7. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology)GS324 September 2026
OpenAI का मिलेनियम पुरस्कार समस्या के प्रमाण का दावा, जबकि भारत के संस्थान अग्रणी मॉडलों तक मुफ़्त पहुँच से बाहर
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ख़बर
बेंगलुरु। द हिंदू के विज्ञान पृष्ठ की रिपोर्ट के अनुसार, 8 सितंबर को OpenAI ने घोषणा की कि उसके एक अब तक सार्वजनिक न किए गए आंतरिक मॉडल ने नेवियर–स्टोक्स समीकरणों के हलों के अस्तित्व और सुचारुता की समस्या (Navier–Stokes existence and smoothness problem) हल कर ली है — यह उन छह अनसुलझी मिलेनियम पुरस्कार समस्याओं (Millennium Prize Problems) में से एक है, जिनमें से प्रत्येक पर 10 लाख डॉलर का इनाम है। रिपोर्ट के अनुसार, इन अफ़वाहों से प्रेरित होकर कि उसकी प्रतिद्वंद्वी Anthropic इस लक्ष्य के क़रीब पहुँच रही है, OpenAI ने 10,000 स्वायत्त AI एजेंट और दसियों लाख डॉलर मूल्य की कंप्यूटिंग शक्ति झोंक दी और 88 घंटों में हल खोज निकाला। यह दावा अभी से विवादों में है। 7 सितंबर को न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के गणितज्ञ ट्रिस्टन बकमास्टर (Tristan Buckmaster) ने बताया कि उन्होंने और लेवेंट अल्पोगे (Levent Alpöge) ने मिलती-जुलती विधियों से, दोनों कंपनियों के मॉडलों की सहायता लेते हुए, लगभग एक वर्ष तक इस समस्या के एक सरलीकृत रूप पर काम किया था; OpenAI ने विशेष रूप से उनके डेटा तक पहुँचने से इनकार किया, पर कहा कि वह इस संभावना को “ख़ारिज नहीं कर सकता” कि उनके उपयोग से प्राप्त पहचान-रहित (de-identified) डेटा ने उसके मॉडलों को बेहतर बनाने में मदद की हो। दावों का यह सिलसिला पहले ही शुरू हो चुका था। 20 मई को OpenAI ने कहा कि उसके आंतरिक तर्क मॉडल (reasoning model) ने हंगरी के गणितज्ञ पॉल एर्डोश (Paul Erdős) द्वारा 1946 में प्रस्तुत समतलीय इकाई दूरी समस्या (planar unit distance problem) हल कर दी है। 20 जुलाई को Anthropic में कार्यरत श्री अल्पोगे ने X पर लिखा कि उसके मॉडल Claude Fable 5 ने बीजीय ज्यामिति (algebraic geometry) की 87 वर्ष पुरानी खुली समस्या, जैकोबियन अनुमान (Jacobian conjecture), का एक प्रति-उदाहरण (counterexample) खोज निकाला है — यानी ऐसा एकल उदाहरण जो किसी सामान्य दावे को असत्य सिद्ध कर देता है। 1 अगस्त को OpenAI ने कहा कि उसके नवीनतम मॉडल ‘Astra’ ने दस और खुली समस्याएँ हल कर दी हैं, जिनमें से तीन एर्डोश की सूची की हैं। गणितज्ञ इस पर बँटे हुए हैं। ब्रिस्टल के एंड्रयू बुकर (Andrew Booker) बताते हैं कि जिस समस्या पर वे लगभग दस वर्ष से अटके थे, उस पर Claude Code ने एक सप्ताह में 30,000 पंक्तियों का कोड और लगभग 200 पृष्ठों का गणित लिख डाला, और MIT के एंड्रयू सदरलैंड (Andrew Sutherland) इसे “एक रोमांचक समय” कहते हैं; फिर भी डॉ. सदरलैंड आगाह करते हैं कि AI प्रमाण मुख्य अंतर्ज्ञानात्मक क़दम को सरसरी तौर पर लाँघ जाते हैं, और डॉ. बुकर चेताते हैं कि जाँच के बिना छोड़ दिए जाएँ तो ये “पूरी तरह समझ से परे” हो सकते हैं। कोलंबिया के माइकल हैरिस (Michael Harris) और UC सैन डिएगो के कार्तिक गणपति (Karthik Ganapathy), जिन्होंने जून 2026 के कृत्रिम बुद्धिमत्ता और गणित पर लाइडन घोषणा-पत्र (Leiden Declaration on Artificial Intelligence and Mathematics) का मसौदा तैयार करने में हाथ बँटाया, कंपनियों को इस बात के लिए दोषी ठहराते हैं कि वे पद्धति बताए बिना परिणाम घोषित कर देती हैं। 