच घंटे के बस-सफ़र पर भेज देती है। पंजाब के एक छोटे किसान के पास गेहूँ की बुवाई से पहले पराली हटाने की मशीन नहीं है; पड़ोसी कहते हैं कि उपग्रह “दोपहर के खाने से पहले आता है”, इसलिए वह शाम तक रुकता है। तट पर एक मछुआरे का परिवार चक्रवात-बुलेटिन की राह देखता है।

भावनात्मक बुद्धिमत्ता वाला अधिकारी देखता है कि हर व्यक्ति अपने हिसाब से तर्कसंगत ढंग से चल रहा है। नर्स को बैंडविड्थ पर भाषण नहीं, कम विलंब वाला लिंक चाहिए। किसान को केवल जुर्माना नहीं, मशीन, पराली का उचित दाम और ऐसा पैमाना चाहिए जिससे वह बच न सके। मछुआरे के परिवार को भूस्थिर उपग्रह की लगातार निगरानी चाहिए, जो उनकी अपनी भाषा में चेतावनी बनकर पहुँचे। अधिकारी “उपग्रह प्रतिबंधित करो” कहने वाले मंच का मज़ाक़ नहीं उड़ाती; वह समझाती है कि बाह्य अंतरिक्ष किसी देश का नहीं, और भारत का असली नियंत्रण लाइसेंस, गेटवे और स्पेक्ट्रम में है।

नागरिक पहले: स्कूल और क्लिनिक को आज क़ानूनी रूप से उपलब्ध सबसे अच्छी सेवा से जोड़िए, और आग की गिनती ईमानदारी से कीजिए, भले आँकड़ा अप्रिय हो। राष्ट्र पहले: हर ऑपरेटर, भारतीय हो या विदेशी, एक जैसी सुरक्षा शर्तें पूरी करे, यह सुनिश्चित कीजिए, और प्रक्षेपण यानों, उपग्रहों और कक्षाओं में भारत की अपनी क्षमता बनाइए, ताकि देश की कनेक्टिविटी कभी किसी एक कंपनी की मेहरबानी पर न टिके।

10अवधारणा-जाल: यह आपके मन में कहाँ बैठती है

प्रक्षेपण यान संचार उपग्रह सुदूर संवेदन और आग NavIC अंतरिक्ष मलबा और OST IN-SPACe सुधार स्पेक्ट्रम और दूरसंचार लैग्रांज बिंदु कक्षाएँ

11आपका निर्णय: फ़ाइल पर वापसी

आप सचिव हैं। वह पंक्ति चुनिए जो आप मुख्यमंत्री को भेजेंगे:

