7. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology)GS323 September 2026
AI डेटा-सेंटर की होड़ से मेमोरी-चिप में ‘सुपरसाइकिल’, भारत अभी पैकेजिंग और डिज़ाइन तक सीमित
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ख़बर
नई दिल्ली। इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन भारत सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission — ISM) का प्रमुख सम्मेलन सेमीकॉन इंडिया पिछले सप्ताह नई दिल्ली में ऐसे समय हुआ जब AI के कारण चिपों की माँग असाधारण रूप से बढ़ी हुई है — यह बात कार्नेगी इंडिया की श्रुति मित्तल ने द इंडियन एक्सप्रेस में लिखी है। कुछ लोग इसे सेमीकंडक्टर “सुपरसाइकिल” (supercycle) कह रहे हैं — यानी किसी बुनियादी तकनीकी बदलाव से पैदा होने वाला कई वर्षों तक चलने वाला निवेश-उछाल, जैसा 1990 के दशक में कंप्यूटरों और 2010 के दशक में स्मार्टफ़ोन के साथ हुआ था। यह माँग मुख्यतः AI डेटा सेंटरों से आ रही है — सर्वरों से भरी ऐसी इमारतें जिनका सबसे अहम हिस्सा AI चिप या ‘एक्सेलेरेटर’ है, जो AI मॉडलों की विशाल गणनाएँ करता है। ऐसा प्रोसेसर उतना ही तेज़ चल सकता है जितनी तेज़ी से उसे डेटा मिले, और साधारण मेमोरी उससे बहुत दूर रहती है। उच्च-बैंडविड्थ मेमोरी (High-Bandwidth Memory — HBM) इस समस्या को सुलझाती है: इसमें कार्यशील मेमोरी की परतें एक के ऊपर एक रखकर प्रोसेसर के पास लगाई जाती हैं और उन्हें उन्नत पैकेजिंग (advanced packaging) से जोड़ा जाता है — यहाँ पैकेजिंग का अर्थ डिब्बा नहीं, बल्कि वह इंजीनियरिंग है जो चिपों को आपस में जोड़ती है। HBM पर तीन कंपनियों का दबदबा है: दक्षिण कोरिया की SK Hynix और Samsung, तथा अमेरिका की Micron। S&P Global के हवाले से लेख बताता है कि Microsoft, Amazon, Google और Meta केवल 2026 में AI अवसंरचना पर लगभग 635 अरब डॉलर ख़र्च करने की योजना बना रही हैं। चिप निर्माता दीर्घकालिक “टेक-ऑर-पे” (take-or-pay) अनुबंध कर रहे हैं, जिनके तहत ख़रीदार को तय चिपें लेनी ही होंगी, चाहे उस समय उसकी माँग कुछ भी हो, वरना भारी जुर्माना देना होगा। सुश्री मित्तल आगाह करती हैं कि यह ख़र्च कुछ ही कंपनियों में केंद्रित है। भारत चिपों का उत्पादन नहीं करता: ISM 1.0 के तहत उसने 12 परियोजनाएँ मंज़ूर कीं और कुछ पैकेजिंग इकाइयों में उत्पादन शुरू हो चुका है, तथा गुजरात के साणंद में Micron का संयंत्र आयातित वेफ़र का प्रसंस्करण करेगा। जुलाई में संसद में दिए गए एक उत्तर में कहा गया कि AI की माँग से मेमोरी की आपूर्ति तंग हो रही है और क़ीमतें बढ़ रही हैं, और 2026 में विदेशी निवेश की कुछ निकासी को ताइवान और दक्षिण कोरिया से जोड़ा गया है। फ़रवरी में शुरू हुआ ISM 2.0 पैकेजिंग को सहायता देता है और एक अलग योजना के ज़रिए चिपलेट (chiplets) पर अनुसंधान को भी — चिपलेट यानी छोटी, विशिष्ट चिपें जिन्हें सिलिकॉन के एक बड़े टुकड़े की जगह जोड़ा जाता है। दुनिया के चिप कार्यबल का लगभग पाँचवाँ हिस्सा भारत में है; डिज़ाइन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना के तहत