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1. राजव्यवस्था एवं शासन (Polity & Governance)GS215 October 2026

सर्वोच्च न्यायालय ने पत्रकार के खाते का डेटा माँगने वाला पुलिस का नोटिस X के नाम ‘ज़रूरत से ज़्यादा’ कहकर रद्द किया

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ख़बर

नई दिल्ली। 14 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने गाज़ियाबाद पुलिस द्वारा X को भेजा वह नोटिस रद्द कर दिया जिसमें घटना से पहले के लगभग तीन महीनों के पत्रकार के खाते का डेटा माँगा गया था: लॉगिन IP, ईमेल, IMEI और पंजीकरण लॉग (Abhishek Upadhyay v. State of UP, LiveLaw के अनुसार)। न्यायालय ने कहा कि घटना से पहले की अवधि की कोई निजी जानकारी नहीं माँगी जा सकती; FIR के बाद भी ऐसा डेटा तभी माँगा जा सकता है जब आरोपी का पता लगाने या उसे गिरफ़्तार करने के अन्य उपाय अपर्याप्त हों; और जो कुछ पहले ही प्राप्त हो चुका है वह ‘याचिकाकर्ता के विरुद्ध प्रयोग नहीं किया जाएगा’। न्यायमूर्ति बागची ने इस माँग को ‘ज़रूरत से ज़्यादा’ (an overkill) बताया। रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि किस प्रावधान का प्रयोग किया गया।

प्रीलिम्स तथ्य

  • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita) की धारा 94 न्यायालय या थाने के भारसाधक अधिकारी को दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक संचार या उपकरण प्रस्तुत करने का समन जारी करने देती है; यह CrPC की धारा 91 की जगह लेती है।
  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) की धारा 69 केंद्र या राज्य सरकार (या उसके विशेष रूप से प्राधिकृत अधिकारी) के निर्देश पर सूचना के अवरोधन, निगरानी या विसंकेतन की अनुमति देती है; धारा 69A केंद्र सरकार को सार्वजनिक पहुँच रोकने की अनुमति देती है। दोनों कार्यपालिका के आदेश हैं, न्यायिक नहीं।
  • के.एस. पुट्टस्वामी (2017): निजता में राज्य के किसी भी दखल का कानूनी आधार, वैध उद्देश्य होना चाहिए और वह उस उद्देश्य के अनुपात में होना चाहिए।