UPSC Darpan

4. अंतरराष्ट्रीय संबंध (International Relations)GS25 October 2026

बोगीबील से ढाका: डिब्रूगढ़ से किसी विदेशी बंदरगाह के लिए भारत की पहली जलमार्ग खेप

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ख़बर

डिब्रूगढ़, 5 अक्टूबर। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की 4 अक्टूबर की विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल सोमवार सुबह 11 बजे डिब्रूगढ़ के बोगीबील टर्मिनल से पहली अंतरराष्ट्रीय खेप को हरी झंडी दिखाएँगे। खेप मेथनॉल की है, जो प्लास्टिक और ईंधन में प्रयुक्त औद्योगिक रसायन है; इसे असम पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड भेज रही है और गंतव्य ढाका के पास पंगाँव बंदरगाह है। यह राष्ट्रीय जलमार्ग-2 यानी ब्रह्मपुत्र और भारत–बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग से जाएगी, जो नदी के वे हिस्से हैं जिन्हें दोनों देशों ने एक-दूसरे के व्यापार के लिए खोलना स्वीकार किया है। विज्ञप्ति के अनुसार स्वतंत्रता के बाद पहली बार डिब्रूगढ़ से किसी विदेशी बंदरगाह तक माल जलमार्ग से जा रहा है। उसमें मात्रा, भाड़े की दर या आगे की यात्राओं के कार्यक्रम का कोई ज़िक्र नहीं है।

कड़ी — एक पंक्ति में: 1947 के विभाजन से पूर्वी बंगाल होकर असम के नदी-संपर्क कटे → 1972 का प्रोटोकॉल भारत-बांग्लादेश नदी-व्यापार की अनुमति देता है → ब्रह्मपुत्र राष्ट्रीय जलमार्ग बना, बोगीबील में टर्मिनल → असम पेट्रोकेमिकल्स ने मेथनॉल लादा → डिब्रूगढ़ से किसी विदेशी बंदरगाह की पहली खेप रवाना

स्थैतिक पाठ्यक्रम से जुड़ाव

  1. राष्ट्रीय जलमार्ग संसद घोषित करती है, राज्य नहीं. संघ सूची की प्रविष्टि 24 संसद को विधि द्वारा राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित अंतर्देशीय जलमार्गों पर पोत-परिवहन और नौवहन के बारे में शक्ति देती है। राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 (National Waterways Act, 2016) ने 111 जलमार्गों को राष्ट्रीय घोषित किया। राष्ट्रीय जलमार्ग-2 असम में धुबरी से सादिया तक ब्रह्मपुत्र है, जिसकी लंबाई लगभग 891 किमी है।
  2. IWAI जलमार्ग विकसित करता है और 1972 का प्रोटोकॉल उन्हें बांग्लादेश के लिए खोलता है. भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन वैधानिक निकाय है, जिसे राष्ट्रीय जलमार्गों के निर्माण और विनियमन के लिए IWAI अधिनियम, 1985 से स्थापित किया गया। 1972 में हस्ताक्षरित अंतर्देशीय जल पारगमन एवं व्यापार प्रोटोकॉल (Protocol on Inland Water Transit and Trade) हर देश के जहाज़ों को दूसरे देश के निर्दिष्ट नदी-मार्गों पर माल ढोने देता है।

UPSC इसे क्यों पूछता है

  1. GS2 और GS3 दोनों में पड़ोस की संपर्कता और परिवहन पर प्रश्न आते हैं. GS2 की पंक्ति है “भारत एवं उसके पड़ोसी — संबंध”; GS3 में “अवसंरचना: बंदरगाह, सड़कें, रेलवे” आता है। परीक्षक पूछ सकता है कि जलमार्ग स्थल-रुद्ध पूर्वोत्तर को बाज़ारों तक पहुँचने में कैसे मदद करते हैं।

प्रीलिम्स तथ्य

  • राष्ट्रीय जलमार्ग-1 प्रयागराज से हल्दिया तक गंगा है; राष्ट्रीय जलमार्ग-2 धुबरी से सादिया तक ब्रह्मपुत्र है।
  • राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 ने 111 राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किए।
  • भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण 1985 के अधिनियम से बना।
  • संघ सूची की प्रविष्टि 24 राष्ट्रीय जलमार्गों पर पोत-परिवहन और नौवहन से संबंधित है।