अधिकारी जो नोट लिखता है

1. “उपग्रहों का उपयोग” का अर्थ है अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग कक्षाएँ: स्थिर, चौड़े कवरेज और मौसम के लिए भूस्थिर कक्षा (GEO); कम-विलंब ब्रॉडबैंड के लिए निम्न भू-कक्षा (LEO); तय स्थानीय समय पर नियमित इमेजिंग के लिए सूर्य-तुल्यकाली कक्षा (SSO)। 2. कनेक्टिविटी: स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों को अभी भारत के लिए पहले से प्राधिकृत सेवाओं से जोड़ा जाए, जहाँ संभव हो GEO लिंक उन्नत किए जाएँ। एक प्रौद्योगिकी-तटस्थ निविदा बने: कोई भी ऑपरेटर दूरसंचार विभाग का लाइसेंस, IN-SPACe प्राधिकरण, सुरक्षा मंज़ूरी और आवंटित स्पेक्ट्रम मिलने पर बोली लगा सके। जिस ऑपरेटर को अभी मंज़ूरी नहीं मिली, उसके साथ कोई प्री-बुकिंग नहीं। उपलब्ध होने पर टेलीमेडिसिन केंद्रों को सबसे पहले कम-विलंब लिंक। 3. खेतों की आग: कम गिनती उन ध्रुवीय उपग्रहों से है जिनके दिन के फेरे लगभग सुबह 10:30 से दोपहर 1:30 के बीच होते हैं; क्षेत्रीय रिपोर्टें बताती हैं कि आग शाम पर खिसक गई है। जब तक ध्रुवीय और भूस्थिर आँकड़ों की गिनती और क्षेत्रीय सत्यापन मेल न खाएँ, कोई घोषणा नहीं। कार्रवाई के साथ मशीनें और पराली-ख़रीद में सहायता। 4. चक्रवात का मौसम: GEO मौसम-चित्र और बुलेटिन तटीय गाँवों तक स्थानीय भाषा में पहुँचें; हर तटीय प्रखंड के सैटेलाइट फ़ोन इसी सप्ताह जाँचे जाएँ। 5. मंच की याचिका: बाह्य अंतरिक्ष पर किसी देश का कब्ज़ा नहीं हो सकता (बाह्य अंतरिक्ष संधि, अनु. II); भारत अपनी धरती पर सेवा का नियमन लाइसेंस, गेटवे और स्पेक्ट्रम से करता है। सरल भाषा में उत्तर भेजा जाए। 6. केंद्र से अनुरोध: सुरक्षा आकलन और स्पेक्ट्रम आवंटन की समय-सीमा बताई जाए; सार्वजनिक संस्थानों के लिए सस्ते टर्मिनलों पर विचार हो। 7. राज्य क्या नहीं करेगा: बिना मंज़ूरी वाले प्रदाता से अनुबंध, ऐसा आदेश जिसे जारी करने की उसकी शक्ति नहीं, या ऐसा आँकड़ा प्रकाशित करना जिसे वह अधूरा जानता है। 8. अनुमोदन हेतु प्रस्तुत।

12परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

प्रश्नपत्रयह अवधारणा आपके कैसे काम आती है
प्रारंभिक परीक्षाLEO, MEO और GEO की ऊँचाई और परिक्रमण-काल; GEO बनाम GSO; SSO प्रतिगामी और लगभग-ध्रुवीय क्यों; ध्रुवीय उपग्रह मानचित्रण के लिए उपयुक्त क्यों; GTO; कौन-सा भारतीय उपग्रह किस कक्षा में (INSAT, कार्टोसैट, NavIC); लैग्रांज बिंदु; बाह्य अंतरिक्ष संधि; IN-SPACe और NSIL।
GS3 — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी“सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरूकता”; “विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी — विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव”; “विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।”
निबंध“जो हम मापते हैं वही सँभालते हैं, और जो हमें दिखता नहीं उसे हम सुधार नहीं सकते”; “आकाश किसी का नहीं, सेवा सबकी है।”
साक्षात्कार“यदि आप किसी दूरदराज़ द्वीपीय ज़िले के कलेक्टर हों, तो क्या फ़ाइबर की प्रतीक्षा करेंगे या उपग्रह से जोड़ेंगे? कौन-सी कक्षा, और क्यों?”
जाल: “भूस्थिर उपग्रह गति नहीं करता।” — ग़लत; वह लगभग 3 किमी/से की गति से, पूर्व की ओर, पृथ्वी के घूर्णन के साथ क़दम मिलाकर चलता है। वह केवल ज़मीन से स्थिर दिखता है।
जाल: “सूर्य-तुल्यकाली कक्षा सूर्य के चारों ओर की कक्षा है।” — ग़लत; यह पृथ्वी की कक्षा है जिसका तल सूर्य से एक निश्चित कोण बनाए रखता है, इसलिए वह हर स्थान से एक ही स्थानीय सौर समय पर गुज़रती है।
जाल: “ऊँची कक्षाओं के उपग्रह तेज़ चलते हैं क्योंकि उन्हें टिके रहने के लिए ज़्यादा ऊर्जा चाहिए।” — ग़लत; ऊँची कक्षाएँ धीमी होती हैं और उनका परिक्रमण-काल लंबा होता है (केप्लर का तीसरा नियम), हालाँकि वहाँ तक पहुँचने में रॉकेट को ज़्यादा ऊर्जा लगती है।
जाल: “हर भू-तुल्यकाली उपग्रह भूस्थिर होता है।” — ग़लत; केवल वृत्ताकार, शून्य-नति वाला ही भूस्थिर है। NavIC के झुके हुए GSO उपग्रह आठ की आकृति बनाते हैं।

