UPSC Darpan

4. अंतरराष्ट्रीय संबंध (International Relations)GS224 September 2026

ओमान के पास मिसाइल हमले में विदेशी झंडे वाले जहाज पर भारतीय नाविक की मौत; होर्मुज़ का युद्ध भारत के चालक दलों तक पहुंचा

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ख़बर

मस्कट और नई दिल्ली। द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, ओमान के तट के पास थोक मालवाहक जहाज (bulk carrier) MV केप डाओ (MV Cape Dao) पर मिसाइल गिरने के कुछ घंटे बाद उत्तर प्रदेश के युवा नाविक सूरज यादव की सिर में लगी चोटों से मृत्यु हो गई। द हिंदू ने AFP के हवाले से हमले का स्थान होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बताया है — बुधवार, 23 सितंबर को, ओमान के तट से लगभग 2.5 समुद्री मील (nautical miles) दूर; द इकोनॉमिक टाइम्स (ET) के अनुसार यह ओमान के पूर्वी तट के पास हुआ। किसी भी अखबार ने यह नहीं बताया कि मिसाइल किसने दागी। जहाज पर एंटीगुआ और बारबुडा का झंडा है, यानी वह इसी कैरिबियाई देश में पंजीकृत है, पर उस पर 20 भारतीय नाविक सवार थे। बंदरगाह एवं पोत परिवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि बचे हुए 19 नाविकों को ओमान की रॉयल नेवी ने सुरक्षित निकाल लिया है और वे तट पर पहुंच चुके हैं, तथा श्री यादव का पार्थिव शरीर “पूरे सम्मान के साथ” स्वदेश लाया जाएगा। विदेश मंत्रालय (MEA) ने हमले की निंदा की। इस पत्रिका के 22 और 23 सितंबर के कार्डों के बाद नई बात यह है कि इस युद्ध ने अब एक व्यापारिक जहाज पर एक भारतीय की जान ले ली है। उसी दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने ईरान को “नष्ट कर देने” की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी का जवाब दिया: “हां, उन्होंने हम पर हमला किया, पर हमने घुटने नहीं टेके।” लगभग सात महीने पुराने इस युद्ध के आरंभ में अमेरिकी हमलों में मारे गए 150 से अधिक स्कूली बच्चों की तस्वीरें उठाकर (द हिंदू में छपी AP की रिपोर्ट के अनुसार) उन्होंने कहा कि “ऐसा नहीं हो सकता कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सबको लाभ मिले और केवल हमें वहां पहुंच से वंचित रखा जाए”। युद्ध से पहले इस जलडमरूमध्य से दुनिया के तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के कुल जहाज़ी लदान का पांचवां हिस्सा गुजरता था; रॉयटर्स के अनुसार ईरान इस पर नियंत्रण और यहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलना चाहता है, जिसे वाशिंगटन खारिज करता है। जुलाई में अंतरिम युद्धविराम टूटने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच पहली ‘शटल’ वार्ता (shuttle talks) एक कतरी मध्यस्थ के जरिए चली। वाशिंगटन ने यह भी कहा है कि बुधवार के बाद ईरानी उड़ानों की अनुमति देने वाले किसी भी देश पर वह द्वितीयक प्रतिबंध (secondary sanctions) — यानी तीसरे देशों पर दंड — लगाएगा; ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेज़ाई ने पलटकर कहा कि यदि पड़ोसी देशों ने ईरानी उड़ानें रोकीं तो ईरान सुनिश्चित करेगा कि उनके हवाई अड्डे “काम ही न कर सकें”, और यह भी कि ईरान की शर्तें पूरी होने तक होर्मुज़ नहीं खुलेगा। हूती सलाहकार आबिद मोहम्मद अल-थौर ने धमकी दी कि यदि वाशिंगटन ने बाब-अल-मंदेब को खुलवाने की कोशिश की तो अमेरिकी हितों को निशाना बनाया जाएगा; ET ध्यान दिलाता है कि सऊदी कच्चे तेल का रास्ता काटने वाली हूतियों की लाल सागर नाकेबंदी होर्मुज़ की नाकेबंदी के ऊपर से आ पड़ी है। पाठ्यक्रम से जुड़ाव: प्रवासी भारतीय तथा दूसरे देशों की नीतियों का भारत पर प्रभाव (GS2), और समुद्री सुरक्षा (GS3)।