विश्लेषण

  1. जलमार्ग तभी गलियारा बनता है जब माल दोनों दिशाओं में चले. एक खेप यह साबित करती है कि मार्ग का उपयोग हो सकता है, यह नहीं कि वह लाभकारी है। बजरे तब कमाते हैं जब दोनों ओर का भाड़ा मिले और बंदरगाह, ड्रेजिंग तथा सीमा-शुल्क निकासी भरोसेमंद हों। विज्ञप्ति नियमित सेवा के बारे में कुछ नहीं कहती।
  2. यह मार्ग पूर्वोत्तर को एक सड़क से आगे निकलने का रास्ता देता है. असम का माल लंबे समय से शेष भारत से जोड़ने वाले एक संकरे स्थल-मार्ग पर निर्भर रहा है। ढाका तक का नदी-मार्ग बाज़ार और समुद्र तक दूसरा रास्ता खोलता है। लाभ पड़ोसी की सद्भावना पर टिका है, इसलिए यह पूर्वोत्तर को ढाका की राजनीति से भी बाँध देता है।
  3. दृष्टि — तात्कालिक राहत और दीर्घकालिक सुधार: हरी झंडी दिखाना आसान है, चालू गलियारा एक दशक का रखरखाव है. समारोह एक संकेत है, लेकिन ब्रह्मपुत्र अपनी धारा बदलती है और गाद भरती है, इसलिए हर मौसम में गहराई की ड्रेजिंग करनी पड़ती है। समझदार अधिकारी परियोजना को एक साल बाद दोबारा होने वाली यात्राओं और माल की मात्रा से आँकेगा और जलधारा के रखरखाव के लिए बजट में स्थायी मद रखेगा।

संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न

परीक्षण कीजिए कि अंतर्देशीय जलमार्ग बांग्लादेश के साथ भारत की संपर्कता और पूर्वोत्तर के विकास को कैसे सुदृढ़ कर सकते हैं। (10 अंक, 150 शब्द)

उत्तर की रूपरेखा

  1. निर्देश — परीक्षण कीजिए. लाभ और सीमाएँ दिखाइए और एक निर्णय पर पहुँचिए।
  2. भूमिका — पहली खेप एक पुराना मार्ग खोलती है. NW-2 पर डिब्रूगढ़–ढाका की खेप दिखाती है कि जलमार्ग असम को बांग्लादेश से जोड़ सकते हैं।
  3. मुख्य भाग — सड़क से सस्ता, हरित और कम भीड़भाड़ वाला. प्रति टन कम लागत, संकरे स्थल-मार्ग को राहत और असम के उद्योग के लिए नया बाज़ार।
  4. मुख्य भाग — इसके लिए ड्रेजिंग, टर्मिनल और भरोसा चाहिए. जलधारा की गहराई, वापसी का माल और सीमा-शुल्क सुविधा सफलता तय करते हैं; बोगीबील–धुबरी–पंगाँव मार्ग का आरेख बनाइए।
  5. निष्कर्ष — समारोह नहीं, तंत्र बनाइए. नियमित यात्राएँ और रखरखाव प्रतीकात्मक पहल को व्यापारिक गलियारे में बदलेंगे।

प्रशासक की दृष्टि

डिब्रूगढ़ के कलेक्टर के रूप में आप कैसे सुनिश्चित करेंगे कि हरी झंडी के बाद स्थानीय व्यापारी सचमुच बोगीबील टर्मिनल का उपयोग करें?

मैं ज़िला उद्योग केंद्र, निर्यातकों, सीमा-शुल्क विभाग और टर्मिनल संचालक को साथ बुलाऊँगा और उन अड़चनों की सूची बनाऊँगा जो किसी व्यापारी को बजरा बुक करने से रोकती हैं, जैसे कागज़ी कार्रवाई, भंडारण या लागत। मैं एक संपर्क-बिंदु और तय यात्रा-कार्यक्रम माँगूँगा ताकि छोटे निर्यातक योजना बना सकें। मैं IWAI के साथ हर महीने यात्राओं और माल की समीक्षा करूँगा और टर्मिनल तक सड़क-संपर्क के बारे में राज्य को लिखूँगा। जो टर्मिनल केवल एक रसायन कंपनी के काम आए, उससे वही कंपनी लाभान्वित होती है, ज़िला नहीं।