मुख्य परीक्षा अभ्यास 1 (GS3)

“कक्षा का चयन तय करता है कि कोई उपग्रह किस उद्देश्य की पूर्ति कर सकता है।” भारत के संचार, नेविगेशन और पृथ्वी-प्रेक्षण उपग्रहों के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
उत्तर का दृष्टिकोणनिर्देश — स्पष्ट कीजिए: कारण और प्रभाव का संबंध साफ़ कीजिए। भूमिका: कक्षा क्षैतिज वेग के साथ मुक्त पतन है; ऊँचाई गति, परिक्रमण-काल और दृश्य-क्षेत्र तय करती है। मुख्य भाग: स्थिर, चौड़े कवरेज के लिए GEO (35,786 किमी): टीवी, VSAT और मौसम के लिए INSAT/GSAT; NavIC के क्षेत्रीय कवरेज के लिए झुकी GSO और GEO; एक ही समय पर इमेजिंग के लिए SSO (लगभग 600–800 किमी, लगभग 98°): कार्टोसैट, रिसोर्ससैट; कम-विलंब ब्रॉडबैंड के लिए LEO उपग्रह-समूह। आज का उदाहरण: SSO के गुज़रने का समय और पराली जलाने का शाम पर खिसकना। निष्कर्ष: काम के अनुरूप कक्षाओं का मिश्रण भारत को पूरी और ईमानदार जानकारी देता है।

मुख्य परीक्षा अभ्यास 2 (GS3)

“निम्न भू-कक्षा वाले उपग्रह-समूह भारत की डिजिटल खाई पाट सकते हैं, पर वे सुरक्षा, प्रतिस्पर्धा और अंतरिक्ष-संधारणीयता के प्रश्न खड़े करते हैं।” चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
उत्तर का दृष्टिकोणनिर्देश — चर्चा कीजिए: दोनों पक्ष रखिए, फिर अपना मत दीजिए। भूमिका: LEO ब्रॉडबैंड: कम विलंब, पर हज़ारों उपग्रह चाहिए; भारत में तीन GMPCS लाइसेंसधारक; अक्टूबर 2026 का विवाद। लाभ: दूरदराज़ के क्षेत्र, आपदा में टिकाऊ संचार, स्कूल, टेलीमेडिसिन। चिंताएँ: सुरक्षा (गेटवे, वैध अवरोधन) और बाह्य अंतरिक्ष संधि के अनुच्छेद VI का पर्यवेक्षण-दायित्व; प्रतिस्पर्धा और निष्पक्ष स्पेक्ट्रम आवंटन (क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ़ बंगाल; 2G; 2012 का संदर्भ); सस्ते टर्मिनल; LEO में मलबा। आगे की राह: समयबद्ध, सकारण सुरक्षा आकलन जो सब पर समान लागू हों; पारदर्शी स्पेक्ट्रम शर्तें; भारतीय उपग्रह-समूह और प्रक्षेपण क्षमता; कक्षा से हटाने (Deorbit) के नियम। निष्कर्ष: हर नागरिक को उन शर्तों पर जोड़िए जिनकी निगरानी भारत कर सके और जिन्हें आकाश सह सके।