कड़ी — एक पंक्ति में: अमेरिका और इज़राइल 28 फरवरी 2026 को ईरान के विरुद्ध युद्ध छेड़ते हैं → होर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकेबंदी होती है और अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लगा देता है → जुलाई में अंतरिम युद्धविराम टूटता है और हूती बाब-अल-मंदेब पर लाल सागर का मार्ग रोक देते हैं → जलडमरूमध्य के भीतर व्यापारिक जहाज गोलीबारी की चपेट में आते हैं, और ओमान से 2.5 समुद्री मील दूर एंटीगुआ और बारबुडा के झंडे वाले MV केप डाओ पर मिसाइल गिरती है → एक भारतीय नाविक की मौत होती है, ठीक जब वाशिंगटन और तेहरान संयुक्त राष्ट्र में शटल वार्ता शुरू करते हैं और ईरान जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण की मांग करता है

स्थैतिक पाठ्यक्रम से जुड़ाव

  1. UNCLOS अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्यों से पारगमन मार्ग (transit passage) की गारंटी देता है, और कोई तटीय राज्य इसे निलंबित नहीं कर सकता. संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय, 1982 (UN Convention on the Law of the Sea — UNCLOS) तटीय राज्य को 12 समुद्री मील तक के प्रादेशिक समुद्र (territorial sea) का दावा करने की अनुमति देता है (अनुच्छेद 3), जिसमें विदेशी जहाजों को केवल निर्दोष मार्ग (innocent passage) का अपेक्षाकृत कमज़ोर अधिकार मिलता है। अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए प्रयुक्त जलडमरूमध्यों में भाग III पारगमन मार्ग का कहीं अधिक सशक्त अधिकार देता है: जहाज और विमान बिना रुके और शीघ्रता से गुजर सकते हैं, और अनुच्छेद 44 कहता है कि तटवर्ती राज्य इसमें बाधा नहीं डालेंगे तथा इसे निलंबित नहीं किया जाएगा। अनुच्छेद 26 विदेशी जहाजों से केवल प्रादेशिक समुद्र से गुजरने के लिए कोई शुल्क लेने पर रोक लगाता है; शुल्क केवल दी गई विशिष्ट सेवाओं के बदले लिया जा सकता है, और इसीलिए होर्मुज़ पर ईरानी चुंगी इस अभिसमय से सीधे टकराती है। होर्मुज़ इतना संकरा है कि ईरान और ओमान के प्रादेशिक समुद्र एक-दूसरे पर चढ़ जाते हैं, इसलिए पूरा नौवहन मार्ग किसी न किसी एक देश के जल-क्षेत्र में पड़ता है। ईरान ने 1982 में UNCLOS पर हस्ताक्षर तो किए पर कभी उसका अनुसमर्थन (ratification) नहीं किया, और यह घोषणा की कि पारगमन मार्ग जैसे संधिगत अधिकार केवल पक्षकार देशों को ही मिलते हैं; अमेरिका ने भी इसका अनुसमर्थन नहीं किया है, जबकि भारत 1995 में ही इसका अनुसमर्थन कर चुका है।
  2. व्यापारिक जहाज की कानूनी ज़िम्मेदारी ध्वज राज्य (flag state) की होती है, चालक दल के देश की नहीं. UNCLOS के अनुच्छेद 91 के तहत जहाज की राष्ट्रीयता उस राज्य की होती है जिसका झंडा फहराने का वह हकदार है, और दोनों के बीच एक “वास्तविक संबंध” (genuine link) होना अनिवार्य है। अनुच्छेद 94 ध्वज राज्य को जहाज के प्रशासनिक, तकनीकी और सामाजिक मामलों पर — जिनमें जहाज पर काम की परिस्थितियां भी शामिल हैं — प्रभावी क्षेत्राधिकार और नियंत्रण के लिए उत्तरदायी बनाता है। खुली रजिस्ट्रियां (open registries), जिन्हें आम बोलचाल में ‘सुविधा के झंडे’ (flags of convenience) कहा