29 जुलाई को OpenAI ने 1,00,000 वैज्ञानिकों, गणितज्ञों और इंजीनियरों को अपने अग्रणी मॉडलों तक मुफ़्त पहुँच की पेशकश की, पर रिपोर्ट के अनुसार भारतीय, रूसी और चीनी संस्थानों को इससे बाहर रखा — सबसे अधिक संभावना यही है कि भू-राजनीतिक तनावों के कारण। रिपोर्ट चेताती है कि अपना कोई अग्रणी मॉडल न होने से भारत को सैद्धांतिक विज्ञान में गति बनाए रखने में कठिनाई हो सकती है। पाठ्यक्रम से जुड़ाव: GS3 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में विकास, कंप्यूटर तथा प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण।
कड़ी — एक पंक्ति में: अग्रणी मॉडल तर्क करना और प्रमाणों को Lean जैसी मशीन-जाँच योग्य भाषाओं में औपचारिक रूप देना सीखते हैं → एंड्रयू बुकर जैसे गणितज्ञ उन्हें ‘शोध-छात्रों की सेना’ (grad student army) की तरह इस्तेमाल करने लगते हैं → कंपनियों में प्रसिद्ध खुली समस्याओं पर दावा ठोकने की होड़ लगती है — 20 मई को एर्डोश की इकाई दूरी समस्या से लेकर 20 जुलाई को जैकोबियन अनुमान तक → 8 सितंबर को OpenAI नेवियर–स्टोक्स मिलेनियम पुरस्कार समस्या पर दावा करता है, इस विवाद के बीच कि कहीं शोधकर्ताओं के डेटा ने तो मदद नहीं की → गणितज्ञ लाइडन घोषणा-पत्र के ज़रिए पारदर्शिता की माँग करते हैं, जबकि OpenAI की 29 जुलाई की मुफ़्त-पहुँच योजना भारतीय संस्थानों को बाहर छोड़ देती है
स्थैतिक पाठ्यक्रम से जुड़ाव
- क्ले संस्थान ने 2000 में सात समस्याओं पर 10-10 लाख डॉलर का इनाम रखा, और अब तक केवल एक हल हुई है. संयुक्त राज्य अमेरिका की एक निजी संस्था, क्ले गणित संस्थान (Clay Mathematics Institute), ने 2000 में पेरिस में सात मिलेनियम पुरस्कार समस्याओं की घोषणा की और प्रत्येक के हल के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर का इनाम रखा। ये हैं — बर्च और स्विनर्टन-डायर अनुमान, हॉज अनुमान, नेवियर–स्टोक्स अस्तित्व और सुचारुता, P बनाम NP, पॉइनकेयर अनुमान, रीमान परिकल्पना, तथा यांग–मिल्स अस्तित्व और द्रव्यमान अंतराल (mass gap)। इनमें से केवल पॉइनकेयर अनुमान हल हुआ है, जिसे रूसी गणितज्ञ ग्रिगोरी पेरेलमान (Grigori Perelman) ने 2002–03 में हल किया; उन्होंने 2006 में फ़ील्ड्स पदक (Fields Medal) और 2010 में प्रदान किया गया मिलेनियम पुरस्कार, दोनों लेने से इनकार कर दिया — इसीलिए रिपोर्ट शेष छह समस्याओं की बात करती है। संस्थान के नियमों के अनुसार कोई भी पुरस्कार देने से पहले हल का किसी मान्य मंच पर प्रकाशन, कम से कम दो वर्ष की प्रतीक्षा और गणितज्ञों के बीच उसकी सामान्य स्वीकृति आवश्यक है; अतः किसी कंपनी की घोषणा एक दावा है, पुरस्कार नहीं।