स्टार्टअप Netrasemi कैमरों और ड्रोन के लिए एज-AI प्रोसेसर बना रहा है, और Infineon ने बेंगलुरु की फ़ैबलेस कंपनी C2i का अधिग्रहण कर लिया है। अलग से, द हिंदू (AFP) की ख़बर है कि 21 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर हुए एक कार्यक्रम में, 2025 में गठित संयुक्त राष्ट्र के AI पर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल के सदस्यों ने “डर में निवेश” करने के विरुद्ध चेताया। पाठ्यक्रम से जुड़ाव: GS3 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण।
कड़ी — एक पंक्ति में: जनरेटिव AI मॉडलों को विशाल गणना-शक्ति चाहिए → बड़ी टेक कंपनियाँ 2026 में AI डेटा सेंटरों पर लगभग 635 अरब डॉलर झोंक रही हैं → एक्सेलेरेटर को ठीक बगल में रखी मेमोरी चाहिए, इसलिए HBM और उन्नत पैकेजिंग की माँग आसमान छूती है और चिप निर्माता टेक-ऑर-पे अनुबंधों से ख़रीदार बाँध लेते हैं → मेमोरी की आपूर्ति तंग होती है, क़ीमतें चढ़ती हैं और निवेशक ताइवान व कोरिया की ओर दौड़ते हैं → डिज़ाइन प्रतिभा में मज़बूत और ISM 1.0 व 2.0 के तहत असेंबली-पैकेजिंग खड़ी कर रहा भारत अब भी शृंखला की सबसे मुनाफ़े वाली परत से बाहर है
स्थैतिक पाठ्यक्रम से जुड़ाव
- एक चिप तीन चरणों से गुज़रती है, और भारत अभी पहले और आख़िरी चरण में काम करता है. सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला (value chain) के तीन मोटे चरण हैं: डिज़ाइन, जिसमें इंजीनियर इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन सॉफ़्टवेयर और लाइसेंस पर ली गई बौद्धिक संपदा की मदद से सर्किट की रूपरेखा बनाते हैं; निर्माण या फ़ैब्रिकेशन, जिसमें ‘फ़ैब’ या फ़ाउंड्री में सिलिकॉन वेफ़र पर सर्किट छापा जाता है; और असेंबली, परीक्षण, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP), जिसे आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (OSAT) भी कहते हैं, जिसमें तैयार वेफ़र को काटा, पैक किया और परखा जाता है। ‘फ़ैबलेस’ कंपनी चिप डिज़ाइन करके बेचती है पर निर्माण बाहर से करवाती है, ‘फ़ाउंड्री’ दूसरों के लिए निर्माण करती है, और एकीकृत उपकरण निर्माता (integrated device manufacturer) दोनों काम करता है। निर्माण सबसे अधिक पूँजी-गहन चरण है, जिसके लिए अरबों डॉलर और उन्नत उपकरण चाहिए। भारत के पास लंबे समय से चिप-डिज़ाइन का गहरा कार्यबल रहा है, जो ज़्यादातर वैश्विक कंपनियों के लिए काम करता है, और अब वह ATMP व OSAT क्षमता जोड़ रहा है।
- उच्च-बैंडविड्थ मेमोरी प्रोसेसर के बगल में बनाया गया DRAM चिपों का ढेर है. कंप्यूटर में मुख्यतः दो तरह की मेमोरी होती है: DRAM, यानी तेज़ ‘कार्यशील मेमोरी’, जो प्रसंस्करण के दौरान डेटा रखती है और बिजली बंद होते ही उसे खो देती है; और NAND फ़्लैश, जो डेटा को स्थायी रूप से सहेजती है। HBM कई DRAM डाई को ऊर्ध्वाधर रूप से एक के ऊपर एक रखकर और उन्हें थ्रू-सिलिकॉन वाया (through-silicon vias) नामक सूक्ष्म ऊर्ध्वाधर कड़ियों से जोड़कर बनाई जाती है। फिर इस ढेर को इंटरपोज़र (interposer) नामक पतली आधार-परत पर प्रोसेसर के बगल में रखा जाता है — इस व्यवस्था को प्रायः 2.5D पैकेजिंग कहा जाता है। कम दूरी और बहुत चौड़े संपर्क के कारण पारंपरिक मेमोरी की तुलना में प्रति सेकंड कहीं अधिक डेटा पहुँचता है, और इसी वजह से HBM AI एक्सेलेरेटरों के लिए अनिवार्य बन गई है।
- चिपलेट एक बड़ी चिप को छोटी विशिष्ट चिपों में बाँटकर पैकेजिंग से जोड़ते हैं. पारंपरिक चिप सिलिकॉन के एक ही टुकड़े के रूप में बनती है, जिसे मोनोलिथिक डाई (monolithic die) कहते हैं; डाई जितनी बड़ी होती है, एक ही दोष पूरी चिप को बिगाड़ सकता है, जिससे लागत और बर्बादी बढ़ती है। चिपलेट पद्धति डिज़ाइन को छोटी-छोटी डाई में बाँट देती है, हर डाई उस प्रक्रिया से बनती है जो उसके लिए सबसे उपयुक्त हो, और फिर उन्हें एक ही पैकेज में जोड़ा जाता है। इससे प्रदर्शन में बढ़त का स्रोत केवल छोटे ट्रांज़िस्टर नहीं, बल्कि उन्नत पैकेजिंग भी बन जाती है — जो इसलिए अहम है कि मूर के नियम (Moore’s Law) द्वारा अनुमानित गति अब धीमी पड़ रही है। अलग-अलग निर्माताओं के चिपलेट जोड़ने का एक उद्योग-मानक, यूनिवर्सल चिपलेट इंटरकनेक्ट एक्सप्रेस (UCIe), 2022 में शुरू किया गया।
- सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम और भारत सेमीकंडक्टर मिशन. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिसंबर 2021 में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण पारितंत्र विकसित करने के लिए ₹76,000 करोड़ के परिव्यय के साथ सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम (Semicon India programme) को मंज़ूरी दी। इसे इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के अधीन एक विशेष इकाई, भारत सेमीकंडक्टर मिशन, चलाता है। कार्यक्रम में सेमीकंडक्टर फ़ैब, डिस्प्ले फ़ैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर और ATMP/OSAT इकाइयों के लिए योजनाएँ हैं, साथ ही डिज़ाइन लिंक्ड प्रोत्साहन (Design Linked Incentive — DLI) योजना भी, जो घरेलू चिप-डिज़ाइन कंपनियों और स्टार्टअप को वित्तीय प्रोत्साहन और डिज़ाइन अवसंरचना से सहायता देती है। अलग से, कंप्यूट क्षमता, डेटासेट और AI अनुप्रयोग तैयार करने के लिए मार्च 2024 में IndiaAI मिशन को मंज़ूरी दी गई।
UPSC इसे क्यों पूछता है
- GS3 में प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और उद्योग में निवेश शामिल है. UPSC भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं, फ़ैब स्थापित करने की बाधाओं और डिज़ाइन बनाम विनिर्माण की भूमिका पर प्रश्न पूछ चुका है। यह लेख पूरी शब्दावली देता है — सुपरसाइकिल, HBM, चिपलेट, टेक-ऑर-पे, फ़ैबलेस — और साथ ही यह साफ़-साफ़ बताता है कि शृंखला में भारत कहाँ खड़ा है, जो किसी भी एक निवेश-घोषणा से कहीं अधिक उपयोगी है।
- वैश्विक AI शासन GS2 के अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं वाले हिस्से में प्रवेश कर रहा है. उभरती प्रौद्योगिकियों, AI और डेटा के शासन पर प्रश्न GS2 और GS3 दोनों में आ चुके हैं। 2025 में गठित संयुक्त राष्ट्र का AI पर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल एक नई संस्था है, जिस पर प्रारंभिक परीक्षा में कथन-आधारित प्रश्न बन सकता है — साथ ही AI शिखर सम्मेलन शृंखला में भारत की भूमिका और उसके अपने IndiaAI सुरक्षा एजेंडे पर भी।