जाता है, कम शुल्क और हल्के नियमन पर उन जहाजों का पंजीकरण करती हैं जिनका स्वामित्व और प्रबंधन कहीं और से होता है; एंटीगुआ और बारबुडा ऐसी ही एक रजिस्ट्री चलाता है। नतीजा एक कानूनी विभाजन है: कानून की नज़र में MV केप डाओ एंटीगुआ और बारबुडा का जहाज है, भले ही उसका चालक दल भारतीय था, इसलिए भारत की भूमिका कांसुलर और कूटनीतिक है — स्वदेश वापसी, मुआवज़ा और परिवारों को सहारा — न कि वह प्रत्यक्ष सुरक्षा जो वह भारतीय ध्वज वाले जहाज को देने के लिए बाध्य है।
  3. समुद्री श्रम अभिसमय, 2006 स्वदेश वापसी और मृत्यु-मुआवज़े को जहाज मालिक का दायित्व बनाता है. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organization) के समुद्री श्रम अभिसमय, 2006 (Maritime Labour Convention — MLC) ने, जिसे अक्सर नाविकों का अधिकार-पत्र (seafarers’ bill of rights) कहा जाता है, दर्जनों पुराने समुद्री श्रम अभिसमयों को एक जगह समेकित किया और यह 2013 में लागू हुआ; भारत ने 2015 में इसका अनुसमर्थन किया। विनियम 2.5 नाविकों को अपनी जेब से कोई खर्च किए बिना स्वदेश वापसी (repatriation) का अधिकार देता है, और विनियम 4.2 सेवा के दौरान होने वाली बीमारी, चोट और मृत्यु की लागत के लिए जहाज मालिकों को उत्तरदायी ठहराता है। 2017 से लागू संशोधन जहाज मालिकों के लिए वित्तीय सुरक्षा (financial security) रखना अनिवार्य करते हैं, ताकि बेसहारा छोड़ दिए गए चालक दलों की स्वदेश वापसी हो सके और मृत्यु या दीर्घकालिक विकलांगता के दावों का वास्तव में भुगतान हो। भारत में बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन नौवहन महानिदेशालय (Directorate General of Shipping) समुद्री प्रशासन का काम करता है: यह नाविकों को प्रमाणपत्र देता है, उनकी भर्ती और नियुक्ति करने वाली एजेंसियों को लाइसेंस देता है, और इन दायित्वों का पालन कराता है।
  4. ऑपरेशन संकल्प खाड़ी में नौसेना की अनुरक्षण भूमिका को दिखाता है, और उसकी सीमाओं को भी. ओमान की खाड़ी में टैंकरों पर हुए हमलों के बाद भारतीय नौसेना ने जून 2019 में ऑपरेशन संकल्प (Operation Sankalp) शुरू किया, ताकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी से गुजरने वाले भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों को उपस्थिति और अनुरक्षण (escort) मिल सके। 2023 के अंत से नौसेना ने हूतियों के मिसाइल और ड्रोन हमलों तथा सोमाली समुद्री डकैती के फिर से सिर उठाने के विरुद्ध अरब सागर और अदन की खाड़ी में अपनी तैनाती बढ़ाई, और कई देशों के झंडे वाले उन जहाजों की आपात पुकार का जवाब दिया जिन पर भारतीय चालक दल सवार थे। 2018 में गुरुग्राम में स्थापित सूचना संलयन केंद्र – हिंद महासागर क्षेत्र (Information Fusion Centre – Indian Ocean Region) साझेदार नौसेनाओं और उद्योग के साथ समुद्री खतरों की जानकारी साझा करता है। नौसैनिक सुरक्षा भारतीय ध्वज वाले जहाजों के लिए सबसे मज़बूत है; विदेशी झंडे वाले जहाजों पर काम कर रहे भारतीय चालक दलों के लिए यह निकटता, अनुरोधों और तटीय राज्यों की सहमति पर निर्भर करती है — इस मामले में जीवित बचे नाविकों को ओमान की नौसेना ने ही बचाया।