- ख़बरों में आई तीनों समस्याएँ गणित की तीन अलग-अलग शाखाओं से हैं. नेवियर–स्टोक्स समीकरण, जिनका नाम क्लॉड-लुई नेवियर (Claude-Louis Navier) और जॉर्ज गेब्रियल स्टोक्स (George Gabriel Stokes) के नाम पर पड़ा, यह बताते हैं कि वायु और जल जैसे श्यान तरल (viscous fluids) कैसे गति करते हैं, और मौसम पूर्वानुमान तथा विमान डिज़ाइन इन्हीं पर टिके हैं; पुरस्कार यह पूछता है कि इनके त्रि-आयामी हल सदा सुचारु बने रहते हैं या ‘विस्फोटित’ (blow up) हो सकते हैं। जैकोबियन अनुमान, जिसे जर्मन गणितज्ञ ओट-हाइनरिख़ केलर (Ott-Heinrich Keller) ने 1939 में प्रस्तुत किया, कहता है कि जिस बहुपद प्रतिचित्रण (polynomial map) का जैकोबियन सारणिक (Jacobian determinant) एक शून्येतर अचर हो, उसका प्रतिलोम भी अनिवार्यतः बहुपद होगा; इसलिए एक ही प्रति-उदाहरण इसे असिद्ध कर देता है। पॉल एर्डोश (1913–1996) द्वारा 1946 में प्रस्तुत समतलीय इकाई दूरी समस्या पूछती है कि किसी समतल में n बिंदुओं के बीच ठीक एक इकाई की दूरी वाले बिंदु-युग्मों की अधिकतम संख्या कितनी हो सकती है। एर्डोश ऐसी सैकड़ों समस्याएँ छोड़ गए, और इसीलिए ये AI प्रणालियों को मापने का पैमाना बन गई हैं।
- प्रमाण-सहायक यह प्रमाणित करता है कि प्रमाण सही है, यह नहीं कि कोई उसे समझता भी है. Lean जैसा प्रमाण-सहायक (proof assistant) — जिसे माइक्रोसॉफ़्ट रिसर्च में लियोनार्डो डी मौरा (Leonardo de Moura) ने 2013 से विकसित किया — यह अपेक्षा करता है कि प्रमाण एक सटीक औपचारिक भाषा में लिखा जाए, ताकि एक छोटा, विश्वसनीय प्रोग्राम उसके हर चरण की जाँच कर सके; रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान मॉडल प्रमाण तैयार भी कर सकते हैं और उन्हें इस तरह औपचारिक रूप भी दे सकते हैं। कंप्यूटर-सहायित प्रमाण कोई नई बात नहीं है: केनेथ एपल (Kenneth Appel) और वोल्फ़गांग हाकेन (Wolfgang Haken) का 1976 का चार रंग प्रमेय (Four Colour Theorem) का प्रमाण उन स्थितियों की जाँच के लिए कंप्यूटर पर निर्भर था जिन्हें कोई मनुष्य नहीं जाँच सकता था, और 2005 में जॉर्ज गोंतिए (Georges Gonthier) ने Coq प्रमाण-सहायक में इसका सत्यापन किया। उस इतिहास का सबक यह है कि मशीनें यह तय कर सकती हैं कि कोई परिणाम सत्य है या नहीं, पर वह सत्य क्यों है — इसकी समझ अब भी मनुष्यों को ही गढ़नी पड़ती है।
- भारत ने IndiaAI मिशन के तहत साझा कंप्यूट तो खड़ा किया है, पर कोई अग्रणी मॉडल नहीं. अग्रणी मॉडल क्षमता की अग्रिम पंक्ति पर खड़ा एक सामान्य-उद्देश्यीय AI मॉडल होता है, जिसे अत्यधिक कंप्यूटिंग शक्ति और डेटा से प्रशिक्षित किया जाता है; यह शब्द नवंबर 2023 के ब्लेचली घोषणा-पत्र (Bletchley Declaration) में प्रयुक्त हुआ था, जिस पर भारत ने हस्ताक्षर किए। PIB के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7 मार्च, 2024 को ₹10,371.92 करोड़ के परिव्यय के साथ IndiaAI मिशन को मंज़ूरी दी, जिसे डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के अधीन IndiaAI स्वतंत्र व्यावसायिक प्रभाग (IndiaAI Independent Business Division) लागू करता है; इसके सात स्तंभ हैं, जिनमें कंप्यूट क्षमता, स्वदेशी मॉडलों के लिए एक नवाचार केंद्र, और सुरक्षित व विश्वसनीय AI शामिल हैं। इसका लक्ष्य 10,000 या उससे अधिक GPU — AI को प्रशिक्षित करने और चलाने में प्रयुक्त चिप — का था; PIB की 25 मार्च, 2026 की विज्ञप्ति कहती है कि स्टार्टअप और शैक्षणिक जगत के लिए किफ़ायती दरों पर 38,000 से अधिक GPU जोड़े जा चुके हैं। साझा कंप्यूट मॉडलों के उपयोग की लागत घटाता है, पर अग्रिम पंक्ति का मॉडल प्रशिक्षित करने के लिए कहीं बड़े और केंद्रित निवेश की आवश्यकता होती है।
UPSC इसे क्यों पूछता है
- GS3 पाठ्यक्रम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में विकास और उनके प्रभावों के बारे में पूछता है. GS3 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में विकास और दैनिक जीवन पर उनके प्रभाव, सूचना प्रौद्योगिकी और कंप्यूटर के क्षेत्र में जागरूकता, तथा प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण सूचीबद्ध हैं। प्रारंभिक परीक्षा 2020 में पूछा गया था कि विकास की वर्तमान अवस्था में AI प्रभावी रूप से क्या-क्या कर सकता है, और मुख्य परीक्षा 2023 में पूछा गया कि AI नैदानिक निदान (clinical diagnosis) में कैसे सहायक है और क्या इससे निजता को ख़तरा है। यह ख़बर प्रश्न को इस ओर ले जाती है कि AI ज्ञान के उत्पादन और उसके प्रमाणन के तरीक़े को कैसे बदल रहा है।
- अग्रणी AI तक पहुँच इस पत्रिका में लगातार चलने वाला सूत्र है. 22 सितंबर के कार्ड में यह माँग दर्ज थी कि भारत सुरक्षा-परीक्षण के लिए अग्रणी मॉडलों तक शुरुआती पहुँच सुनिश्चित करे, और 23 सितंबर के कार्ड में शी–ट्रंप AI संवाद की चर्चा थी। आज का कार्ड इसमें विज्ञान का पहलू जोड़ता है: अब किसी कंपनी की पहुँच-सूची यह तय करती है कि बुनियादी अनुसंधान में कौन प्रतिस्पर्धा कर सकता है — यह बात प्रौद्योगिकी कूटनीति पर GS2 के उत्तरों और स्वदेशीकरण पर GS3 के उत्तरों, दोनों में काम आती है।
प्रीलिम्स तथ्य
- मिलेनियम पुरस्कार समस्याओं की घोषणा क्ले गणित संस्थान ने 2000 में की थी, जिसमें सातों समस्याओं में से प्रत्येक के हल के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर का पुरस्कार रखा गया।
- पॉइनकेयर अनुमान अब तक हल हुई एकमात्र मिलेनियम पुरस्कार समस्या है; इसे सिद्ध करने वाले ग्रिगोरी पेरेलमान ने फ़ील्ड्स पदक (2006) और मिलेनियम पुरस्कार (2010), दोनों को अस्वीकार कर दिया।
- नेवियर–स्टोक्स समीकरण श्यान तरलों की गति का वर्णन करते हैं, और इनसे जुड़ी मिलेनियम पुरस्कार समस्या त्रि-आयामी स्थिति में इनके हलों के अस्तित्व और सुचारुता से संबंधित है।
- फ़ील्ड्स पदक अंतरराष्ट्रीय गणितीय संघ (International Mathematical Union) द्वारा हर चार वर्ष में अंतरराष्ट्रीय गणितज्ञ कांग्रेस (International Congress of Mathematicians) में 40 वर्ष से कम आयु के गणितज्ञों को प्रदान किया जाता है।
- Lean एक अंतःक्रियात्मक प्रमेय-सिद्धक (interactive theorem prover) या प्रमाण-सहायक है, जिसमें औपचारिक भाषा में लिखे गए प्रमाण की कंप्यूटर द्वारा चरण-दर-चरण जाँच की जाती है।
