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8. समाज (Society)GS113 October 2026

2050 तक भारत में बुज़ुर्ग 34.7 करोड़ होंगे, उधर केरलम देखभालकर्ताओं को प्रमाणित करने की ओर

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ख़बर

तिरुवनंतपुरम, 12 अक्टूबर। केरलम 13 अक्टूबर को वरिष्ठ नागरिक (देखभाल एवं संरक्षण) विधेयक, 2026 [Senior Citizens (Care and Protection) Bill, 2026] पेश करने जा रहा है। इसमें वृद्ध-देखभाल केंद्रों का पंजीकरण और विनियमन, एक राज्य वरिष्ठ नागरिक संरक्षण इकाई और हर ज़िले में संरक्षण मंच की स्थापना, देखभालकर्ताओं के लिए “केरलम जेरिएट्रिक केयर सर्टिफ़िकेशन फ़्रेमवर्क” का निर्माण और “देखभालकर्ताओं के राज्य रजिस्टर” का प्रस्ताव है। यह सब ‘एजिंग इन प्लेस’ (घर में ही बुढ़ापा बिताने) के सिद्धांत पर आधारित है। द हिंदू में पूर्व LIC अधिकारी टी.सी. सुसील कुमार और आर. सुधाकर 1.5 लाख प्रशिक्षुओं को ऊँट के मुँह में जीरा बताते हैं: उनके आँकड़ों के अनुसार भारत की 60 वर्ष से अधिक आयु की आबादी, जो 2022 में लगभग 14.9 करोड़ थी, 2050 तक 34.7 करोड़ हो जाएगी। उनके द्वारा उद्धृत NSO के आँकड़े बताते हैं कि महिलाएँ अवैतनिक घरेलू और देखभाल कार्य में प्रतिदिन 299 मिनट लगाती हैं, जबकि पुरुष 97 मिनट।

प्रीलिम्स तथ्य

  • माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 (Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007) माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को भरण-पोषण अधिकरणों के माध्यम से अपनी संतान या उत्तराधिकारियों से प्रतिमाह ₹10,000 तक भरण-पोषण पाने का अधिकार देता है।
  • अनुच्छेद 41, जो एक नीति निदेशक तत्व है, राज्य से अपेक्षा करता है कि वह वृद्धावस्था, बीमारी और अशक्तता की दशा में लोक सहायता की व्यवस्था करे।
  • वृद्धजनों की स्वास्थ्य सेवा का राष्ट्रीय कार्यक्रम (National Programme for Health Care of the Elderly, NPHCE) 2010-11 में शुरू हुआ था।