UPSC इसे क्यों पूछता है

  1. GS2 में प्रवासी भारतीय और दूसरे देशों की नीतियों का भारत के हितों पर प्रभाव स्पष्ट रूप से दर्ज है. सामान्य अध्ययन-2 के पाठ्यक्रम में “विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों व राजनीति का भारत के हितों पर प्रभाव” और प्रवासी भारतीय (Indian diaspora) शामिल हैं। पश्चिम एशिया पर पूछे गए प्रश्नों ने बार-बार भारत की ऊर्जा सुरक्षा को उस क्षेत्र में काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा से जोड़ा है; विदेशी झंडे वाले जहाज पर मारा गया एक नाविक इस बात का सटीक केस-अध्ययन है कि यह सुरक्षा कहां जाकर कमज़ोर पड़ जाती है।
  2. प्रारंभिक परीक्षा समुद्री कानून को पहले ही परख चुकी है. प्रारंभिक परीक्षा 2022 में UNCLOS पर कथन-आधारित एक प्रश्न पूछा गया था, जिसमें 12 समुद्री मील का प्रादेशिक समुद्र, निर्दोष मार्ग और 200 समुद्री मील का अनन्य आर्थिक क्षेत्र (exclusive economic zone) शामिल थे। जलडमरूमध्यों से पारगमन मार्ग, ध्वज राज्य के दायित्व और समुद्री श्रम अभिसमय इसकी स्वाभाविक अगली परत हैं, और आज की खबर इनमें से हर एक को एक वास्तविक जहाज के उदाहरण से समझा देती है।
  3. अवरोध बिंदुओं (chokepoints) पर मानचित्र-आधारित प्रश्न स्थायी रूप से पूछे जाते हैं. UPSC नियमित रूप से जल निकायों को उनसे लगे देशों के साथ जोड़कर पूछता है। होर्मुज़ और बाब-अल-मंदेब, जो अब एक साथ बंद हैं, प्रारंभिक परीक्षा के मानचित्र प्रश्नों और समुद्री सुरक्षा पर GS3 के उत्तर — दोनों के लिए संभावित सामग्री हैं।

प्रीलिम्स तथ्य

  • UNCLOS के तहत कोई तटीय राज्य अपनी आधार रेखाओं (baselines) से मापे गए अधिकतम 12 समुद्री मील तक का प्रादेशिक समुद्र स्थापित कर सकता है।
  • UNCLOS का भाग III अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए प्रयुक्त जलडमरूमध्यों से पारगमन मार्ग का प्रावधान करता है, और ऐसे जलडमरूमध्यों से लगे राज्य इसे निलंबित नहीं कर सकते।
  • UNCLOS के अनुच्छेद 91 के तहत जहाज की राष्ट्रीयता उस राज्य की होती है जिसका झंडा फहराने का वह हकदार है, और उस राज्य तथा जहाज के बीच वास्तविक संबंध होना चाहिए।
  • समुद्री श्रम अभिसमय, 2006 अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के अंतर्गत अपनाया गया था और यह नाविकों को बिना किसी व्यय के स्वदेश वापसी का अधिकार देता है; भारत ने इसका अनुसमर्थन किया है।
  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और ईरान तथा ओमान के मुसंदम प्रायद्वीप के बीच स्थित है।
  • बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और अरब प्रायद्वीप पर स्थित यमन को हॉर्न ऑफ अफ्रीका के जिबूती और इरिट्रिया से अलग करता है।
  • ऑपरेशन संकल्प भारतीय नौसेना ने 2019 में होर्मुज़ जलडमरूमध्य और खाड़ी क्षेत्र से भारतीय ध्वज वाले जहाजों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया था।