13स्वयं को परखें

1. कक्षा में घूमता उपग्रह पृथ्वी पर क्यों नहीं गिरता?
उत्तरवह लगातार गिर ही रहा है, पर क्षैतिज दिशा में इतनी तेज़ी से (पृथ्वी के पास लगभग 7.8 किमी/से) चलता है कि जितना गिरता है, उतनी ही तेज़ी से धरती उसके नीचे मुड़ती जाती है।
2. कक्षा की ऊँचाई, गति और परिक्रमण-काल का संबंध बताइए।
उत्तरकक्षा जितनी ऊँची, उपग्रह उतना धीमा और परिक्रमण-काल उतना लंबा (केप्लर का तीसरा नियम: परिक्रमण-काल का वर्ग कक्षा के आकार के घन के समानुपाती)। उपग्रह के अपने द्रव्यमान से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
3. किन तीन शर्तों से कोई कक्षा भूस्थिर बनती है?
उत्तरएक नाक्षत्र दिवस (लगभग 23 घंटे 56 मिनट) का परिक्रमण-काल, वृत्ताकार कक्षा (पृथ्वी से लगभग 35,786 किमी ऊपर) और शून्य नति (विषुवत रेखा के तल में), पूर्व की ओर गति के साथ।
4. सूर्य-तुल्यकाली कक्षा थोड़ी प्रतिगामी क्यों होती है, और इससे क्या हासिल होता है?
उत्तरलगभग 98° नति पर पृथ्वी का विषुवतीय उभार कक्षा के तल को रोज़ लगभग 1° घुमा देता है, जो सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की गति से मेल खाता है। तब उपग्रह हर अक्षांश को एक ही स्थानीय सौर समय पर पार करता है, जिससे चित्रों में एक जैसी रोशनी मिलती है।
5. भूस्थिर उपग्रह के माध्यम से वीडियो कॉल में देरी क्यों महसूस होती है?
उत्तरसिग्नल कम से कम लगभग 72,000 किमी ऊपर-नीचे जाता है: एक ओर लगभग चौथाई सेकंड, और प्रश्न-उत्तर मिलाकर आधा सेकंड। LEO से भौतिक विलंब कुछ मिलीसेकंड का होता है।
6. आग गिनने वाले उपग्रहों की कक्षा ने पराली जलाने के आँकड़ों को कैसे प्रभावित किया?
उत्तरMODIS और VIIRS सेंसर ध्रुवीय, सूर्य-तुल्यकाली उपग्रहों पर हैं, जिनके दिन के फेरे भारत के ऊपर केवल लगभग सुबह 10:30 से दोपहर 1:30 के बीच होते हैं। भूस्थिर उपग्रह से ISRO के नेतृत्व में हुए अध्ययन में पाया गया कि आग शाम पर खिसक गई थी, इसलिए केवल ध्रुवीय उपग्रहों पर टिकी गिनती बहुत सी आग छोड़ देती है।
7. क्या कोई राज्य, या भारत, ऊपर से गुज़रते विदेशी उपग्रहों पर प्रतिबंध लगा सकता है? भारत किस पर नियंत्रण रखता है?
उत्तरनहीं। बाह्य अंतरिक्ष पर किसी राष्ट्र का कब्ज़ा नहीं हो सकता (बाह्य अंतरिक्ष संधि, अनुच्छेद II)। भारत अपनी धरती पर सेवा नियंत्रित करता है: दूरसंचार विभाग का लाइसेंस, IN-SPACe प्राधिकरण, भारतीय गेटवे जैसी सुरक्षा शर्तें, स्पेक्ट्रम और टर्मिनल।
8. किस भारतीय रॉकेट का नाम एक कक्षा पर है, और GSLV किस कक्षा को लक्ष्य करता है?
उत्तरPSLV (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान), ध्रुवीय और सूर्य-तुल्यकाली कक्षाओं के लिए। GSLV (और LVM3) उपग्रहों को भू-तुल्यकाली अंतरण कक्षा में छोड़ते हैं, जहाँ से उपग्रह अपने इंजन से GEO तक पहुँचते हैं।

“जानो, जोड़ो, महसूस करो, निर्णय लो।”
कॉन्सेप्ट लाइब्रेरी · विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य › अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी › कक्षाएँ: निम्न भू, भूस्थिर, सूर्य-तुल्यकाली और ध्रुवीय · विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य 1 / 80