- मार्च 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ₹10,371.92 करोड़ के परिव्यय के साथ मंज़ूर IndiaAI मिशन को इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के अधीन IndiaAI स्वतंत्र व्यावसायिक प्रभाग लागू करता है।
- भारत प्रक्षेपास्त्र प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (Missile Technology Control Regime — 2016), वासेनार व्यवस्था (Wassenaar Arrangement — 2017) और ऑस्ट्रेलिया समूह (Australia Group — 2018) का सदस्य है, परंतु परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (Nuclear Suppliers Group) का नहीं।
विश्लेषण
- जब तक इसका सत्यापन न हो और इसे समझा न जाए, नेवियर–स्टोक्स परिणाम एक कॉरपोरेट दावा है, प्रमेय नहीं. रिपोर्ट कहती है कि OpenAI ने हल की ‘घोषणा’ की है; वह यह नहीं कहती कि प्रमाण का औपचारिक सत्यापन हुआ है, उसकी विशेषज्ञ समीक्षा (refereeing) हुई है या वह प्रकाशित हुआ है। क्ले संस्थान के नियम प्रकाशन, दो वर्ष की प्रतीक्षा और सामान्य स्वीकृति की माँग ठीक इसीलिए करते हैं कि प्रसिद्ध समस्याएँ त्रुटिपूर्ण प्रमाणों को आकर्षित करती हैं। Lean में औपचारिकीकरण शुद्धता का प्रश्न तो सुलझा देगा, पर रिपोर्ट में उद्धृत गणितज्ञ कहते हैं कि AI प्रमाण सबसे कठिन चरणों को लाँघ जाते हैं और गढ़ी हुई शब्दावली में भटक जाते हैं, इसलिए मानवीय जाँच में वर्षों लग सकते हैं। प्रतिपक्ष भी वास्तविक है: एर्डोश की इकाई दूरी समस्या के हल की जाँच करने वाले विशेषज्ञों ने उसे किसी शीर्ष पत्रिका के योग्य माना, अतः ये प्रणालियाँ निरर्थक शोर पैदा नहीं कर रहीं। सही रुख़ न ख़ारिज करना है, न जश्न मनाना, बल्कि ‘घोषित’, ‘सत्यापित’ और ‘स्वीकृत’ के बीच एक स्पष्ट रेखा खींचना है।
- प्रॉम्प्ट और पद्धति पर गोपनीयता उस मानदंड को तोड़ती है जो विज्ञान को स्वयं को सुधारने लायक बनाता है. विज्ञान स्वयं को इसलिए सुधार पाता है कि दूसरे लोग उसकी पद्धति को दोहरा सकते हैं, न कि केवल उत्तर की सराहना कर सकते हैं। हार्वर्ड की नीना ज़ुब्रिलिना (Nina Zubrilina) प्रॉम्प्ट सार्वजनिक करने की माँग करती हैं और ‘जान-बूझकर रचे गए रहस्यवाद’ (intentional mysticism) पर आपत्ति करती हैं; इनके बिना कोई नहीं बता सकता कि कितना काम मॉडल ने किया और कितना कंपनी के अपने विशेषज्ञ गणितज्ञों ने। माइकल हैरिस की यह व्याख्या कि कंपनियाँ कृत्रिम सामान्य बुद्धि (artificial general intelligence) की ओर प्रगति का संकेत देने और निवेशकों को प्रसन्न करने के लिए गणित के पीछे भाग रही हैं, इस प्रोत्साहन को स्पष्ट करती है: सुर्ख़ी ही उत्पाद है। प्रतिपक्ष यह है कि कंपनियों ने इतना कंप्यूट ख़र्च किया है जितना कोई विश्वविद्यालय वहन नहीं कर सकता, और प्रकाशित उत्तर फिर भी जाँच-परख को आमंत्रित करते हैं; लाइडन घोषणा-पत्र दिखाता है कि गणितज्ञ समुदाय इन उपकरणों को ठुकरा नहीं रहा, बल्कि उनके उपयोग की शर्तें तय कर रहा है।