- प्रौद्योगिकी का आर्थिक भूगोल GS1 और निबंध का विषय है. HBM का तीन कंपनियों में और उन्नत पैकेजिंग का पूर्वी एशिया में केंद्रित होना सामरिक उद्योगों के भूगोल का एक पाठ है। प्रौद्योगिकी और संप्रभुता पर निबंध के विषय, तथा उद्योगों की अवस्थिति पर GS1 के प्रश्न, इस उदाहरण का सहारा ले सकते हैं कि कैसे एक अकेला तकनीकी बदलाव देशों के बीच निवेश का पुनर्वितरण कर देता है।
प्रीलिम्स तथ्य
- उच्च-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) DRAM डाई को ऊर्ध्वाधर रूप से एक के ऊपर एक रखकर और उन्नत पैकेजिंग के ज़रिए इस ढेर को प्रोसेसर के पास लगाकर बनाई जाती है।
- DRAM एक अस्थायी (volatile) कार्यशील मेमोरी है जो बिजली बंद होने पर डेटा खो देती है, जबकि NAND फ़्लैश एक स्थायी (non-volatile) भंडारण मेमोरी है।
- फ़ैबलेस सेमीकंडक्टर कंपनी चिपों का डिज़ाइन और बिक्री करती है, परंतु उनका निर्माण फ़ाउंड्री से करवाती है।
- ATMP का पूर्ण रूप असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग एंड पैकेजिंग है, जो वेफ़र निर्माण के बाद आने वाला सेमीकंडक्टर विनिर्माण का बैक-एंड चरण है।
- दिसंबर 2021 में ₹76,000 करोड़ के परिव्यय के साथ मंज़ूर सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन भारत सेमीकंडक्टर मिशन के माध्यम से लागू किया जाता है।
- सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत डिज़ाइन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना सेमीकंडक्टर डिज़ाइन में लगी घरेलू कंपनियों और स्टार्टअप को सहायता देती है।
- चिपलेट संरचना एक बड़ी मोनोलिथिक डाई बनाने के बजाय कई छोटी डाई को एक ही पैकेज में जोड़ती है।
विश्लेषण
- भारत सुपरसाइकिल की सवारी सबसे कम मार्जिन वाले चरण पर कर रहा है, और शुरुआत के लिए यह ठीक जगह है. किसी भी उछाल में मुनाफ़ा वहाँ जमा होता है जहाँ आपूर्ति सबसे कम हो, और आज वह जगह HBM और उन्नत पैकेजिंग है, जिस पर कोरिया, ताइवान और अमेरिका की मुट्ठी भर कंपनियों का नियंत्रण है। आयातित वेफ़र का प्रसंस्करण करने वाले भारत के पैकेजिंग संयंत्र सेवा-शुल्क कमाएँगे, कमी से पैदा होने वाला लगान (rent) नहीं। आलोचक इसे चिप उद्योग के लिबास में कम मूल्य वाली असेंबली मानते हैं। लेकिन पैकेजिंग अब साधारण बैक-एंड काम नहीं रही: HBM और चिपलेट के दौर में प्रदर्शन की लड़ाई पैकेज में ही जीती जाती है, और ISM 2.0 की पैकेजिंग व चिपलेट अनुसंधान योजनाएँ भारत को बैक-एंड के उस हिस्से की ओर ले जाती हैं जो उच्च-मूल्य वाला बन रहा है। असली कसौटी यह है कि भारतीय संयंत्र इसी चक्र के भीतर पारंपरिक से उन्नत पैकेजिंग की ओर बढ़ पाते हैं या नहीं — यह नहीं कि भारत अत्याधुनिक फ़ैब बना पाता है या नहीं।
