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7. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology)GS314 October 2026

IN-SPACe ने निजी अंतरिक्ष कंपनियों से SCL मोहाली की स्वदेशी अंतरिक्ष-श्रेणी चिप्स इस्तेमाल करने का आग्रह किया

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ख़बर

बेंगलुरु। द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, गैर-सरकारी संस्थाओं की अंतरिक्ष गतिविधियों की निगरानी करने वाले भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre, IN-SPACe) ने मंगलवार को स्टार्टअप, उद्योग, शैक्षणिक संस्थाओं और शोधकर्ताओं से आग्रह किया कि वे अंतरिक्ष और प्रक्षेपण यानों के लिए सरकारी सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (SCL), मोहाली में बनी चिप्स का उपयोग करें। SCL की स्थापना 1976 में हुई थी; यह भारत की एकमात्र एकीकृत उपकरण निर्माण सुविधा है, यानी चिप का डिज़ाइन, निर्माण, परीक्षण और पैकेजिंग एक ही छत के नीचे होती है, और मंगल कक्षित्र मिशन (Mars Orbiter Mission) में प्रयुक्त CMOS चिप्स इसी ने बनाई थीं। एक संयुक्त वेबिनार में SCL ने बताया कि उसके लगभग 15 उत्पादों को उड़ान का अनुभव (flight heritage) प्राप्त है, यानी वे किसी वास्तविक मिशन में काम कर चुके हैं; वह सेंसर, कन्वर्टर, प्रोसेसर, मेमोरी और विशेष रूप से बनाई गई चिप्स उपलब्ध कराती है। उसके तिमाही वेफ़र रन कंपनियों के लिए खुले हैं। वेबिनार में स्टार्टअप गैलेक्सआई (GalaxEye) और इंस्पेसिटी (InspeCity) शामिल हुए।

प्रीलिम्स तथ्य

  • IN-SPACe की स्थापना 2020 में अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत हुई; यह गैर-सरकारी संस्थाओं की अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने और उन्हें प्राधिकृत करने वाली एकल-खिड़की एजेंसी है।
  • भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023 (Indian Space Policy, 2023) निजी कंपनियों को अंतरिक्ष गतिविधियाँ आरंभ से अंत तक स्वयं करने की अनुमति देती है और ISRO को अनुसंधान तथा उन्नत प्रौद्योगिकी का काम सौंपती है।
  • विकिरण-रोधी चिप्स (Radiation-hardened chips) इस तरह बनाई जाती हैं कि वे उन ब्रह्मांडीय किरणों और सौर कणों के बीच भी काम करती रहें, जो कक्षा में साधारण इलेक्ट्रॉनिक्स को बिगाड़ या नष्ट कर देते।