- बकमास्टर प्रकरण चेताता है कि शोधकर्ताओं के अप्रकाशित विचार प्रशिक्षण डेटा बन सकते हैं. ट्रिस्टन बकमास्टर और लेवेंट अल्पोगे ने दोनों कंपनियों के उपकरणों की मदद से नेवियर–स्टोक्स की एक सरलीकृत समस्या पर एक वर्ष तक काम किया, और OpenAI इस संभावना को ‘ख़ारिज नहीं कर सकता’ कि उनके पहचान-रहित उपयोग-डेटा ने उसके मॉडलों को बेहतर बनाया। इस तरह अप्रकाशित काम पर किसी वाणिज्यिक मॉडल का उपयोग करने वाला शोधकर्ता एक ऐसी प्रणाली को सामग्री दे रहा हो सकता है जिसे उसका स्वामी उसी समस्या पर लगा सकता है। पहचान-रहित करना व्यक्ति की रक्षा करता है, विचार की नहीं, और भारत के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (Digital Personal Data Protection Act, 2023) के तहत कोई शोध-विचार ‘व्यक्तिगत डेटा’ नहीं है। इसलिए विश्वविद्यालयों और वित्तपोषकों को अप्रकाशित काम में AI के उपयोग पर, और अनुबंध के ज़रिए मॉडल-प्रशिक्षण से बाहर रहने (opt-out) के विकल्प पर, अपने नियम बनाने होंगे। प्रतिपक्ष यह है कि उपयोग-डेटा सभी के लिए उपकरणों को बेहतर बनाता है; पर खोज की प्राथमिकता (priority) और श्रेय ही अकादमिक करियर की मुद्रा हैं, और वे संरक्षण के हक़दार हैं।
- भारतीय संस्थानों का बहिष्कार दिखाता है कि अब केवल स्वामित्व ही नहीं, पहुँच भी शक्ति का साधन है. रिपोर्ट भारतीय संस्थानों को रूसी और चीनी संस्थानों के साथ एक ही श्रेणी में रखती है और 29 जुलाई के बहिष्कार का कारण ‘सबसे अधिक संभावना’ के रूप में भू-राजनीतिक तनावों को बताती है; कोई औपचारिक कारण नहीं दिया गया है। यह पैटर्न जाना-पहचाना है: जनवरी 2025 के एक अमेरिकी AI प्रसार नियम (AI diffusion rule) ने भारत को देशों की उस मध्य श्रेणी में रखा था जिस पर उन्नत चिपों की सीमा लगी थी, और फिर मई 2025 में उसे रद्द कर दिया गया। किसी कंपनी की पहुँच-सूची कानूनन निर्यात नियंत्रण नहीं है, पर किसी भारतीय डॉक्टरेट छात्र पर उसका असर वैसा ही होता है। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट है कि फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में देशों से आग्रह किया कि वे महाशक्तियों से स्वतंत्र एक मुक्त-स्रोत (open-source) अग्रणी मॉडल में मिलकर निवेश करें — किसी मध्यम शक्ति के लिए यह एक रास्ता है। प्रतिपक्ष यह है कि सशुल्क और मुक्त मॉडल उपलब्ध हैं, इसलिए यह बहिष्कार एक लागत है, दीवार नहीं; पर जहाँ, डॉ. बुकर के अनुभव में, दो सप्ताह की AI सहायता पाँच वर्ष के प्रयास पर भारी पड़ी, वहाँ यही लागत तय कर देती है कि पहले कौन पहुँचेगा।
- यदि मॉडल-पहुँच को अनुसंधान अवसंरचना नहीं माना गया, तो सैद्धांतिक विज्ञान में भारत की बढ़त घिसती जाएगी. रिपोर्ट याद दिलाती है कि कभी सैद्धांतिक विज्ञानों में भारत को बढ़त हासिल थी — एक ऐसी बढ़त जो महँगी प्रयोगशालाओं पर नहीं, बल्कि प्रतिभा और सीमित संसाधनों पर टिकी थी। यदि कोई मॉडल ‘शोध-छात्रों की सेना’ है, तो अब किसी गणितज्ञ का उत्पादन जितना उसके प्रशिक्षण पर निर्भर है, उतना ही कंप्यूट और मॉडलों तक उसकी पहुँच पर भी। IndiaAI मिशन के GPU शैक्षणिक जगत के लिए खुले हैं, पर सैद्धांतिक विभाग शायद ही कभी ऐसे संसाधनों के लिए होड़ करते हैं, और 2023 के एक अधिनियम के तहत गठित