- सुपरसाइकिल देर से आने वालों के लिए एक जाल भी है. सुपरसाइकिल ख़त्म होते हैं, और सेमीकंडक्टर उद्योग का इतिहास उछाल के बाद अति-आपूर्ति और क़ीमतों के धड़ाम होने से भरा पड़ा है। टेक-ऑर-पे अनुबंध आज के अगुओं की रक्षा करते हैं, जो पक्के ख़रीदारों के भरोसे क्षमता की योजना बना सकते हैं, जबकि नए प्रवेशी ऐसे संयंत्र बनाते हैं जो शायद माँग के चरम पर पहुँच जाने के बाद चालू हों। सुश्री मित्तल की यह चेतावनी कि उद्योग इस पर निर्भर है कि AI सेवाएँ वास्तव में कितना राजस्व कमाती हैं, सबसे बड़ा जोखिम है: अगर चार कंपनियों का AI ख़र्च धीमा पड़ा, तो मेमोरी की क़ीमतें तेज़ी से गिर सकती हैं। इसलिए भारत को वहाँ निवेश करना चाहिए जहाँ उसकी बढ़त पूरे चक्र में टिकी रहे — डिज़ाइन प्रतिभा और पैकेजिंग कौशल — न कि बाज़ार के शिखर पर सबसे अधिक चक्रीय क्षमता के पीछे भागना चाहिए।
- यह उछाल भारत से पहले ही क़ीमत वसूल रहा है — महँगाई और पूँजी, दोनों रूपों में. जुलाई का संसदीय उत्तर, जिसमें कहा गया कि AI की माँग मेमोरी की आपूर्ति तंग कर रही है और क़ीमतें बढ़ा रही है, दिखाता है कि इलेक्ट्रॉनिक्स का बड़ा आयातक भारत इस सुपरसाइकिल की क़ीमत महँगे उपकरणों और सर्वरों के रूप में चुकाता है — उनमें वे भी शामिल हैं जो उसके अपने AI मिशन के लिए ज़रूरी हैं। ताइवान और कोरिया से जुड़ी विदेशी पोर्टफ़ोलियो निकासी बताती है कि पूँजी इस चक्र के विजेताओं के पीछे भाग रही है। यह उत्पादन के चार कारकों में पूँजी वाला पक्ष है: सुपरसाइकिल वैश्विक निवेश को उन देशों की ओर मोड़ रहा है जिनके पास दुर्लभ सेमीकंडक्टर क्षमता है। प्रतिपक्ष यह है कि ऐसे प्रवाह चक्रीय होते हैं और पलट जाएँगे; लेकिन जिस देश की चक्र की दुर्लभ परत में कोई हिस्सेदारी नहीं, उसे हर बार यही पैटर्न झेलना पड़ेगा।
- डिज़ाइन भारत का सबसे मज़बूत पत्ता है, पर कमी डिज़ाइन के स्वामित्व की है. दुनिया के चिप कार्यबल का लगभग पाँचवाँ हिस्सा भारत में है, लेकिन इस प्रतिभा का बड़ा भाग विदेशी कंपनियों के स्वामित्व वाली चिपें डिज़ाइन करता है। DLI योजना और कैमरों व ड्रोन के लिए एज-AI प्रोसेसर बना रहे Netrasemi जैसे स्टार्टअप भारतीय स्वामित्व वाली बौद्धिक संपदा खड़ी करने के प्रयास हैं। Infineon द्वारा बेंगलुरु की फ़ैबलेस कंपनी C2i का अधिग्रहण दोधारी है: यह भारतीय डिज़ाइन क्षमता पर मुहर भी लगाता है और यह भी दिखाता है कि सफल भारतीय डिज़ाइन कंपनियाँ कैसे विदेशी हाथों में चली जाती हैं। जो नीति स्टार्टअप को पैसा तो दे पर उनके विस्तार का रास्ता न दे, वह अंततः अधिग्रहण के लक्ष्य तैयार करती रह सकती है — यह विफलता नहीं है, पर संप्रभुता भी नहीं।
- संयुक्त राष्ट्र पैनल की प्रमाण वाली माँग AI शासन में भारत की भी सबसे अच्छी स्थिति है. 21 सितंबर के कार्यक्रम में Google DeepMind की जोएल बराल (Joelle Barral) ने कहा कि “डर में निवेश करना बहुत मददगार नहीं है”, और पैनल के सह-अध्यक्ष योशुआ बेंजियो (Yoshua Bengio) ने इस पर ज़ोर दिया कि AI जोखिमों के बारे में जो ज्ञात है उसे उससे अलग रखा जाए जिसका केवल “संभावित अनुमान” लगाया जा सकता है — जबकि कुछ पूर्व AI लैब कर्मचारी विनाशकारी जोखिम की बात कर चुके हैं और PauseAI UK ने डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर प्रदर्शन किया। प्रमाण-प्रथम दृष्टिकोण भारत के अनुकूल है, जो विकास के लिए AI को व्यापक रूप से अपनाना चाहता है और आशंकित है कि काल्पनिक अस्तित्वगत जोखिम के इर्द-गिर्द लिखे नियम कुछ अग्रणी लैबों की बढ़त को स्थायी बना सकते हैं। प्रतिपक्ष यह है कि विनाशकारी क्षति के प्रमाण का इंतज़ार करना शायद बहुत देर तक इंतज़ार करना होगा। भारत का विश्वसनीय मध्य मार्ग है अपनी परीक्षण और सुरक्षा क्षमता बनाना, ताकि वह दूसरों के निष्कर्षों का केवल उपभोक्ता न रहकर प्रमाण में योगदान दे।
संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न
“AI-संचालित सेमीकंडक्टर सुपरसाइकिल पूरी दुनिया में पूँजी और क्षमता का पुनर्वितरण कर रहा है।” इस संदर्भ में वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में भारत की स्थिति का मूल्यांकन कीजिए तथा सुझाव दीजिए कि वह उन्नत पैकेजिंग और चिप डिज़ाइन जैसे उच्च-मूल्य खंडों में कैसे आगे बढ़ सकता है। (15 अंक, 250 शब्द)
उत्तर की रूपरेखा
- भूमिका. सुपरसाइकिल को किसी संरचनात्मक तकनीकी बदलाव से उपजे कई वर्षों के निवेश-उछाल के रूप में परिभाषित कीजिए, जैसा 1990 के दशक में कंप्यूटरों और 2010 के दशक में स्मार्टफ़ोन के साथ हुआ। बताइए कि AI डेटा सेंटर — जिन पर चार कंपनियों ने 2026 में लगभग 635 अरब डॉलर की योजना बनाई है — एक्सेलेरेटर और उच्च-बैंडविड्थ मेमोरी की माँग को आगे बढ़ा रहे हैं।
- मुख्य भाग — मूल्य शृंखला कैसे बदल रही है. HBM और चिपलेट को सरल शब्दों में समझाइए और दिखाइए कि उन्नत पैकेजिंग मूल्य का स्रोत बन चुकी है। HBM के SK Hynix, Samsung और Micron में केंद्रित होने तथा पुराने खिलाड़ियों के पक्ष में जाने वाले टेक-ऑर-पे अनुबंधों का उल्लेख कीजिए।
- मुख्य भाग — भारत की स्थिति. सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम और 12 मंज़ूर परियोजनाओं वाले ISM 1.0 का वर्णन कीजिए, जिसका ज़ोर ATMP/OSAT पर है; आयातित वेफ़र का प्रसंस्करण करने वाली Micron की साणंद इकाई; डिज़ाइन कार्यबल; और DLI योजना। लागत भी गिनाइए: तंग मेमोरी आपूर्ति, ऊँची क़ीमतें, और ताइवान व कोरिया की ओर पोर्टफ़ोलियो निकासी।
- मुख्य भाग — ऊपर कैसे बढ़ें. ISM 2.0 के तहत पारंपरिक से उन्नत पैकेजिंग की ओर बदलाव, चिपलेट अनुसंधान एवं विकास, भारतीय स्वामित्व वाली डिज़ाइन बौद्धिक संपदा, धैर्यवान पूँजी (patient capital) के ज़रिए डिज़ाइन स्टार्टअप को देश में बनाए रखना, सामग्री और उपकरणों में कौशल, और भरोसेमंद देशों के साथ साझेदारी का सुझाव दीजिए। किसी उछाल के शिखर पर चक्रीय क्षमता खड़ी करने के प्रति सावधान कीजिए।
- निष्कर्ष. निष्कर्ष दीजिए कि भारत का लक्ष्य हर खंड में मौजूद रहना नहीं, बल्कि कुछ खंडों — डिज़ाइन और उन्नत पैकेजिंग — में अपरिहार्य बनना होना चाहिए, ताकि अगला चक्र उसे दुर्लभ क्षमता के साथ पाए।
प्रशासक की दृष्टि
MeitY में ISM 2.0 देख रहे संयुक्त सचिव के रूप में आप एक और पारंपरिक पैकेजिंग संयंत्र को सब्सिडी देने और चिपलेट अनुसंधान को धन देने के बीच कैसे निर्णय करेंगे?