विश्लेषण

  1. जहाज के पिछले हिस्से पर लगे झंडे ने तय किया कि सूरज यादव की रक्षा कौन कर सकता था — और वह भारत नहीं था. भारतीय नाविक अधिकतर विदेशी झंडे वाले जहाजों पर काम करते हैं, क्योंकि भारत जितने नाविक प्रशिक्षित करता है, उनकी तुलना में उसका अपना व्यापारिक बेड़ा छोटा है। इसका अर्थ यह है कि जिस राज्य की चालक दल की सुरक्षा में सबसे गहरी रुचि है, जहाज पर उसी की कानूनी स्थिति सबसे कमज़ोर है, जबकि ध्वज राज्य — यहां एक छोटी कैरिबियाई रजिस्ट्री — के पास न तो खाड़ी में कोई नौसेना है और न उसे इस्तेमाल करने का कोई खास कारण। ऑपरेशन संकल्प भारतीय ध्वज वाले टन-भार (tonnage) को ध्यान में रखकर बनाया गया था, इसलिए यह वर्ग असुरक्षित छूट जाता है। विरोधी तर्क यह है कि कोई भी नौसेना अपने नागरिकों को ले जा रहे हर जहाज का अनुरक्षण नहीं कर सकती, और वैसे भी अनुरक्षण मिसाइल को नहीं रोक पाता। यथार्थवादी समाधान शृंखला की शुरुआती कड़ी में है: युद्ध-क्षेत्र घोषित करना (war-zone designation), यात्रा से इनकार का अधिकार और सख्ती से लागू बीमा — ये वे साधन हैं जो भर्ती एजेंसियों को लाइसेंस देने के अपने अधिकार के कारण भारत के हाथ में हैं।
  2. ओमान से 2.5 समुद्री मील दूर हुआ हमला युद्ध को एक तटस्थ देश के जल-क्षेत्र तक ले आता है. 2.5 समुद्री मील की दूरी पर MV केप डाओ ओमान के 12 मील के प्रादेशिक समुद्र के काफी भीतर था — चाहे वह द हिंदू के अनुसार स्वयं जलडमरूमध्य में रहा हो, या ET के अनुसार ओमान के पूर्वी तट के पास। ओमान इस युद्ध का पक्षकार नहीं है, वह लंबे समय से वाशिंगटन और तेहरान के बीच संदेशवाहक की भूमिका निभाता रहा है, और उसी की नौसेना ने चालक दल को निकाला। यदि किसी तटस्थ देश के जल-क्षेत्र में भी जहाज सुरक्षित नहीं हैं, तो ओमानी तट से सटकर चलने वाले संरक्षित गलियारे का विचार कमज़ोर पड़ जाता है। यह स्थान उस प्रस्ताव की भी परीक्षा लेता है जिसकी खबर इस पत्रिका ने 19 सितंबर को दी थी — कि जलडमरूमध्य के बाहर ओमान की खाड़ी पर स्थित ओमान का सोहार बंदरगाह खाड़ी तक पहुंच का भारत का प्रवेश-द्वार बने: जलडमरूमध्य के भीतर हुआ हमला सोहार का पक्ष मज़बूत करता है, जबकि पूर्वी तट के पास हुआ हमला उसे कमज़ोर करता है। इसलिए अखबारों के बताए अलग-अलग स्थान केवल रिकॉर्ड के लिए नहीं, नीति के लिए भी मायने रखते हैं।
  3. ईरान की शुल्क-मांग एक अवरोध बिंदु को चुंगी-नाके में बदल देगी, और UNCLOS ही भारत की सबसे अच्छी ढाल है. रॉयटर्स के अनुसार ईरान होर्मुज़ पर नियंत्रण चाहता है और जहाजों से शुल्क वसूलना चाहता है। इसे मौन रूप से भी स्वीकार करने से यह मिसाल बनेगी कि पर्याप्त मिसाइलों वाला कोई भी तटवर्ती राज्य किसी जलडमरूमध्य को कमाई का ज़रिया बना सकता है, और यही तर्क एक दिन मलक्का में या दक्षिण चीन सागर में भी आज़माया जा सकता है, जहां भारत नौवहन की स्वतंत्रता (freedom of navigation) की वकालत करता है। उसी सप्ताह न्यूयॉर्क में श्री जयशंकर ने ग्लोबल साउथ के मंत्रियों से कहा था कि वे अवरोध बिंदुओं को “न स्वीकार करें, न वैधता दें”, इसलिए संगति का तकाज़ा है कि भारत होर्मुज़ के बारे में भी यही कहे। ईमानदार विरोधी तर्क यह है कि जब स्वयं अमेरिका ने UNCLOS का अनुसमर्थन नहीं किया है और ईरान ने कभी किया ही नहीं, तो कानून कमज़ोर पड़ जाता है, और दोनों पक्ष संधि के बजाय प्रथागत कानून (custom) के आधार पर बहस करते रह जाते हैं। 1995 से इसका पक्षकार भारत इन दोनों की तुलना में इस नियम के पक्ष में बोलने की कहीं बेहतर स्थिति में है।
  4. उड़ानों पर प्रतिबंध और हवाई अड्डों को धमकियां युद्ध की पहुंच तटस्थ देशों तक फैला देती हैं. ईरानी उड़ानों की अनुमति देने वाले किसी भी देश पर प्रतिबंध लगाने की वाशिंगटन की धमकी, और उसका पालन करने पर पड़ोसियों के हवाई अड्डे ठप कर देने की श्री रेज़ाई की धमकी, खाड़ी देशों को दो दबावकारी मांगों के बीच फंसा देती है। यही वे देश हैं जहां विदेश में सबसे बड़े भारतीय समुदाय बसते हैं और जो भारतीय यात्रियों के लिए प्रमुख हवाई केंद्र (air hubs) हैं, इसलिए वहां का व्यवधान तेल की किसी भी कीमत से पहले भारतीय परिवारों तक पहुंचता है। यह प्रकरण यह भी दिखाता है कि द्वितीयक प्रतिबंध अब वस्तुओं से आगे बढ़कर लॉजिस्टिक्स — उड़ानों, बंदरगाहों, नौवहन — तक पहुंच रहे हैं; यह वही औज़ार है जिसे अमेरिका रूसी तेल के खरीदारों के विरुद्ध इस्तेमाल कर रहा है। विरोधी तर्क यह है कि दोनों पक्षों पर अधिकतम दबाव समझौते को जल्दी ला सकता है, क्योंकि शटल वार्ता इसी सप्ताह शुरू हुई है; पर भारत ऐसे परिणाम के भरोसे योजना नहीं बना सकता जिसे वह प्रभावित ही नहीं करता।
  5. दो बंद अवरोध बिंदु ऊर्जा की समस्या को माल-भाड़े, बीमा और श्रम की समस्या में बदल देते हैं. ET के अनुसार होर्मुज़ की नाकेबंदी और हूतियों के कारण खतरे में पड़े लाल सागर मार्ग के बीच भारत को युद्ध-जोखिम बीमा (war-risk insurance) के ऊंचे प्रीमियम, लंबी समुद्री यात्राओं और ऐसे चालक दलों का सामना करना पड़ रहा है जो जोखिम भत्ते (danger pay) की मांग कर रहे हैं या यात्रा से ही इनकार कर रहे हैं। इसीलिए एक नाविक की मौत कोई साधारण कांसुलर घटना नहीं, बल्कि एक नीतिगत संकेत है: यात्रा के लिए तैयार चालक दलों की उपलब्धता स्वयं यह सीमा तय करती है कि गोलीबारी के बीच खाड़ी का व्यापार कितने समय तक चल सकता है। विरोधी तर्क यह है कि नौवहन बाज़ार ऊंचे वेतन और बदले हुए मार्गों के सहारे जल्दी ढल जाते हैं, पर इस समायोजन की कीमत निर्यातक और जोखिम उठाने वाले चालक दल चुकाते हैं।

संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न

होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हमलों में अब विदेशी झंडे वाले जहाज पर कार्यरत एक भारतीय नाविक की जान जा चुकी है। संघर्ष क्षेत्रों में भारतीय नाविकों की सुरक्षा में मौजूद कानूनी और संस्थागत कमियों का परीक्षण कीजिए, और भारत द्वारा उठाए जाने वाले उपाय सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द)

उत्तर की रूपरेखा

  1. भूमिका. एंटीगुआ और बारबुडा के झंडे वाले MV केप डाओ पर सूरज यादव की मौत से शुरुआत करें, जिस पर 20 भारतीय नाविकों के सवार रहते ओमान से लगभग 2.5 समुद्री मील दूर मिसाइल गिरी थी, और बताएं कि युद्ध से पहले यह जलडमरूमध्य दुनिया के तेल और LNG लदान का पांचवां हिस्सा ढोता था।
  2. मुख्य भाग — कानूनी ढांचा. UNCLOS के भाग III के तहत पारगमन मार्ग, अनुच्छेद 91 और 94 में वर्णित ध्वज राज्य के दायित्व, तथा भारत द्वारा अनुसमर्थित समुद्री श्रम अभिसमय, 2006 के तहत स्वदेश वापसी और मृत्यु-मुआवज़े से जुड़े जहाज मालिक के दायित्व समझाएं।
  3. मुख्य भाग — कमियां. बताएं कि अधिकांश भारतीय नाविक विदेशी झंडों के तहत काम करते हैं, कि ऑपरेशन संकल्प भारतीय ध्वज वाले जहाजों को केंद्र में रखकर बना है, कि खुली रजिस्ट्रियों वाले ध्वज राज्यों के पास चालक दलों की रक्षा की क्षमता न के बराबर है, और कि ईरान और अमेरिका दोनों UNCLOS के दायरे से बाहर हैं। भर्ती की शृंखला तथा मुआवज़े का दावा करने में परिवारों को होने वाली कठिनाई का भी उल्लेख करें।
  4. मुख्य भाग — उपाय. ये उपाय सुझाएं: उच्च-जोखिम क्षेत्र घोषित करने वाले DG शिपिंग के परामर्श, जिनमें यात्रा से इनकार का अधिकार और जोखिम भत्ता हो; जहाज पर कार्यभार ग्रहण (sign-on) से पहले बीमा का सत्यापन; भर्ती एजेंसी के माध्यम से तेज़ मुआवज़ा; सूचना संलयन केंद्र – हिंद महासागर क्षेत्र के ज़रिए सूचनाओं का आदान-प्रदान; ओमान के साथ समन्वय; और जलडमरूमध्यों पर चुंगी के विरुद्ध दृढ़ कूटनीतिक रुख।
  5. निष्कर्ष. निष्कर्ष दें कि भारत विश्व नौवहन को चालक दल तो देता है पर झंडे नहीं, इसलिए उसकी सुरक्षा-व्यवस्था को युद्धपोतों जितना ही कानून, लाइसेंसिंग और कूटनीति के माध्यम से भी काम करना होगा।

