3. कृषि एवं खाद्य (Agriculture & Food)GS314 October 2026
बिहार ने सब्सिडी वाले उर्वरक के विक्रेताओं को किसानों से ज़बरदस्ती गैर-सब्सिडी उत्पाद ख़रीदवाने से रोका
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ख़बर
नई दिल्ली। द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार बिहार भी महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की तरह उन कंपनियों द्वारा गैर-सब्सिडी उर्वरकों की बिक्री पर रोक लगा रहा है जो यूरिया, डाई-अमोनियम फ़ॉस्फ़ेट (DAP), NPK मिश्रित उर्वरक और म्यूरेट ऑफ़ पोटाश जैसे सब्सिडी वाले उत्पाद आपूर्ति करती हैं। उद्देश्य “टैगिंग” को रोकना है, जिसमें डीलर या आपूर्तिकर्ता किसान को सब्सिडी वाला उर्वरक देने की शर्त के रूप में गैर-सब्सिडी उत्पाद ख़रीदने को बाध्य करते हैं। उत्तर प्रदेश में यह प्रतिबंध 1 जनवरी 2026 से लागू हुआ। 9 अक्टूबर के एक संयुक्त पत्र में प्रमुख उर्वरक कंपनियों ने बिहार से अपने आदेश की समीक्षा करने को कहा, यह तर्क देते हुए कि इससे किसानों की नए पोषक तत्वों तक पहुँच घट सकती है और बिहार की मिट्टी में जैविक कार्बन कम होने के कारण संतुलित पोषण महत्वपूर्ण है। उद्योग के अनुमान से मार्जिन का नुक़सान ₹120 करोड़ तक हो सकता है।
प्रीलिम्स तथ्य
- उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 [Fertiliser (Control) Order] आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 के अंतर्गत जारी होता है; यह उर्वरकों की बिक्री, गुणवत्ता और डीलरों के पंजीकरण को विनियमित करता है।
- यूरिया वैधानिक रूप से अधिसूचित अधिकतम खुदरा मूल्य पर बिकता है; केंद्र निर्माताओं को लागत और उस मूल्य के अंतर का भुगतान करता है।
- 2010 से DAP और MOP जैसे P&K उर्वरकों को पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना (Nutrient Based Subsidy) के अंतर्गत पोषक तत्वों (N, P, K, S) पर प्रति किलो निश्चित सब्सिडी मिलती है।