1. राजव्यवस्था एवं शासन (Polity & Governance)GS214 October 2026
मद्रास उच्च न्यायालय ने छह इस्तीफ़ों को स्वीकार करने के अध्यक्ष के निर्णय को सही ठहराया, दल-बदल याचिकाओं का दो माह में निपटारा करने का आदेश दिया
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ख़बर
चेन्नई। मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को तमिलनाडु के अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर द्वारा AIADMK के छह विधायकों के इस्तीफ़े स्वीकार करने के निर्णय को सही ठहराया; ये विधायक 26 मई से 29 जून 2026 के बीच इस्तीफ़ा देकर बाद में सत्तारूढ़ TVK में शामिल हो गए थे। परंतु मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने उन्हें निर्देश दिया कि इनमें से चार के विरुद्ध अयोग्यता की कार्यवाही दो माह के भीतर निपटाएँ; इनमें दो उन्हीं सीटों से दोबारा चुने जा चुके हैं। यह कार्यवाही चार माह से नोटिस के चरण पर ही अटकी थी। अध्यक्ष को सात दिन में समय-सारणी प्रकाशित करनी होगी और दो से अधिक स्थगन नहीं देने होंगे। पीठ ने कहा कि वे “अपनी व्यक्तिगत पसंद-नापसंद से ऊपर उठने और पद की गरिमा का सम्मान करने के लिए बाध्य” हैं।
प्रीलिम्स तथ्य
- दसवीं अनुसूची 52वें संशोधन, 1985 द्वारा जोड़ी गई; पैराग्राफ 2(1)(क) उस सदस्य को अयोग्य ठहराता है जो “स्वेच्छा से” अपने दल की सदस्यता छोड़ दे।
- अनुच्छेद 190(3)(b): यदि अध्यक्ष संतुष्ट हो कि विधायक का इस्तीफ़ा स्वैच्छिक या वास्तविक नहीं है, तो वह उसे स्वीकार नहीं करेगा।
- किहोतो होलोहान (Kihoto Hollohan, 1992): अयोग्यता का निर्णय करते समय अध्यक्ष अधिकरण के रूप में कार्य करता है, जो न्यायिक पुनर्विलोकन के अधीन है।
- केशम मेघचंद्र सिंह (Keisham Meghachandra Singh, 2020): अयोग्यता याचिकाओं का निपटारा सामान्यतः तीन माह के भीतर होना चाहिए।