प्रशासक की दृष्टि

आप नौवहन महानिदेशक (Director General of Shipping) हैं। इस मौत के एक दिन बाद भर्ती एजेंसियां बताती हैं कि खाड़ी जा रहे जहाजों पर तैनात भारतीय नाविक सेवा छोड़कर उतरना चाहते हैं। आप क्या करेंगे?

मैं होर्मुज़ की ओर जाने वाले समुद्री मार्गों को उच्च-जोखिम क्षेत्र घोषित करने वाला परामर्श जारी करूंगा और स्पष्ट करूंगा कि वहां जाने से इनकार करने वाले नाविकों को दंडित नहीं किया जा सकता तथा समुद्री श्रम अभिसमय के अनुसार जहाज मालिक के खर्च पर उनकी स्वदेश वापसी करानी होगी। मैं लाइसेंसधारी एजेंसियों को निर्देश दूंगा कि वे पुष्टि करें कि भारतीय चालक दल वाले हर जहाज के पास मृत्यु और चोट के दावों के लिए वैध बीमा है। विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर चौबीसों घंटे चलने वाली एक हेल्पलाइन क्षेत्र में मौजूद हर भारतीय नाविक पर जहाज-वार नज़र रखेगी। जोखिम छिपाने वाली या भुगतान न करने वाली एजेंसियों के लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे।

उत्तर प्रदेश में श्री यादव के गृह ज़िले के ज़िलाधिकारी के रूप में आपकी भूमिका क्या है?

मैं विदेश मंत्रालय, ओमान स्थित भारतीय दूतावास और DG शिपिंग के साथ परिवार का एकमात्र संपर्क बिंदु बनूंगा, ताकि पार्थिव शरीर जल्द घर पहुंचे और परिवार को अधिकारियों के चक्कर न काटने पड़ें। मैं सुनिश्चित करूंगा कि जहाज मालिक और उसके बीमाकर्ता के विरुद्ध परिवार का दावा भर्ती एजेंसी के माध्यम से दायर हो और उस पर लगातार अनुवर्ती कार्रवाई हो, तथा राज्य की ओर से मिलने वाली कोई भी अनुग्रह राशि (ex gratia) बिना देरी के दी जाए। मैं इस अवसर का उपयोग ज़िले के युवाओं को बिना लाइसेंस वाले समुद्री भर्ती एजेंटों से सावधान करने के लिए भी करूंगा, क्योंकि परिवारों को अक्सर बहुत देर से पता चलता है कि एजेंट पंजीकृत ही नहीं था।

साक्षात्कार बोर्ड पूछता है: क्या भारतीय नौसेना को भारतीय चालक दल वाले हर जहाज को अनुरक्षण देकर होर्मुज़ पार कराना चाहिए?

नहीं, सर्वव्यापी नियम के रूप में नहीं। नौसेना के पास इसके लिए पर्याप्त जहाज नहीं हैं, ओमानी या ईरानी प्रादेशिक जल में अनुरक्षण के लिए सहमति चाहिए, और सक्रिय युद्ध के बीच विदेशी झंडे वाले जहाजों का अनुरक्षण करता युद्धपोत भारत को उस युद्ध में खींच सकता है। बेहतर तरीका जोखिम-आधारित है: भारतीय ध्वज वाले जहाजों और भारत आ रहे ऊर्जा-माल का अनुरक्षण किया जाए, खतरों की जानकारी व्यापक रूप से साझा की जाए, और ओमान के साथ समन्वय रखा जाए। बड़ी सुरक्षा कूटनीति से और ऐसे नियमों से आती है जो नाविकों को असुरक्षित यात्राओं से इनकार करने का अधिकार देते हैं।