मैं यह देखूँगा कि भारत कहाँ केवल मौजूद रहने के बजाय दुर्लभ बन सकता है। पारंपरिक पैकेजिंग क्षमता दुनिया भर में बढ़ रही है और उसमें मार्जिन पतला है, जबकि उन्नत पैकेजिंग और चिपलेट एकीकरण AI चक्र की अड़चनें हैं। मैं किसी भी नए संयंत्र को दी जाने वाली सहायता को उन्नत पैकेजिंग की ओर एक स्पष्ट रोडमैप से जोड़ूँगा, और चिपलेट अनुसंधान को उद्योग व शैक्षणिक संस्थानों के संघों (consortia) के माध्यम से स्पष्ट पड़ावों के साथ धन दूँगा। सार्वजनिक धन से ऐसी क्षमता ख़रीदी जानी चाहिए जो मौजूदा उछाल के बाद भी टिकी रहे।
आर्थिक कार्य विभाग के अधिकारी के रूप में आप ताइवान और कोरिया में चिप उछाल से जुड़ी पोर्टफ़ोलियो निकासी पर कैसे प्रतिक्रिया देंगे?
मैं ऐसी निकासी को भारत की समष्टि आर्थिक स्थिरता पर फ़ैसले के बजाय क्षेत्र-विशेष के अवसर के संकेत के रूप में देखूँगा। अल्पकालिक पूँजी चक्र के पीछे चलती है, और भारत नियंत्रणों से इसे न रोक सकता है, न उसे रोकना चाहिए। टिकाऊ उत्तर यह है कि स्थिर नीति, तेज़ मंज़ूरियों और सूचीबद्ध प्रौद्योगिकी कंपनियों की एक पाइपलाइन के ज़रिए भारत को उन्हीं क्षेत्रों में निवेश-योग्य गंतव्य बनाया जाए। तब तक पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार और लचीली विनिमय दर इस अस्थिरता को सोख लेते हैं।
साक्षात्कार बोर्ड पूछता है: क्या भारत को उन्नत AI के विकास पर वैश्विक रोक का समर्थन करना चाहिए, जैसी कुछ प्रदर्शनकारी माँग कर रहे हैं?
ऐसी रोक का सत्यापन कठिन है और यह मुख्यतः उन्हीं की बढ़त को जमा देगी जो पहले से अग्रिम पंक्ति में हैं, जबकि भारत जैसे देशों को स्वास्थ्य, कृषि और शासन के लिए अब भी AI की ज़रूरत है। साथ ही, गंभीर जोखिमों की चिंताएँ निराधार नहीं हैं और वैज्ञानिक अध्ययन की हक़दार हैं — इसीलिए संयुक्त राष्ट्र का AI पर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल महत्वपूर्ण है। भारत के लिए बेहतर रास्ता है कि वह मॉडलों को परखने की अपनी क्षमता बनाए, अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक आकलन में भाग ले, और प्रमाण के अनुपात में नियमों का समर्थन करे। शासन ज्ञान के पीछे चलना चाहिए, और भारत को वह ज्ञान पैदा करने में हाथ बँटाना चाहिए।