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6. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology)GS312 October 2026

भारत–फ़्रांस का तीसरा उपग्रह TRISHNA 12–16 महीनों में प्रक्षेपित होगा, जल-तनाव का मानचित्र बनाएगा

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ख़बर

बेंगलुरु। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, इसरो के यू.आर. राव उपग्रह केंद्र के निदेशक (परियोजनाएँ) जसविंदर सिंह खोराल ने रविवार को “TRISHNA वाटर फ़ॉर टुमॉरो” कार्यशाला में बताया कि TRISHNA (Thermal Infra-Red Imaging Satellite for High-resolution Natural Resource Assessment) अगले 12-16 महीनों में प्रक्षेपित किया जाएगा। मेघा-ट्रॉपिक्स और सरल के बाद यह भारत और फ़्रांस का इसरो तथा फ़्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी CNES के साथ मिलकर विकसित किया गया तीसरा उपग्रह है। इस मुक़ाम तक पहुँचने में परियोजना को “लगभग एक दशक” लगा। इसरो के अनुसार CNES तापीय अवरक्त (थर्मल इन्फ्रारेड) उपकरण देता है और इसरो दृश्य तथा लघु-तरंग अवरक्त उपकरण; ज़मीन पर इसका विभेदन 57 मीटर है और यह 761 किमी की सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा से काम करेगा। यह कैसे काम करता है: हर सतह ऊष्मा को अवरक्त प्रकाश के रूप में छोड़ती है; उसे पढ़ने से भू-सतह का तापमान मिलता है। अच्छी तरह सींची गई फ़सल वाष्पोत्सर्जन (evapotranspiration) से पानी गँवाने के कारण ठंडी रहती है, जबकि प्यासी फ़सल गर्म हो जाती है। इसलिए तापमान का नक्शा जल-तनाव का नक्शा बन जाता है।

प्रीलिम्स तथ्य

  • मेघा-ट्रॉपिक्स (2011) ने उष्णकटिबंधीय जल-चक्र का अध्ययन किया और सरल (2013) में ARGOS आँकड़ा-प्रसारण प्रणाली तथा ALTIKA अल्टीमीटर लगे थे; दोनों इसरो–CNES के मिशन हैं।
  • CNES (Centre National d’Études Spatiales) फ़्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी है।
  • सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा किसी भी स्थान के ऊपर से हर बार एक ही स्थानीय सौर समय पर गुज़रती है, जिससे अलग-अलग चित्रों में प्रकाश की स्थिति तुलनीय रहती है।