अनुसंधान नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (Anusandhan National Research Foundation — ANRF) बुनियादी अनुसंधान के लिए मॉडल-पहुँच अलग से निर्धारित कर सकता है। जैसा डॉ. सदरलैंड सुझाते हैं, प्रशिक्षण को भी केवल समस्या-समाधान से हटाकर व्याख्या (exposition), औपचारिकीकरण और विवेक की ओर मोड़ना होगा। प्रतिपक्ष उनका यह आश्वासन है कि गणित कभी ‘पूरी तरह हल’ नहीं होगा; फिर भी रिपोर्ट का यह उल्लेख कि 2026 के फ़ील्ड्स पदक विजेता जैकब त्सिमरमैन (Jacob Tsimerman) ने शोध-छात्र लेना बंद कर दिया है, दिखाता है कि यह क्षेत्र इस जोखिम को कितनी गंभीरता से ले रहा है।
संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न
“कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियाँ उन समस्याओं को हल करने लगी हैं जिनके पीछे गणितज्ञ दशकों तक लगे रहे, पर वे किन शर्तों पर ऐसा करती हैं, यह मुट्ठी भर निगम तय करते हैं।” विज्ञान के व्यवहार के लिए इससे उत्पन्न अवसरों और जोखिमों की चर्चा कीजिए। यह सुनिश्चित करने के लिए भारत को क्या करना चाहिए कि उसके शोधकर्ता अग्रणी AI तक पहुँच में पीछे न छूट जाएँ? (15 अंक, 250 शब्द)
उत्तर की रूपरेखा
- भूमिका. OpenAI के 8 सितंबर के नेवियर–स्टोक्स मिलेनियम पुरस्कार समस्या वाले दावे, 87 वर्ष पुराने जैकोबियन अनुमान के 20 जुलाई के प्रति-उदाहरण और 20 मई के एर्डोश परिणाम से आरंभ कीजिए, और स्पष्ट कीजिए कि ये सत्यापन की प्रतीक्षा कर रहे घोषित दावे हैं।
- मुख्य भाग — अवसर. लाभ समझाइए: गति (बुकर के मामले में एक सप्ताह में 30,000 पंक्तियों का कोड और लगभग 200 पृष्ठों का गणित), Lean जैसे प्रमाण-सहायकों में मशीन-जाँच योग्य औपचारिकीकरण, और साहित्य के एक-दूसरे से दूर पड़े क्षेत्रों में खोज।
- मुख्य भाग — विज्ञान के लिए जोखिम. समझ से परे प्रमाणों और ‘प्रमाण-अपच’ (proof indigestion), प्रॉम्प्ट पर गोपनीयता, बकमास्टर डेटा-उपयोग विवाद, माइकल हैरिस द्वारा बताए गए वाणिज्यिक उद्देश्यों तथा करियर में उथल-पुथल की चर्चा कीजिए, और जून 2026 के लाइडन घोषणा-पत्र को समुदाय द्वारा मानदंड तय करने की प्रतिक्रिया के रूप में प्रस्तुत कीजिए।
- मुख्य भाग — भारत की प्रतिक्रिया. 29 जुलाई के बहिष्कार और किसी भारतीय अग्रणी मॉडल के अभाव का उल्लेख कीजिए; IndiaAI मिशन के ₹10,371.92 करोड़ और 38,000 से अधिक GPU का ब्योरा दीजिए, फिर ANRF के माध्यम से बुनियादी अनुसंधान के लिए निर्धारित मॉडल-पहुँच, संस्थागत AI-उपयोग नीतियों, स्वदेशी तर्क मॉडलों को सहायता, और मुक्त मॉडलों के लिए गठबंधनों का प्रस्ताव कीजिए।
- निष्कर्ष. निष्कर्ष दीजिए कि अग्रणी AI तक पहुँच अब किसी दूरबीन या सुपरकंप्यूटर की तरह अनुसंधान अवसंरचना है, और भारत को इसे सुनिश्चित भी करना होगा तथा ऐसे वैज्ञानिक भी तैयार करने होंगे जो मशीन-निर्मित परिणामों का सत्यापन और उनकी व्याख्या कर सकें।
प्रशासक की दृष्टि
आप MeitY के सचिव हैं। वरिष्ठ गणितज्ञ लिखते हैं कि भारतीय संस्थानों को एक विदेशी कंपनी के मुफ़्त अग्रणी-मॉडल कार्यक्रम से बाहर रखा गया है। आप क्या करेंगे?
सबसे पहले मैं कंपनी से तथ्यों की पुष्टि करूँगा, क्योंकि रिपोर्ट बहिष्कार का कारण केवल ‘सबसे अधिक संभावना’ के रूप में भू-राजनीति को बताती है, और यदि यह किसी नीति का परिणाम है तो इसे कूटनीतिक स्तर पर उठाऊँगा। साथ ही, मैं IndiaAI कंप्यूट पोर्टल पर बुनियादी विज्ञान विभागों के लिए एक समर्पित खिड़की खोलूँगा, जिसमें आवेदन सरल हों और उपलब्ध मॉडलों के लिए क्रेडिट मिलें। मैं IndiaAI नवाचार केंद्र से यह भी कहूँगा कि वह जिन स्वदेशी मॉडलों को सहायता देता है, उनमें गणितीय तर्क को प्राथमिकता दे। दीर्घकालिक उत्तर निर्भरता घटाना है; तात्कालिक कर्तव्य यह है कि शोधकर्ताओं का काम न रुके।
कुलपति के रूप में आपको पता चलता है कि एक डॉक्टरेट शोध-प्रबंध का केंद्रीय प्रमाण बड़े पैमाने पर एक AI मॉडल ने तैयार किया है। आप इसे कैसे सँभालेंगे?
AI का उपयोग अपने-आप में कदाचार नहीं है, पर मैं UGC के 2018 के अकादमिक सत्यनिष्ठा संबंधी विनियमों की भावना के अनुरूप प्रयुक्त उपकरणों, प्रॉम्प्ट और मशीन के योगदान की सीमा का पूरा प्रकटीकरण अनिवार्य करूँगा। मौखिकी (viva) में यह परखा जाना चाहिए कि अभ्यर्थी समझता है या नहीं कि प्रमाण काम क्यों करता है, और इसके समर्थन में औपचारिक सत्यापन या मनुष्य के पढ़ने योग्य स्पष्ट व्याख्या होनी चाहिए। डॉक्टरेट अभ्यर्थी के अपने योगदान को पुरस्कृत करती है, जो परिणाम की रूपरेखा बनाने और उसे समझाने में भी हो सकता है। इसके बाद मैं अकादमिक परिषद से एक नीति लिखवाऊँगा, ताकि आगे के मामले नियमों के अनुसार निपटें।
साक्षात्कार बोर्ड पूछता है: क्या भारतीय वैज्ञानिकों को अप्रकाशित या संवेदनशील अनुसंधान पर विदेशी AI मॉडलों के उपयोग से रोक दिया जाना चाहिए?
पूर्ण प्रतिबंध भारतीय विज्ञान की रक्षा कम करेगा और उसे नुक़सान अधिक पहुँचाएगा, क्योंकि ये उपकरण अब शोधकर्ता के उत्पादन को कई गुना बढ़ा देते हैं। समझदारी भरी रेखा जोखिम-आधारित है: सामरिक दृष्टि से संवेदनशील काम सुरक्षित, और अधिमानतः घरेलू, अवसंरचना पर चले, जबकि खुला अनुसंधान अनुबंध में प्रशिक्षण से बाहर रहने की शर्त के साथ विदेशी उपकरणों का उपयोग कर सकता है। बकमास्टर प्रकरण दिखाता है कि खुले अनुसंधान में भी खोज की प्राथमिकता का जोखिम रहता है, इसलिए शोधकर्ताओं को जानना चाहिए कि सेवा की शर्तें क्या अनुमति देती हैं। लक्ष्य सूचित उपयोग है, भयभीत परहेज़ नहीं।